Katni Railway Rescue : मध्यप्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर १६७ अल्पवयस्क मुसलमान बालकों की मुक्ति !

  • बाल तस्करी का संशय, ८ व्यक्ति बंदी

  • लातूर स्थित मदरसे में शिक्षा हेतु ले जाए जाने का सद्दाम नामक व्यक्ति का दावा

पुणे – बिहार की राजधानी पाटलीपुत्र से पुणे की ओर जाने वाले १६७ अल्पवयस्क मुसलमान बालकों को ११ अप्रैल की रात्रि मध्यप्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर रेलवे पुलिस ने मुक्त कराया । यह कार्यवाही पटना-पूर्णा एक्सप्रेस में की गई है तथा इस प्रकरण में ८ व्यक्तियों को बंदी बनाया गया है । रेलवे सुरक्षा बल एवं रेलवे पुलिस की सहायता से इन बालकों को रेलगाडी से मुक्त किया गया । जांच के समय यह बात स्पष्ट हुई कि, ये सभी बालक बिहार के अररिया से महाराष्ट्र के लातूर में एक मदरसे में शिक्षा ग्रहण करने हेतु यात्रा कर रहे थे । बाल तस्करी के संभावित प्रयास को रोकने के विषय में गुप्त सूचना के आधार पर बाल कल्याण समिति के दल ने यह कार्रवाई की ।

अररिया से लातूर के मदरसे में इन बालकों को ले जाने वाले सद्दाम नामक व्यक्ति ने बताया कि, विगत १० वर्षों से वह बालकों को लातूर के मदरसे में शिक्षा हेतु ले जा रहा है । उसने आगे कहा कि, इस बार भी वह अनुमानतः १०० बालकों को उनके अभिभावकों की पूर्ण सहमति से ही ले जा रहा था ।

इस प्रकरण पर बात करते हुए बाल संरक्षण अधिकारी मनीष तिवारी ने बताया कि, रेलगाडी से १०० से अधिक बालकों की संभावित तस्करी किए जाने की गुप्त सूचना उन्हें प्राप्त हुई थी । इस सूचना के आधार पर इन बालकों को मुक्त कराया गया । उनकी पूछताछ प्रारंभ कर दी गई है ।

पूछताछ के समय बालकों ने बताया कि, वे लातूर के एक मदरसे में शिक्षा प्राप्त करने हेतु यात्रा कर रहे थे । वर्तमान में इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इस अभियोग के प्रत्येक पक्ष की गहन जांच प्रारंभ की गई है ।

संपादकीय भूमिका 

  • मदरसों के नाम पर चलने वाली ऐसी संदेहास्पद गतिविधियों की ओर सरकार तथा प्रशासन को गंभीरता से देखना चाहिए । मूलतः आतंकवादी निर्माण के केंद्र बने मदरसों पर ही देशभर में प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए ।
  • महाराष्ट्र का मराठवाडा क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील होते हुए भी, वहां बाहर से इस प्रकार मुसलमान बालकों को लाना, क्या सुरक्षा की दृष्टि से घातक नहीं है ? मूलतः बिहार का अररिया क्षेत्र मुसलमान बहुल है । वहां अत्यधिक संख्या में मदरसे होते हुए भी वहां से बालकों को महाराष्ट्र क्यों लाया जा रहा था ? ऐसे विषयों की जांच होनी चाहिए । इसके लिए अब राष्ट्रप्रेमी हिन्दुओं को सरकार पर दबाव बनाना चाहिए ।