भारतीय मुसलमानों द्वारा किए गए सहयोग के लिए व्यक्त की कृतज्ञता

नई दिल्ली – ईरान ने इजरायल पर दागी गई मिसाइलों पर ‘धन्यवाद, भारत की जनता’ ऐसा संदेश लिखा था । इसी प्रकार स्पेन, पाकिस्तान एवं जर्मनी के लिए भी संदेश लिखे गए थे । “जिन देशों ने ईरान का समर्थन किया है, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना ही इस कार्रवाई का उद्देश्य है । भारतीय बच्चों द्वारा किया गया आर्थिक सहयोग हम कभी नहीं भूलेंगे । यह एक स्नेहपूर्ण भेंट है,” ऐसा ईरान ने स्पष्ट किया ।
मुख्य घटनाक्रम
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🚨 Global tensions escalating fast 🌍🔥
🇮🇷 Iran’s latest strikes on Israel reportedly carried messages like “Thank you people of India” on missiles, acknowledging perceived support & solidarity
💥 War fallout intensifies:
▪️ 300+ US soldiers reportedly injured
▪️ 🇷🇺 Russia… pic.twitter.com/LTVmcNUMso— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) March 28, 2026
जो हमारी सहायता नहीं करते, उनके लिए अब अमेरिका ‘नाटो’ की रक्षा के लिए बाध्य नहीं ! – ट्रंप का गुस्सा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘नाटो’ (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन – २९ देशों का सैन्य गठबंधन) की युद्ध संबंधी भूमिका पर अप्रसन्नता व्यक्त की । “यदि आप हमारे लिए खडे नहीं होंगे, तो हम आपकी रक्षा के लिए क्यों खडे रहें ? अब ‘नाटो’ को अमेरिका की आवश्यकता नहीं है,” ऐसे शब्दों में ट्रंप ने अप्रसन्नता व्यक्त की ।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह ‘ब्रेकिंग न्यूज’ हो सकती है, परंतु यह सच है । अमेरिका अब नाटो की रक्षा के लिए बाध्य नहीं है । हमें उनसे कुछ भी नहीं चाहिए ।
पिछले सप्ताह ट्रंप ने नाटो सदस्य देशों को ‘कायर’ कहा था । उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के सैन्य समर्थन के बिना नाटो केवल एक ‘कागजी शेर’ है । नाटो देशों के नेताओं का कहना है कि ईरान पर आक्रमण करने से पहले ट्रंप ने किसी भी सहयोगी देश से चर्चा नहीं की थी । इसी कारण यूरोपीय संघ एवं अन्य पश्चिमी देश इस युद्ध में सम्मिलित होने से बच रहे हैं ।
अमेरिका ईरान युद्ध से बाहर निकलने के प्रयास में : जेडी वेंस एवं नेतन्याहू के बीच विवाद

ईरान के साथ युद्ध को लेकर अमेरिका एवं इजरायल के मध्य मतभेद के समाचार सामने आ रहे हैं । एक निजी फोन बातचीत से दोनों देशों के बीच छिपे मतभेद उजागर हुए हैं । जानकारी के अनुसार, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस एवं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई चर्चा में तीखी बहस हुई । एक रिपोर्ट के अनुसार, वेंस ने युद्ध से पहले नेतन्याहू द्वारा किए गए दावों पर प्रश्न उठाए । विशेष रूप से “ईरान में सत्ता परिवर्तन आसानी से संभव होगा एवं आंतरिक विद्रोह भडक सकता है” – इस दावे पर उन्होंने आपत्ति जताई ।
वास्तविक स्थिति इसके विपरीत रही । ईरान अपेक्षा से अधिक शक्तिशाली प्रमाणित हुआ तथा अमेरिका को भारी क्षति उठानी पड रही है । वेंस ने स्पष्ट कहा कि नेतन्याहू के कई अनुमान अत्यधिक आशावादी थे । विशेष रूप से यह उम्मीद कि युद्ध के कारण ईरान की जनता सरकार के विरुद्ध खडी होगी, पूरी तरह असत्य प्रमाणित हुआ ।
युद्ध को लेकर नेतन्याहू एवं मोसाद के बीच दूरी

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एवं इजरायल की गुप्तचर एजेंसी ‘मोसाद’ के मध्य मतभेद बढने के समाचार है । मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया ने पिछले सप्ताह नेतन्याहू के साथ किसी संयुक्त बैठक में भाग नहीं लिया । नेतन्याहू ने मोसाद पर आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमता तथा उसकी राजनीतिक-सामाजिक स्थिति के बारे में अनुचित जानकारी दी, जिससे इजरायल को भ्रमित किया गया । इसके कारण देश एक ऐसे संघर्ष में फंस गया है जिसका परिणाम अनिश्चित है ।
मोसाद की प्रतिक्रिया
मोसाद का कहना है कि उन्होंने नेतन्याहू को सही एवं सटीक जानकारी दी थी; लेकिन नेतन्याहू की जोखिम लेने की प्रवृत्ति के कारण यह संघर्ष आरंभ हुआ । यदि यह युद्ध असफल होता है, तो इसका दायित्व मोसाद का नहीं, अपितु सीधे नेतन्याहू का होगा । दोनों पक्ष एक-दूसरे पर यह भी आरोप लगा रहे हैं कि उनकी एजेंसियों में ईरानी गुप्तचरी सक्रिय हैं, जो सैन्य गोपनीय जानकारी बाहर पहुंचा रहे हैं ।
अब अगला नंबर क्यूबा का ! – ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी सेना को बहुत शक्तिशाली बनाया है । “मुझे कभी नहीं लगा था कि सेना का उपयोग करना पडेगा, परंतु कभी-कभी करना पडता है । ईरान के पश्चात अब अगला नंबर क्यूबा का है । हम क्यूबा को स्वतंत्र कर सकते हैं या नियंत्रण में ले सकते हैं । हमारे पास सब कुछ करने की क्षमता है ।”
हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्यूबा के विरुद्ध उनका अगला कदम क्या होगा, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि आवश्यकता पडने पर सैन्य शक्ति का उपयोग किया जा सकता है ।
हूती आतंकवादियों ने इजरायल पर मिसाइल दागी
ईरान-इजरायल युद्ध के २८ दिन उपरांत अब यमन के ईरान समर्थित हूती आतंकवादी भी इस संघर्ष में सम्मिलित हो गए हैं । उन्होंने दक्षिण इजरायल के बेयरशेबा शहर एवं आसपास के क्षेत्रों को लक्ष्य बनाकर लगभग २००० किलोमीटर दूरी से बैलिस्टिक मिसाइल दागी । इजरायल ने इस मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया ।
रूस १ अप्रैल से पेट्रोल निर्यात पर प्रतिबंध लगाएगा
रूस सरकार ने १ अप्रैल २०२६ से पेट्रोल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है । ‘रॉयटर्स’ के अनुसार, रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है । यह प्रतिबंध ३१ जुलाई तक लागू रह सकता है । बढती कीमतों को नियंत्रित करने तथा देश में ईंधन की कमी से बचने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है ।
भारत पर क्या असर होगा ?
भारत रूस से बडी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है । यदि रूस शुद्ध पेट्रोल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाता है, तो वैश्विक बाजार में पेट्रोल की कीमतें बढ सकती हैं ।
हालांकि भारत रूस से पेट्रोल नहीं, अपितु कच्चा तेल खरीदता है । इस प्रतिबंध में कच्चा तेल सम्मिलित नहीं है, इसलिए भारत की आपूर्ति बाधित नहीं होगी तथा इसका अधिक प्रभाव भी नहीं पडेगा ।
ईरान युद्ध के कारण २० सहस्र नाविक समुद्र में फंसे
ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति गंभीर हो गई है । लगभग २० सहस्र नाविक समुद्र में फंसे हुए हैं तथा उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना कठिन हो गया है ।
युद्ध के कारण समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है और कई जहाज बीच रास्ते में ही फंस गए हैं । कुछ जहाजों पर आक्रमण के भी समाचार है, जिससे संकट और बढ गया है । फंसे हुए नाविकों को भोजन एवं आवश्यक वस्तुओं की कमी का सामना करना पड रहा है ।
भारत ने बांग्लादेश को अतिरिक्त ५ सहस्र टन डीजल दिया
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण बांग्लादेश में पेट्रोल एवं डीजल की कमी हो गई है । पहले भी भारत ने बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति की थी । अब अतिरिक्त ५ सहस्र टन डीजल दिया गया है । अब तक भारत बांग्लादेश को कुल १५ सहस्र टन डीजल की आपूर्ति कर चुका है ।
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अमेरिकी संसद में ईरान के विरुद्ध युद्ध रोकने का प्रस्ताव पारित