जिन्हें लगता हो, वे प्रसन्नता से हमारे दरबार में आएं; हमारे पास स्थित ईश्वरी विद्या के दर्शन कराएंगे ! – Pandit Dhirendra Krishna Shastri

  • हिन्दुद्वेषियों की चुनौती को पंडित धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री का मुंहतोड प्रत्युत्तर !

  • ‘अंनिस’ को मुंहतोड उत्तर देने हेतु भक्तों की भीड !

पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री एवं शाम मानव

नागपूर – हिन्दू धर्म का प्रसार एवं सन्तों का अपमान करनेवाले तथाकथित निधर्मीवादियों को बागेश्वर धाम के पंडित धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री ने नागपूर की भूमि से चुनौती दी है । अखिल भारतीय अन्धश्रद्धा निर्मूलन समिति (अंनिस) के श्याम मानव द्वारा दी गई चुनौती को स्वीकार करते हुए, ‘जिन्हें लगता हो, वे दरबार में आएं; हम हमारे पास स्थित ईश्वरी विद्या के दर्शन कराएंगे’, इन शब्दों में उन्होंने हिन्दुद्वेषियों को उत्तर दिया है । दूसरी ओर हिन्दुओं की श्रद्धा पर प्रहार करनेवाली अंनिस को मुंहतोड उत्तर देने हेतु भक्तों ने रेशीम बाग में बडी भीड की है ।

वर्तमान में नागपूर स्थित रेशीम बाग मैदान पर २६ से ३० अप्रैल की कालावधि में ‘श्रीराम कथा’ का आयोजन किया गया है । इस कार्यक्रम के निमित्त श्याम मानव ने पंडित धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री को ८० लाख रुपयों की चुनौती दी थी । श्याम मानव ने पंडित धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री को १० लोगों के नाम, उनके पिता का नाम, आयु एवं दूरभाष क्रमांक (Mobile Number) 98XXXXXXXX अचूक बताने की चुनौती दी है, साथ ही ‘अतीन्द्रिय शक्ति’ की परीक्षा हेतु बन्द कक्ष में रखी १० वस्तुएं पहचानने की भी चुनौती दी है । दोनों परीक्षाओं में न्यूनतम ९० प्रतिशत अचूकता आवश्यक रखी गई है एवं यह प्रक्रिया नागपूर में पत्रकारों की उपस्थिति में होनी चाहिए, ऐसा अंनिस ने कहा है । अंनिस की ओर से कहा गया कि, धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री को सफलता मिलने पर ८० लाख रुपये दिए जाएंगे, अन्यथा उनकी कृति लोगों की भावनाओं का अनुचित लाभ लेना मानी जाएगी । इस पर पंडित धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री ने अत्यन्त निर्भीकता से यह चुनौती स्वीकार की है ।

पंडित धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री बोले, ‘‘इस समय हम नागपूर में ही हैं । मध्यप्रदेश में नहीं । एक घण्टे के लिए नहीं, अपितु ५ दिनों के लिए हैं । कथा के मण्डप में ही हैं । राज्य उनका, नगर उनका एवं मंच भी उनका ही । मैं अकेला ही हूं । जिन्हें उत्साह हो, वे दरबार में आएं । हमारे पास जो विद्या होगी एवं जो शक्ति होगी, हम उसका प्रस्तुतीकरण करेंगे । हम जादूगर नहीं हैं । हमें ईश्वर जो प्रेरणा देंगे, उसके अनुसार ही हम लोगों को मार्गदर्शन करेंगे । वे आए तो उन्हें भी मार्गदर्शन करेंगे ।’’

सनातन धर्म का प्रचार, अर्थात अन्धश्रद्धा नहीं !

इससे पूर्व जनवरी २०२३ में भी इसी प्रकार का षड्यन्त्र रचा गया था । बागेश्वर सरकार के विरुद्ध श्याम मानव ने परिवाद (शिकायत) की थी । ‘धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री अन्धश्रद्धा फैला रहे हैं एवं उनके विरुद्ध अपराध पञ्जीकृत करना चाहिए’, ऐसा उन्होंने पुलिस को बताया था । इस पर नागपूर पुलिस ने बताया, ‘चलचित्र (वीडियो) में आपत्तिजनक ऐसा कुछ भी नहीं है । उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा था, जिससे अन्धश्रद्धा फैले अथवा कानून के अनुसार अपराध सिद्ध हो ।’ पुलिस के इस वक्तव्य के उपरान्त पंडित धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री ने कहा था कि, सनातन का प्रचार अन्धश्रद्धा नहीं है ।

नागपूर में ‘सन्तों का अपमान सहन नहीं करेंगे’, ऐसी भावना भक्त व्यक्त कर रहे हैं । पुलिस के अन्वेषण में भी पंडित धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री के कार्य में कुछ भी अनधिकृत न होने की पुष्टि हुई है ।