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मुसलमानोंपर अत्याचार करनेवाले देहली पुलिसकर्मियों से प्रतिशोध लेने की धमकी !
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कोरोना संक्रमित मुसलमानों को पुलिस और गैरमुसलमानों में कोरोना फैलाने का आवाहन
- क्या अब देश के तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी और आधुनिकतावादी इसका विरोध करेंगे ? अथवा इसपर मौन रहकर उनका समर्थन ही करेंगे ?
- ऐसा आवाहन कर धर्मांधों को सीधे भारत के विरुद्ध भडकाकर इस्लामिक स्टेट को पहले पाठ पढाना आवश्यक !

नई देहली – देहली स्थित निजामुद्दीन मरकज में आयोजित तबलीगी जमात के कार्यक्रम के पश्चात देश में फैले कोरोना संक्रमण के सूत्रपर इस्लामिक स्टेट की पत्रिका में तबलीगी जमात की प्रशंसा की गई है । इस पत्रिका द्वारा यातायात बंदी के उपलक्ष्य में विशेषांक प्रकाशित किया गया है । उसमें तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना मोहम्मद साद कंधालवी की भी प्रशंसा की गई है । समाचार वाहिनी ‘टाइम्स नाऊ’ ने यह समाचार दिया है ।
इस पत्रिका में रखे गए सूत्र तथा भडकाऊ वक्तव्य !
१. भारत में कोरोना का प्रसार करने हेतु मौलाना साद और उनके अनुयायियों ने अच्छा काम किया है । मौलाना साद और निजामुद्दीन मरकज इसके लिए प्रशंसा के पात्र हैं; क्योंकि वे भारत में कोरोना के प्रमुख प्रचारक प्रमाणित हुए हैं ।
२. देहली पुलिसकर्मी मुसलमानों को लक्ष्य बनाकर उनपर अत्याचार कर रहे हैं । इस्लामिक स्टेट इसे सहन नहीं करेगा और हम उनके बचाव हेतु भारत आ रहे हैं ।
३. देहली दंगे के प्रकरण में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों को गिरफ्तार कर देहली पुलिस प्रशासन ने निंदनीय कृत्य किया है और मुसलमानों को इसका प्रतिशोध लेना चाहिए ।
४. यातायात बंदी की अवधि में कोरोना संक्रमित मुसलमान कर्तव्यरत पुलिसकर्मी तथा इस्लाम को न माननेवालों में कोरोना का प्रसार करें । इस्लाम को न माननेवालों को उनकी पात्रता दिखाने का यही उचित अवसर है । इस अवसर का उपयोग सरकार के विरुद्ध करना चाहिए ।
५. यातायात बंदी में ‘लोन वुल्फ एटैक’ (अकेले व्यक्ति द्रारा चाकू, बंदूक, वाहन आदि से आक्रमण करने की पद्धति) को प्रोत्साहन देना चाहिए । चाकू, पेट्रोल बम, पट्टा (बैल्ट) आदि का उपयोग कर भारत में नरसंहार करना चाहिए ।
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