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भारतीय वंश के डॉ. धनंजय लाकिरेड्डी की प्रेयर थेरेपी आरंभ
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सर्व धर्मियों की प्रार्थना का समावेश
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चिकित्सकीय उपचार भी चलते रहेंगे
यद्यपि भारत विश्व का आध्यात्मिक गुरु है, तथापि भारत में ऐसा प्रयोग करने का विचार भी किसी के मन में नहीं आता; क्योंकि भारत ने विनाशकारी निधर्मीवाद को स्वीकार किया है !

वॉशिंग्टन (अमेरिका) – अमेरिका में कोरोना ने कोहराम मचाया हुआ है । यहां अब तक ११ लाख से अधिक लोगों को कोरोना हो चुका है तथा ६३ सहस्र से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है । अभी तक उसे वश करने में अमेरिका असफल रहा है । इसलिए कोरोना ग्रस्तों पर उपचार करने के लिए अलग अलग विकल्प अपनाए जा रहे हैं । अमेरिका के भारतीय वंश के डॉक्टरों द्वारा प्रार्थना करने से कोरोना पीडितों के स्वास्थ्य में क्या सुधार हो सकता है ?, इस संबंध में शोध चल रहा है । उसी के एक भाग स्वरूप भारतीय वंश के डॉ. धनंजय लाकिरेड्डी ने इसके लिए १ मई से प्रेयर थेरेपी प्रारंभ की है । प्रार्थना द्वारा कोरोनाग्रस्तों पर उपचार करते हुए चिकित्सकीय उपचार भी किए जाएंगे ।
१. प्रारंभ में प्रार्थना अभ्यास का प्रयोग ५०० रोगियों पर किया जानेवाला है । इन ५०० रोगियों को २ गुटों में विभाजित किया जाएगा । इन रोगियों को प्रयोग की कोई पूर्व कल्पना नहीं दी जाएगी । इन रोगियों के लिए उनके धर्मानुसार प्रार्थना की जानेवाली है । रोगियों में ईसाई, मुसलमान, हिन्दू, बौद्ध आदि धर्मीय रोगियों का समावेश है ।
२. डॉ. धनंजय ने इस प्रेयर थेरेपी के परिणामों का अध्ययन करने के लिए एक चिकित्सकीय दल का गुट बनाया है । यह गुट रोगियों के स्वास्थ्य पर ध्यान रखेगा । उसमें कितने रोगी कितने दिनों से वेंटिलेटर पर हैं ?, उनके शरीर के कितने और कौन से अवयवों ने काम करना बंद कर दिया है ?, कितने दिनों पश्चात उन्हें आई.सी.यू. से बाहर निकाला गया है ?, कितनों की मृत्यु हो गई है ? आदि अनेक प्रकार की जानकारी नोट की जानेवाली है । डॉ. लाकिरेड्डी द्वारा किये जा रहे प्रयोग के संबंध में उनके सहयोगियों द्वारा उनकी प्रशंसा की जा रही है ।
हमारा दैवी शक्ति पर भी विश्वास ! – डॉ. धनंजय लाकिरेड्डी

डॉ. धनंजय लाकिरेड्डी ने कहा कि, हम विज्ञान पर भी विश्वास रखते हैं । उसके अतिरिक्त दैवी अलौकिक शक्ति पर भी विश्वास रखते हैं । इसलिए दैवी शक्ति का भी रोगियों पर क्या कुछ परिणाम होता है ?, हम इसका भी अध्ययन करनेवाले हैं ।
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