जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के कुलगुरु मझहर आसिफ का रा.स्व. संघ के कार्यक्रम में वक्तव्य !
वक्तव्य पर हो रही है टीका l
(डी.एन.ए. अर्थात डीऑक्सीरिबो न्यूक्लिक एसिड अर्थात व्यक्ति की मूल पहचान बतानेवाले शरीर के घटक)

नई दिल्ली – सभी भारतीयों में भगवान महादेव का डी.एन.ए. है , ऐसा वक्तव्य यहां के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के कुलगुरु मझहर आसिफ द्वारा किए जाने के पश्चात उनकी आलोचना हो रही है । रा.स्व. संघ के १०० वर्षों की पूर्ति के उपलक्ष्य में जामिया में आयोजित ‘युवा कुंभ’ कार्यक्रम में कुलगुरु मझहर आसिफ द्वारा किए गए उपर्युक्त विधान का वीडियो सामाजिक माध्यमों से प्रसारित होने के पश्चात उनकी आलोचना होने लगी ।
क्या बोले कुलगुरु मझहर आसिफ ?
इस वीडियो में कुलगुरु मझहर कह रहे हैं कि , यहां बैठे सभी को देखकर मुझे ऐसा नहीं लगता कि , सभी की मातृभाषा , पालन-पोषण अथवा संस्कृति एक जैसी है । मैं यह भौगोलिक दृष्टि से कह रहा हूं , संभवतः वे एक ही प्रदेश के न हों । उनके धर्म भी भिन्न हो सकते हैं । इन सबके पश्चात भी हम भारतीय ही हैं । हम भारतीय हैं ; क्योंकि हमारे डी.एन.ए. में भगवान महादेव का डी.एन.ए. है ।
जामिया के विद्यार्थियों द्वारा विरोध !
मूलतः संघ के कार्यक्रम को जामिया प्रशासन द्वारा अनुमति दिए जाने से विद्यार्थियों ने विरोध भी किया था । अब इस वक्तव्य के पश्चात जामिया की ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ की शाखा ने इस घटना का विरोध किया है । इस संगठन ने कहा है कि , हम कुलगुरु मझहर आसिफ द्वारा जामिया में की गई उस टिप्पणी का तीव्र विरोध करते हैं । यह शैक्षिक एवं वैज्ञानिक उत्कृष्टता के लिए पहचाना जानेवाला संस्थान है । कुलगुरु का विधान शास्त्रहीन एवं तथ्यहीन है । (यदि किसी हिन्दू कुलगुरु ने हिन्दू धर्म पर टीका की होती , तो क्या उस विश्वविद्यालय के हिन्दू विद्यार्थियों ने इस प्रकार विरोध दर्शाया होता ? – संपादक)
भाजपा द्वारा वक्तव्य का समर्थन !
भाजपा की सूचना-प्रौद्योगिकी शाखा के प्रमुख अमित मालवीय ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि , इस वक्तव्य का शाब्दिक अर्थ निकालकर इसे अशास्त्रीय कहकर नकारना पूर्णतः अनुचित है । मौलाना अबुल कलाम आजाद ने निरंतर ऐसा तर्क दिया कि , भारतीय मुसलमान भारत की मिश्रित संस्कृति के अविभाज्य अंग हैं , जो हिन्दुओं के समान ही इस भूमि एवं वंश से बंधे हुए हैं । मौलाना वहीदुद्दीन खान ने इस दृष्टिकोण को और अधिक बल देते हुए इस पर बल दिया कि , धर्मान्तरण से वंश अथवा मूल नहीं बदलता । यहां तक कि मोहम्मद इकबाल , जिन्हें अधिकतर ‘अल्लामा इकबाल’ के रूप में पहचाना जाता है और जो पाकिस्तान के निर्माण के वैचारिक संस्थापक थे , उन्होंने भी भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत को स्वीकार किया था एवं भगवान राम का वर्णन ‘इमाम-ए-हिन्द’ अर्थात ‘इस भूमि के लोगों के आध्यात्मिक मार्गदर्शक’ के रूप में किया था । इस दृष्टिकोण से देखा जाए , तो कुलगुरु की टिप्पणी विभाजक न होकर एकता का प्रतीक है । यह एक दीर्घकालीन बौद्धिक परम्परा की प्रतिध्वनि है , जो धार्मिक सीमाओं के परे जाकर भारत के लोगों को एक साझा सभ्यता की विरासत के वारिसदार के रूप में मान्यता देती है ।
The outrage over Jamia VC Mazhar Asif’s remark that “we all have Mahadev’s DNA” says more about our shrinking tolerance for civilisational ideas than about the statement itself.
To interpret it literally and then dismiss it as “unscientific” is to miss the point entirely. In the…
— Amit Malviya (@amitmalviya) April 30, 2026
(और इनकी सुनिए…) ‘यह भारत में शिक्षा का ‘हिन्दूकरण’ करने का प्रयास !’ – पाकिस्तानपाकिस्तानी विदेश मन्त्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इस पर कहा कि , भारत के मुसलमानों की भाषा एवं पहचान बचाने के लिए विश्व को आगे आना चाहिए । विश्व इस सूत्र पर मौन नहीं रह सकता । जामिया मिलिया में संघ का कार्यक्रम आयोजित किया गया है । यह भारत में शिक्षा का ‘हिन्दूकरण’ करने का प्रयास एवं भारतीय अल्पसंख्यकों के संस्थानों पर हुआ आक्रमण है , ऐसा आरोप लगाया । (पाकिस्तान भारत के आन्तरिक विषयों में हस्तक्षेप न करे । वह अपने देश की आर्थिक स्थिति की ओर ध्यान दे । – संपादक ) |
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(और इनकी सुनिए …) ‘भारत में रहने से मुझे लज्जा आती है !’ – Kapil Sibal, Congress