Anti-Hindu Lenskart : ‘लेंसकार्ट’ के कर्मचारियों को हिजाब पहनने की अनुमति परंतु कुमकुम-बिंदी लगाने पर प्रतिबंध ।

हिन्दुओं के साथ किया जानेवाला भेदभाव कर्मचारियों के परिचय के प्रमाणपत्रों से उजागर हुआ ।

(हिजाब अर्थात मुसलमान महिलाओं द्वारा सिर एवं गर्दन ढंकने के लिए उपयोग किया जानेवाला वस्त्र)

नई दिल्ली – सूचना तकनीक प्रतिष्ठान ‘टाटा कन्सल्टेंसी सर्विसेस’ में हिन्दू कर्मचारियों के धर्मांतरण की घटना सामने आने के पश्चात अब इस ‘कॉर्पोरेट’ जगत के हिन्दूद्वेष पर चर्चा हो रही है । ऐसे में ही चश्में, गॉगल आदि उत्पाद बनानेवाले प्रसिद्ध प्रतिष्ठान ‘लेंसकार्ट’ का हिन्दूद्वेष सामने आया है । इस प्रतिष्ठान के कर्मचारियों के परिचय प्रमाणपत्र में ‘वेशभूषा’ एवं ‘गणवेश’ के नियमों से यह हिन्दूद्वेष सुस्पष्टता से झलकता है । इसके अंतर्गत कोई पुरुष कर्मचारी काम पर होते समय ‘कलावा’ (हाथ में बांधा जानेवाला पवित्र धागा) अथवा महिला माथे पर कुमकुम-बिंदी लगाती है, तो उसे घर भेजा जाएगा । संक्षेप में कहना हो तो ‘लेंसकार्ट’ के कार्यालय में इन बातों की अनुमति नहीं है, तो दूसरी ओर इन्हीं नियमों में हिजाब पहनने की पूर्ण अनुमति दी गई है । इस प्रतिष्ठान के इस हिन्दूद्वेष के कारण सामाजिक माध्यमों से उसकी आलोचना की जा रही है ।

१. प्रसिद्ध हिन्दुत्वनिष्ठ लेखिका शेफाली वैद्य ने ‘लेंसकार्ट’ की निंदा करते हुए ‘एक्स’पर लिखा है कि हिन्दू बहुसंख्यक भारत में कार्यरत तथा जिनके अधिकांश कर्मचारी एवं ग्राहक भी हिन्दू ही हैं, ऐसे ‘लेंसकार्ट’ जैसे प्रतिष्ठान के द्वारा ऐसी भूमिका अपनाना निंदनीय है । मैं ‘लेंसकार्ट’से कुछ नहीं लूंगी ।

२. अनेक सर्वसामान्य हिन्दुओं ने ‘लेंसकार्ट’ के बहिष्कार का आवाहन किया है ।

एक हिन्दू ने पूछा, श्री. पीयूष बंसल (‘लेंसकार्ट’ के मालिक), यह कैसा हास्यास्पद नियम है ? बिंदी, कलावा अथवा कुमकुम के कारण काम के स्थान पर व्यवसायिक वातावरण कैसे प्रभावित होता है ? अथवा इसके कारण भेदभाव कैसे उत्पन्न होता है ? ऐसे प्रतिबंध क्यों लगाए जा रहे हैं ?

३. दूसरे एक हिन्दू ने लिखा कि मैं ‘लेंसकार्ट’ से चश्मा क्रय नहीं करँगा । अब केवल हिजाब पहननेवाली महिलाएं ही उनसे चश्मे लें। अब आप कृपया आपके कर्मचारियों को नमाज कैसे पढनी है ? तथा रमजान के समय में उपवास कैसे रखने हैं ?, यह भी सिखाने का काम करें ।

४. हिन्दुत्वनिष्ठ प्रसारमाध्यम ‘ऑपइंडिया’ ने यह अधिकार पूर्वक कहा है कि उनके प्रतिनिधियों ने दिल्ली की ‘लेंसकार्ट’ की कुछ शाखाओं का अवलोकन किया । वहां के कर्मचारियों ने अपना नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि इस प्रतिष्ठान के नियम हिन्दू कर्मचारियों के साथ भेदभाव करनेवाले हैं ।

‘लेंसकार्ट’ के मालिक का हास्यास्पद स्पष्टीकरण ।

‘लेंसकार्ट’ के मालिक पीयूष बंसल ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि

मैं सीधे यह बताना चाहता हूं कि अब सामने आए दस प्रमाणपत्र हमारे मार्गदर्शक नियमों का प्रतिबिंब नहीं हैं । हमारे नियमों में कुमकुम अथवा तिलक लगाने जैसे किसी भी धार्मिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध नहीं हैं ।

हमारी कालबाह्य आवृत्ति ‘आज हम कौन हैं ?’, इसका प्रतिनिधित्व नहीं करती । (इस पर भी यदि विश्वास करना हो तो ‘लेंसकार्ट’ पहले इसप्रकार से हिन्दू कर्मचारियों के साथ भेदभाव करता था, यह स्पष्ट होता है । किसी चोर ने यदि ‘मैंने पहले इतनी चोरियां की है, परंतु अब मैं चोरी नहीं करता’, ऐसा कहा, तो क्या पुलिस उसे छोडेगी ? अतः अब पुलिस पीयूष बंसल पर धार्मिक भेदभाव करने के कारण भारतीय संविधान की धारा १४ से १६ का उल्लंघन करने के प्रकरण में उन्हें बंदी बनाने की कार्यवजी क्यों न करे ? – संपादक)लेंसकार्ट 

हिन्दुओ, ‘लेंसकार्ट’ को सीधे रास्ते पर लाने के लिए यह कीजिए ।

१. निकट के ‘लेंसकार्ट’ स्टोर (शाखा में) जाकर उनके द्वारा कर्मचारियों के साथ किए गए धार्मिक भेदभाव का स्पष्ट शब्दों में लोकतांत्रिक पद्धति से विरोध व्यक्त करें ।

२. प्रतिष्ठान इन हिन्दूविरोधी नियमों को वापस ले, इसके लिए लोकतांत्रिक पद्धति से वहां के अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर दबाव बनाएं।

३. अगले ८ दिनों में इन नियमों में परिवर्तन लाने का आवाहन करें ।

४. हिन्दू यह आवाहन करें, ‘लेंसकार्ट’ के हिन्दू कर्मचारी कुमकुम- बिंदी एवं तिलक लगाकर ही काम पर जाएं । (‘लेन्सकार्ट’च्या हिंदु कर्मचार्‍यांनी कुंकू, टिकली, टिळा लावूनच कामावर जावे. महिनाभर हे) एक माह तक यह ‘वर्क कल्चर’ चलाएं तथा स्वयं धर्माभिमानी हिन्दू हैं, यह दिखा दें ।’, अन्यथा इस प्रतिष्ठान को बहिष्कार करने की चेतावनी दें ।

 

संपादकीय भूमिका

  • हिन्दुओं को अब बहुसंख्यक हिन्दुओं के भारत में उनके पैसों पर ही बने हुए ऐसे प्रतिष्ठानों का बहिष्कार कर हथियार उठाकर पाठ पढाना चाहिए ।
  • अतिसहिष्णु अथवा धर्मशिक्षाविहिन हिन्दुओं को ऐसी बातों का कोई भी पूरा ज्ञान न होने से ऐसे प्रतिष्ठान ‘कॉर्पोरेट वर्किंग कल्चर’के नाम पर इस प्रकार से स्वयं हिन्दूद्वेष प्रकट करते हैं। हिन्दुओं की कर्तव्यहीनता ही इसका कारण है, ऐसा कहना पडेगा ।
  • व्यवसायिकता दिखाने की होड में ‘लेंसकार्ट’ हिजाब पहनने पर प्रतिबंध नहीं लगाता, इसे जान लें । यह उसका धार्मिक दोगलापन है अथवा व्यवसायिकता का ढोंग ?