बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) एवं सीमा सुरक्षा बल (BSF) के मध्य गोलीबारी की घटनाए हो रही हैं ।

भारत–बांग्लादेश सीमा पर असम से बंगाल तक तनाव ।

ढाका (बांग्लादेश) – पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के परिणाम आने एवं भाजपा की सरकार बनने के उपरांत भारत एवं बांग्लादेश की सीमा पर तनाव बहुत बढ गया है । यह तनाव विशेष रूप से भारत – बांग्लादेश की ४,९९६ किलोमीटर लंबी सीमा के उन खंडों में देखा जा रहा है, जहां कांटेदार तार की बाड लगी है । घुसपैठ प्रतिबंधित करने के लिए सीमा सुरक्षा बल द्वारा की जा रही कार्रवाइयों से बांग्लादेश पक्ष हतोत्साहित दिखाई दे रहा है ।

९ मई से सीमा सुरक्षा बल एवं बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बी.जी.बी.) के मध्य ८ झडपें हुई हैं । इनमें बांग्लादेशी नागरिकों की भडकाऊ भूमिका रही है । ९ मई के उपरांत से लगभग प्रतिदिन गोलाबारी या घुसपैठ प्रतिबंधित करने को लेकर हिंसात्मक घटनाए हो रही हैं । यह स्थिति असम से लेकर बंगाल तक की सीमा पर देखने को मिल रही है । इस पृष्ठभूमि में बी.जी.बी. ने सीमावर्ती जनता को समझाने के लिए अभियान चलाया है ।

१. बी.जी.बी. का कथन है कि उनके पेट्रोलिंग दल एवं स्थानीय ग्रामीणों ने १६ मई को बिजयनगर (ब्राह्मणबाडिया) में सीमा सुरक्षा बल द्वारा ७५० भारतीय नागरिकों को बांग्लादेशी क्षेत्र में धकेल देने के प्रयास को रोका एवं उन्हें खदेडा । इसके उपरांत १८ मई को सोनारहाट सीमा क्षेत्र में गोलीबारी हुई, ऐसा बी.जी.बी. का कथन है ।

२. बी.जी.बी. ने ‘जीरो पॉइंट’ नियमों का उल्लंघन किए जाने का संदर्भ देते हुए सीमा सुरक्षा बल के विरोध में अनेक आरोप लगाए हैं । करीमगंज के जीरो पॉइंट पर २५ मई को पुन: दोनों पक्षों के मध्य तनाव बढा । निरंतर चल रही झडपों के समय बांग्लादेशी ग्रामीण आक्रामक रूप से आगे आते हैं एवं बी.जी.बी. के लिए “ढाल” बनते हैं ।

३. सीमा पर तनाव की पृष्ठभूमि में बी.जी.बी. ने ब्राह्मणबाडिया सीमा के समीप मेगाफोन के माध्यम से जनजागरण अभियान प्रारंभ किया है । इसमें स्थानीय निवासियों को घुसपैठ एवं बिना अनुमति सीमा पार करने के प्रति सतर्क रहने के संबंध में सूचित किया जा रहा है । बी.जी.बी. के लेफ्टिनेंट कर्नल शरीफुल इस्लाम ने बताया कि यह अभियान स्थानीय लोगों को सतर्क रहने एवं सीमा सुरक्षा में सहयोग करने का अनुरोध करता है ।