वीर सावरकर के विषय में अपमानजनक वक्तव्य देने का प्रकरण ।

पुणे- सरकार ने वीर सावरकर को वीर’ उपाधि नहीं दी है । एक लेखक सदाशिव रानडे ने अपने जीवनचरित्र ग्रंथ में सावरकर के लिए पहली बार ‘वीर’ उपाधि का प्रयोग किया था । लेखक रानडे ने यह उपाधि स्वयं की कल्पना से तथा वीर सावरकर के प्रति के सम्मान के कारण दी थी । आगे जाकर यह उपाधि जनता में लोकप्रिय हुई होगी । इसके लिए किसी प्रकार की सरकारी अथवा संस्थात्मक सहमति थी अथवा नहीं, यह मुझे ज्ञात नहीं है, ऐसा वक्तव्य वीर सावरकर के पौत्र सावरकर ने न्यायालय में दिया । पुणे के विशेष न्यायालय में राहुल गांधी के विरुद्ध प्रविष्ट मानहानि अभियोग की सुनवाई हुई । प्रतिपरीक्षण में राहुल गांधी की ओर से अधिवक्ता मिलिंद पवार द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में सात्यकी सावरकर ने यह स्पष्टीकरण दिया । सात्यकी सावरकर का प्रतिपरीक्षण १३ अप्रैल को आगे तक चलेगा ।
१. सात्यकी सावरकर ने उनकी शिकायत में प्रमाण के रूप में अनेक समाचारपत्रीय ब्योरे तथा राहलु गांधी द्वारा लंदन में दिए गए भाषण के वीडियो का एक यू ट्यूब लिंक प्रस्तुत किया है ।
२. उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि राहुल गांधी ने वीर सावरकर पर यह झूठा आरोप लगाया कि उन्होंने एक मुसलमान व्यक्ति को पीटे जाने का वर्णन करनेवाली पुस्तक लिखी है, परंतु वास्तव में वीर सावरकर ने कभी भी ऐसी पुस्तक नहीं लिखी है तथा कभी ऐसी घटना भी नहीं हुई है ।
३. राहुल गांधी ने वीर सावरकर के प्रति अपयश फैलाने तथा उनकी प्रतिमा धूमिल करने के उद्देश्य से यह झूठा, विद्वेषपूर्ण एवं आधारहीन आरोप लगाया था ।
४. राहुल गांधी ने लंदन में अप्रवासी भारतीयों के सामने दिए गए भाषण में वीर सावरकर के विषय में विवादित वक्तव्य दिया था ।
५. उसके विरोध में वीर सावरकर के पौत्र सात्यकी सावरकर ने न्यायालय में राहुल गांधी के विरुद्ध मानहानि का अभियोग प्रविष्ट किया है तथा उन्होंने न्यायालय से इस मानहानि के लिए राहुल गांधी को अधिकतम दंड तथा कारावास तथा हानिभरपाई देने की मांग की है ।
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