बंगाल चुनाव को लेकर राजनीतिक विश्लेषक पिनाकी गंगोपाध्याय का विश्लेषण

कोलकाता – बंगाल में कुछ दिन पूर्व ही में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम अत्यंत आश्चर्यजनक रहे हैं । यहां की जनता में कई वर्षों से भय का वातावरण था, जिसे भाजपा ने प्रभावी रूप से तोडा । इन क्षेत्रों में हिन्दू मतदाताओं का बडा वर्ग एकजुट होकर सामने आया । विशेष रूप से ५० प्रतिशत से अधिक मुस्लिम जनसंख्यावाले मुर्शीदाबाद, मालदा एवं उत्तर दिनाजपुर क्षेत्रों में भाजपा को राजनीतिक रूप से अछूत माना जाता था; किंतु इस बार की चुनावी परिस्थिति पूरी तरह परिवर्तित हो गई ।
“यदि किसी क्षेत्र में मुस्लिम जनसंख्या अधिक हो, तो भाजपा जीत नहीं सकती” — यह समीकरण अब टूट गया है । भाजपा ने मुस्लिम-बहुल तथा तृणमूल कांग्रेस के अनेक दृढ गढों में भी सफलता प्राप्त की है, ऐसा मत बंगाल के राजनीतिक विश्लेषक एवं हिन्दुत्वनिष्ठ नेता पीनाकी गंगोपाध्याय ने ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि से बातचीत में व्यक्त किया ।
मुस्लिम मतों का विभाजन !

श्री गंगोपाध्याय ने आगे कहा कि भाजपा केवल हिन्दू उम्मीदवारों के कारण नहीं जीती । उसकी विजय का मुख्य कारण यह था कि इन निर्वाचन क्षेत्रों में हिन्दू मतदाताओं ने अत्यंत अनुशासन एवं एकजुटता के साथ मतदान किया । दूसरी ओर मुसलमानों का तृणमूल कांग्रेस पर विश्वास कम हुआ, जिसके कारण उनकी निष्ठा अन्य मुस्लिम-समर्थित दलों की ओर चली गई ।
उदाहरण के लिए, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), कांग्रेस, इंडियन सेक्युलर फ्रंट तथा हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी जैसे दलों में मुस्लिम मत विभाजित हो गए । एक ओर मुस्लिम मतों का बंटवारा तथा दूसरी ओर हिन्दू मतों का एकीकरण — इन दोनों कारणों से भाजपा को विजय प्राप्त हुई ।
ममता बनर्जी सरकार से मोहभंग !
उन्होंने आगे कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का गहरा संदेश यह है कि भाजपा को इन सीटों को जीतने के लिए अपनी पहचान छिपाने की आवश्यकता नहीं पडी । उन्हें किसी प्रकार का दिखावा नहीं करना पडा । उन्होंने हिन्दू उम्मीदवार उतारे फिर भी जीत प्राप्त की; क्योंकि मतदाताओं ने कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, घुसपैठ, महिला सुरक्षा, स्थानीय आतंक तथा सत्ताधारियों की विश्वसनीयता जैसे सूत्रों को महत्त्व दिया ।
भ्रष्टाचार के अनेक आरोपों एवं ममता बनर्जी सरकार द्वारा इन क्षेत्रों में विकास के अधूरे वादों के कारण मुस्लिम मत तृणमूल कांग्रेस से दूर हो गए तथा अन्य दलों में बंट गए ।
उन्होंने कहा कि यह वास्तव में एक “राजनीतिक भूकंप” है । मुर्शीदाबाद, मालदा एवं उत्तर दिनाजपुर में भाजपा की जीत यह दर्शाती है कि जब हिन्दू मत एकजुट होते हैं तथा अल्पसंख्यक मतों में विभाजन होता है, तब तृणमूल कांग्रेस के सबसे दृढ गढ भी ढह सकते हैं ।
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