जिसे परीक्षा लेनी हो, वह दरबार में आए ! – पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री

अधर्म का पोषण करने वाले श्याम मानव का पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री को चुनौती देने का प्रकरण

श्याम मानव और पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री

नागपुर – बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री के चमत्कारों को चुनौती देते हुए ‘अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ ने पुरस्कार की राशि ३० लाख रुपयों से बढाकर ८० लाख रुपये कर दी है । समिति के संयोजक श्याम मानव ने यह चुनौती दी है, जिसका उत्तर देते हुए पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री ने कहा, ‘‘जिसे परीक्षा लेनी हो, वह दरबार में आए ।’’ श्याम मानव ने एक दैनिक समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में चुनौती की शर्तों का विवरण दिया ।

श्याम मानव द्वारा दी गई चुनौती की शर्तें !

१. यह परीक्षण केवल नागपुर के पत्रकार भवन में ही संपन्न होगा ।

२. एक पंच समिति का गठन किया जाएगा । इसमें पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री की सम्मति भी अनिवार्य होगी । परीक्षण के समय उनके तथा वहां उपस्थित अन्य व्यक्तियों के भ्रमणभाष (मोबाइल) मुद्रांकित (सील) कर दिए जाएंगे ।

३. महाराज के समक्ष अकस्मात १० अपरिचित व्यक्तियों को लाया जाएगा । महाराज को उन व्यक्तियों के नाम, उनके पिता का नाम, कुलनाम (सरनेम) तथा भ्रमणभाष क्रमांक बताना होगा, साथ ही समीप रखी १० वस्तुओं की पहचान अपनी ‘दिव्य दृष्टि’ से करानी होगी ।

४. यदि वे प्रथम प्रयास में सफल होते हैं, तो ५ दिनों के पश्चात नये व्यक्तियों के साथ यही प्रक्रिया पुनः दोहराई जाएगी । दोनों बार ९० प्रतिशत शुद्ध परिणाम आने पर उन्हें ८० लाख रुपयों का पुरस्कार दिया जाएगा ।

अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति का तर्क है कि दरबार में सूचना एकत्र करने के गुप्त मार्ग हो सकते हैं । उन्हें नियंत्रित करना दुष्कर है । यदि महाराज ने स्वयं को सिद्ध कर दिया, तो मैं उनके चरणों में नतमस्तक हो जाऊंगा, अपनी संस्था बंद कर दूंगा तथा उनका भक्त बन जाऊंगा । महाराज चुनौती स्वीकार नहीं करेंगे । उन्हें ज्ञात है कि निष्पक्ष चुनौती में सम्मिलित होने पर व्यवसाय बंद हो जाएगा । इसी कारण वे पलायन कर गए । उनका कार्य पाखंडपूर्ण है ।

हम जादूगर नहीं, यह ईश्वरीय प्रेरणा है ! – पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री

इस चुनौती का उत्तर देते हुए पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री ने कहा, ‘‘हम जादूगर नहीं हैं । ईश्वर हमें जो प्रेरणा देते हैं, उसी के अनुरूप हम जनसाधारण का मार्गदर्शन करते हैं ।’’

संपादकीय भूमिका

  • हिन्दू संतों के कार्य पर प्रश्नचिह्न उपस्थित कर उनकी मानहानि करना नास्तिकों का वैचारिक प्रदूषण ही है !
  • पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री के दरबार में आकर सत्य को जाने बिना, अपनी शर्तें थोपकर उन्हें संकट में डालने का श्याम मानव का यह प्रयास विफल सिद्ध होगा, ऐसा भक्तों का मत है !