जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की केंद्र सरकार से मांग
(मौलाना अर्थात इस्लाम का विद्वान)

नई दिल्ली – बकरीद की पृष्ठभूमि में जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने केंद्र सरकार से गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग की है, ताकि इस विषय पर होनेवाली राजनीति तथा हिंसा को हमेशा के लिए रोका जा सके । मदनी ने यह भी कहा कि “जो कोई गाय को कसाई को बेचता है, जो उसे खरीदता है तथा जो उसका मांस खाता है, वे सभी दोषी हैं ।” (देश के अनेक राज्यों में गोहत्या प्रतिबंध कानून लागू है । इसके उपरांत भी, मौलाना मदनी के धर्मबंधु खुलेआम गोहत्या करते हैं । उस पर आंखें मूंदकर ‘सरकार को क्या करना चाहिए’, यह बताकर स्वयं पर लगे पाप को झटकने का मदनी का यह दयनीय प्रयास ही कहा जाएगा – संपादक)
🚨 Jamiat Ulema-e-Hind President has urged the Central Government to declare the cow as the “National Animal”.
After years of opposition, now even their tone seems to be changing. Hindus feel the Government should seriously consider this demand.
But a bigger question remains ❓… pic.twitter.com/TfbDAf3AC5
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) May 26, 2026
बकरीद के लिए गाय की कुर्बानी देना कहीं भी नहीं लिखा है – पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी

अब इस विषय पर भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी एक महत्त्वपूर्ण मत व्यक्त किया है । उन्होंने कहा कि अनेक लोगों में पशु बलि देने की परंपरा है, क्योंकि वह उनके धर्म के सिद्धांतों के अनुसार है । अब वह गाय हो, ऊंट हो या बकरा । यह अलग विषय है । यदि लोगों को गाय की कुर्बानी पर आपत्ति है, तो सरकार को मौलाना मदनी के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करना चाहिए ।
अंसारी ने मुसलमानों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि बकरीद के लिए केवल गाय की ही कुर्बानी देना आवश्यक है, ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है । आप बकरे की भी कुर्बानी दे सकते हैं । ऐसे अनेक लोग हैं, जिनकी बकरा खरीदने की भी क्षमता नहीं है । मैं इस विषय का समाधान खोजने का कार्य भारत सरकार और उनकी समझ पर छोडता हूं ।
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