- देश के प्रत्येक नागरिक को चीन के इस दावे को तोड डालने का प्रयास कर चीन के मुंहपर करारा तमाचा जड देना चाहिए !
- भारत में चीनी वस्तुओं की मांग घटनेपर उससे चीन की आर्थिक हानि होगी । इसे ध्यान में रखकर चीन इस प्रकार के वक्तव्य देता जा रहा है !

बीजिंग (चीन) – चीन के सरकारी समाचारपत्र ‘ग्लोबल टाईम्स’ में प्रकाशित लेख में कहा गया है कि, सामान्य भारतीयों को चीन के विरुद्ध भडकाने का और चीन को कलंकित करने का जानबूझकर प्रयास किया जा रहा है । चीन के उत्पाद सामान्य भारतीयों के जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं और उन्हें हटाना कठिन है । चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करने का आवाहन संपूर्णरूप से असफल सिद्ध होगा ।
आजकल भारत में चीन के साथ चल रहे विवादपर तथा चीन में फैले कोरोना संक्रमण के कारण चीनी वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने का अभियान चलाया जा रहा है । चीन की ‘शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज’ के झाओ जेनचेंग ने इसपर आधारित यह लेख लिखा है ।
१. इस लेख में लद्दाख के शिक्षा विशेषज्ञ सोनम वांगचूक का भी उल्लेख किया गया है । उन्होंने ‘यू ट्यूब’पर एक वीडियो अपलोड कर चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करने का अनुरोध किया था । इसमें ऐसा भी कहा गया है कि, ‘सोनम वांगचूक जैसे व्यक्ति भारतीयों को चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करने के लिए प्रवृत्त कर रहे हैं ।’
२. इस लेख में कहा गया है कि सीमापर भारत एवं चीन में उत्पन्न विवाद कोई गंभीर बात नहीं है तथा दोनों देशों में इसपर संवाद चल रहा है; परंतु कुछ भारतीय मीडिया तथा कुछ भारतीय चीन को कलंकित करने का प्रयास कर रहे हैं । (ऐसा कहकर चीन सीमा विवाद को सौम्य प्रमाणित करने का प्रयास कर रहा है, तो दूसरी ओर युद्धाभ्यास कर सीमापर बडी संख्या में सैनिकों की नियुक्ति कर युद्ध की तैयारी कर रहा है । यह ना समझें कि, भारत इतना मूर्ख है ! – संपादक)
३. इससे पहले ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने एक ट्वीट किया था, जिसमें उसने कहा था कि, भारत में रणनीति बनाने का अधिकार एक छोटे समूह के पास है । यह समूह चीन विरोधी नकारात्मकता से भरा हुआ है । चीन का विकास, साथ ही बीजिंग एवं नई देहली के मध्य बढती दूरी के कारण भारत में चीन के प्रति संभ्रम बढ रहा है ।
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