Ghaziabad School Conversion : स्कूल में धर्मांतरण का विरोध करने वाली हिंदू शिक्षिका को ईसाई प्रधानाचार्या ने नौकरी से निकाल दिया ।

  • गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) स्थित ‘सेंट टेरेसा अकैडमी’ स्कूल की घटना ।

  • स्कूल के सामने हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों का प्रदर्शन ।

  • स्कूल की मान्यता समाप्त करने तथा प्रधानाचार्या को बंदी बनाने की मांग ।

शिक्षिका अरुणा गोस्वामी, प्रधानाचार्या सिस्टर लूसी

गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) – शहर के मोदीनगर क्षेत्र के संतपुरा गली नंबर – ६ में स्थित ‘सेंट टेरेसा अकैडमी’ स्कूल में पढाने वाली पीटी (फिजिकल ट्रेनिंग ‘पीटी’) शिक्षिका अरुणा गोस्वामी ने प्रधानाचार्या सिस्टर लूसी पर हिंदू बच्चों तथा कर्मचारियों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रताडित करने का आरोप लगाया है । विरोध करने पर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया । अरुणा गोस्वामी ने मोदीनगर पुलिस थाने में शिकायत प्रविष्ट कर कार्यवाही की मांग की है । ५ मई को हिंदू संगठनों ने स्कूल के प्रवेश द्वार के सामने बहुत बडा प्रदर्शन किया तथा नारे लगाए । इस समय उन्होंने प्रवेश द्वार पर ‘जय श्रीराम’ लिखा और हनुमान चालीसा का पाठ किया । प्रदर्शनकारियों ने स्कूल की मान्यता समाप्त करने तथा प्रधानाचार्या को तुरंत बंदी बनाने की मांग की । स्थिति को देखते हुए स्कूल का प्रवेश द्वार बंद कर दिया गया तथा भारी पुलिस बल नियुक्त किया गया ।

अरुणा गोस्वामी ने अपनी शिकायत में बताया है कि,

१ . मैं वर्ष २०१२ से सेंट टेरेसा अकैडमी में पीटी शिक्षिका के रूप में कार्यरत हूं । मेरा बेटा शिव गोस्वामी भी इसी स्कूल में पढता है ।

२ . दो वर्ष पहले नई प्रधानाचार्या सिस्टर लूसी के आने के बाद स्कूल का वातावरण पूरी तरह बदल गया है । स्कूल में हिंदू बच्चों के हाथों में बंधा कलावा (धार्मिक धागा) बलपूर्वक काटा जाता है । हर रविवार गरीब हिंदू बच्चों को पैसों का लालच देकर स्कूल बस से चर्च ले जाया जाता है तथा वहां उनका धर्मांतरण किया जाता है ।

३ . बच्चों के साथ – साथ शिक्षिकाओं को भी छुट्टी के बाद चर्च जाने के लिए विवश किया जाता है । स्कूल में हिंदू त्योहार मनाने पर पूरी तरह रोक है । प्रधानाचार्या के कार्यालय में अभिभावकों के साथ गाली – गलौज और अभद्र व्यवहार किया जाता है ।

४ . ४ मई २०२६ को प्रधानाचार्या सिस्टर लूसी ने मुझे अपने कार्यालय में बुलाया तथा हाथ पर बने ‘भगवान महादेव’ के टैटू को मिटाने तथा माथे की बिंदी हटाने का आदेश दिया । उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्कूल परिसर में केवल ईसाई धर्म के नियम चलेंगे । जब मैंने इसका विरोध किया, तो उसी दिन मुझे नौकरी से निकाल दिया गया ।

५ . मैं चर्च नहीं गई तथा कलावा नहीं काटा, इसलिए मेरे बेटे शिव को भी लगातार मानसिक रूप से प्रताडित किया गया । उसे छात्रावास में रखा गया, जहां वह बीमार पड गया । इसके बाद उसे स्कूल से निकाल दिया गया ।

प्रधानाचार्या ने आरोपों को अस्वीकार किया।

प्रधानाचार्या सिस्टर लूसी ने सभी आरोपों को निराधार बताया है । उन्होंने कहा कि उनके स्कूल में सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है तथा सभी धर्मों के त्योहार मनाए जाते हैं । पीटी शिक्षिका को बच्चों या अभिभावकों की शिकायत के आधार पर त्रुटियां सुधारने के लिए एक – दो बार समझाया गया था, परन्तु उनके द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे हैं । उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे को स्कूल ने नहीं निकाला, बल्कि उसके पिता ने स्वयं स्कूल छोडने के लिए आवेदन किया था ।

संपादकीय भूमिका

  • ईसाई संस्थाओं द्वारा संचालित स्कूलों में हिंदू बच्चों का वैचारिक रूपांतरण किया जाता है, यह सर्वविदित है । इसलिए सरकार को स्वयं आगे बढकर ऐसे स्कूलों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए ।
  • प्रतिदिन इस प्रकार की घटनाएं पिछले कई वर्षों से सामने आने के बाद भी केंद्र स्तर पर इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं ? अब हिंदुओं को इस संदर्भ में सरकार पर दबाव बनाना आवश्यक हो गया है ।