‘राजा शिवाजी’ चलचित्र के प्रदर्शन पर रोक लगाने से उच्च न्यायालय ने मना किया ।

चलचित्र के नाम से छत्रपति शिवाजी महाराज का अनादर नहीं होता – न्यायालय का निरीक्षण

मुंबई – छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित ‘राजा शिवाजी’, इस चलचित्र के शीर्षक से छत्रपति शिवाजी महाराज का किसी प्रकारसे अनादर नहीं होता अथवा यह शीर्षक उनका अनादर करनेवाला नहीं है, ऐसा निरीक्षण मुंबई उच्च न्यायालय ने प्रविष्ट किया । चलचित्र के नाम से ‘छत्रपति’ शब्द हटाने से छत्रपति शिवाजी महाराज का अनादर होने का आरोप लगाते हुए ‘श्री छत्रपति शिवाजी महाराज फाऊंडेशन’, इस संस्था ने इस चलचित्र के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग करनेवाली जनहित याचिका प्रविष्ट की थी । न्यायाधीश चंद्रशेखर एवं न्यायाधीश गौतम अखंड ने यह याचिका निरस्त करते हुए इस याचिका को केवल प्रसिद्धि के उद्देश्य से प्रेरित बताया ।

केवल ‘राजा शिवाजी’, इस नाम के कारण समस्त शिवाजी भक्तों की भावनाएं आहत हो रही हैं तथा उससे महाराज का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व अल्प हो रहा है, अतः इस चलचित्र का नाम बदलकर उसे ‘छत्रपति राजा शिवाजी’ किया जाए, यह मांग इस याचिका में की गई थी । इसकी सुनवाई में चलचित्र निर्माता ने न्यायालय में बताया कि यह चलचित्र शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक से पूर्व के कालखंड पर आधारित है, इसलिए उस समय उन्हें नियमतः से ‘राजा शिवाजी’ ही कहा जाता था, साथ ही चलचित्र के आरंभ में इस संदर्भ में ‘संदेश’ देनेवाला लेखन प्रकाशित किया गया है तथा सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को मान्यता भी दी है ।