पूजा करने एवं धार्मिक सामग्री उपलब्ध कराने की ऋषिकेश वैद्यगुरुजी की मांग पुणे न्यायालय ने अस्वीकार की !

ईसाई महिला द्वारा लगाए गए आरोपों का प्रकरण

मुंबई – एक ईसाई महिला द्वारा अत्याचार के कथित आरोप लगाए जाने के पश्चात बंदी बनाए गए ऋषिकेश वैद्यगुरुजी को ३० मार्च को पिंपरी में बंदी बनाया गया । उन्होंने कारागृह में पूजा सामग्री एवं धार्मिक साहित्य उपलब्ध कराने हेतु जो मांग की थी, उसे न्यायालय ने १ अप्रैल को अस्वीकार कर दिया ।

ऋषिकेश वैद्यगुरुजी को बंदी बनाए जाने के पश्चात उनके भाई वेदमूर्ति धनंजय वैद्य ने अधिवक्ताओं के साथ पत्रकार वार्ता आयोजित कर कहा कि, “ऋषिकेश वैद्यगुरुजी पर लगाए गए आरोप पूर्णतः मिथ्या हैं । न्यायालय में हम अपना पक्ष रखेंगे” । ऋषिकेश वैद्यगुरुजी के फेसबुक खाते पर भी यह लिखा गया था कि, “उनके ऊपर लगाए गए आरोप असत्य हैं तथा सत्य शीघ्र ही सबके सामने आएगा” ।

वैद्यगुरुजी को ९ दिनों की पुलिस अभिरक्षा (कोठरी) में भेजा गया है । इससे पूर्व पुणे के लश्कर न्यायालय में हुई सुनवाई में दोनों पक्षों के बीच तीव्र तर्क-वितर्क हुआ ।

वैद्यगुरुजी के अधिवक्ताओं ने समस्त आरोपों को अस्वीकार करते हुए इस अपराध को निराधार बताया । अधिवक्ताओं ने मांग की कि, “यौन उत्पीडन नहीं हुआ है । यद्यपि लॉज में जाने का दावा किया जा रहा है, तथापि सीसीटीवी (CCTV) की जांच कर सत्य को प्रकाश में लाया जाना चाहिए” । अधिवक्ताओं ने इस समय यह भी कहा कि अभियुक्त धार्मिक प्रवचनकर्ता है तथा उसकी पृष्ठभूमि निष्कलंक है ।

वेदमूर्ति धनंजय वैद्य ने दावा किया है कि वैद्यगुरुजी की तुलना पाखंडी खरात प्रकरण से करना अनुचित है एवं शीघ्र ही साक्ष्यों के साथ सत्य उजागर होगा । अधिवक्ताओं ने न्यायालय में यह भी सूचित किया कि संबंधित महिला से फेसबुक के माध्यम से परिचय हुआ था तथा उस महिला ने स्वयं संपर्क किया था, साथ ही संबंधित महिला ने ही अभियुक्त को उत्तेजित करने का प्रयास किया था ।