रामनाथस्वामी मंदिर भारत के तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम् द्वीप पर स्थित रामेश्वरम् नगर में स्थित एक शिवमंदिर है । एक संदर्भ के अनुसार, प्रभु श्रीराम ने रावण के साथ युद्ध में हुए पाप (ब्राह्मणहत्या) के प्रायश्चित हेतु इस स्थान पर भगवान शंकर की आराधना की । यह तीर्थक्षेत्र बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक तथा चार धामों में से एक माना जाता है । सनातन की एक स्त्री संत को श्री रामेश्वरम् (रामनाथस्वामी) मंदिर का छायाचित्र देखकर जो सूक्ष्म स्तर की विशेषताएं अनुभव हुईं, वह आगे दी हैं ।
– (सद्गुरु) डॉ. मुकुल गाडगीळ (११.२.२०२५)

१. सनातन की एक स्त्री संत एवं सद्गुरु डॉ. गाडगीळजी को अनुभव हुए सूक्ष्म ज्ञान संबंधी चित्र में स्पंदनों की मात्रा
सूक्ष्म ज्ञान संबंधी चित्र में अधोरेखित स्पंदनों की मात्रा भिन्न होने का कारण
सनातन के कुछ सद्गुरु, संत व साधक सूक्ष्म स्तरीय ज्ञान प्राप्त करते हैं । सूक्ष्म ज्ञान संबंधी चित्र में अधोरेखित स्पंदनों की मात्रा साधक के स्तर, काल, सूक्ष्म ज्ञान समझने की क्षमता आदि घटकों पर निर्भर होती है । साधक, संत एवं सद्गुरु, इस क्रम में व्यक्ति की सूक्ष्म ज्ञान समझने की क्षमता बढती जाती है । इसलिए साधक, संत एवं सद्गुरु को प्राप्त किसी सूक्ष्म स्पंदन के प्रतिशत में भिन्नता हो सकती है ।

१ अ. श्रीरामतत्त्व
१ अ १. श्रीरामतत्त्व का कणरूप वलय श्री रामेश्वरम् मंदिर के आसपास की भूमि पर सक्रिय होना : श्री रामेश्वरम् मंदिर के परिसर में श्रीराम ने भ्रमण किया था, इसलिए श्रीराम का तत्त्व यहां की भूमि में आकर्षित हुआ है ।
१ अ २. श्रीरामतत्त्व का कणरूप वलय मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग के सर्व ओर सक्रिय होना : भगवान शिव की आराधना करने हेतु श्रीराम ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी । इस कारण श्रीरामतत्त्व का वलय मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग के सर्व ओर सक्रिय है ।
१ आ. शिवतत्त्व
१ आ १. श्रीरामतत्त्व के कणरूप वलय का मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग के चारों ओर सक्रिय होना : श्रीराम ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी तथा उसकी भावपूर्ण पूजा-अर्चना की थी । अत: इस शिवलिंग में प्रचुर शिवतत्त्व है ।
१ आ २. शिवतत्त्व का वलय मंदिर के शिवलिंग में सक्रिय होना ।
१ आ ३. शिवतत्त्व के बारह वलय मंदिर में निर्मित होकर सक्रिय होना : श्रीराम ने भगवान शिव की भावपूर्ण आराधना की थी तथा इस मंदिर में आनेवाले साधु, संत और भक्तों में भी आध्यात्मिक भाव है । इस कारण शिवतत्त्व के बारह वलय मंदिर में निर्मित होकर सक्रिय हैं । ये शिव के विभिन्न १२ रूपों के १२ वलय हैं । इनमें से कुछ रूप तारक (उद्धार करनेवाले) हैं, तो कुछ रूप मारक (दुष्टों का नाश करनेवाले) हैं । अतः कुछ वलय सगुण स्तर के हैं और कुछ वलय निर्गुण स्तर के हैं । (सनातन की एक स्त्री संत को बारह ज्योतिर्लिंगों के विषय में कुछ भी ज्ञात न होते हुए भी सूक्ष्म परीक्षण करते समय ध्यानावस्था में ‘१२’ अंक दिखाई दिया ।’ – संकलनकर्ता)
१ इ. भाव
१ इ १. आध्यात्मिक भाव के कण मंदिर में सक्रिय होना : मंदिर में दर्शन हेतु आने वाले संतों एवं भक्तों में भाव है तथा वे शिवलिंग की भावपूर्ण पूजा-अर्चना करते हैं । इसलिए मंदिर में आध्यात्मिक भाव के कण सक्रिय हैं ।
१ ई. चैतन्य
१ ई १. चैतन्य का वलय मंदिर के सर्व ओर सक्रिय होना
१ ई २. चैतन्य का वलय मंदिर से वातावरण में प्रकाशमान स्वरूप में प्रक्षेपित होना
२. श्री रामेश्वरम् मंदिर की अनुभव हुईं अन्य विशेषताएं
अ. जब श्रीराम ने शिवलिंग की पूजा की, तब सूक्ष्म से भगवान शिव का स्वरूप उनके समक्ष प्रकट हुआ और भगवान शिव ने श्रीराम को आशीर्वाद दिया ।
आ. संतों एवं भक्तों के आध्यात्मिक भाव के कारण श्री रामेश्वरम् मंदिर क्षेत्र में अनेक बार भगवान शिव का स्वरूप सूक्ष्म से प्रकट हुआ है ।
इ. अति प्राचीन काल में कुछ संतों द्वारा गाए गए श्रीराम एवं भगवान शिव के भक्तिगीत मंदिर में लगाए जाते हैं । इसलिए मंदिर में आकाशतत्त्व है । जब ये संत भक्तिगीत गाते थे, तब उनके समक्ष देवता प्रकट होते थे और वे देवता भी भक्तिगीत गाते थे ।’
(‘एक संदर्भ के अनुसार अप्पर, सुंदरर् एवं तिरुज्ञान संबंदर दक्षिण भारत के ७वीं और ८वीं शताब्दी के तीन प्रमुख शैव संत तथा कवि थे । इन संतों के स्तोत्र ‘तेवरम्’ खंडों में संकलित हैं । उनके गीत मध्ययुगीन काल में शैव भक्ति के प्रसार के प्रमुख स्रोत हैं । तेवरम् के पहले तीन खंड संत तिरुज्ञान संबंदर ने लिखे हैं । अगले तीन खंड संत अप्पर ने लिखे हैं और सातवां खंड संत सुंदरर् ने लिखा है । संतों के गीतों में तमिलनाडु के रामेश्वरम् द्वीप पर स्थित रामनाथस्वामी मंदिर का गौरव किया गया है । कुछ संगीत विशेषज्ञों के मतानुसार तेवरम् एक दैवी संगीत है । तेवरम् शिव की स्तुति करनेवाले गीतों का संग्रह है । तमिलनाडु के शिवमंदिरों में आज भी तेवरम् स्तोत्र गाए जाते हैं ।’ ‘मंदिर में कुछ संतों द्वारा गाए गए श्रीराम और भगवान शिव के भक्तिगीत लगाए जाते हैं’, इस विषय में सनातन की एक स्त्री संत को सूक्ष्म से सटीक ज्ञान प्राप्त हुआ । इससे यह ध्यान में आता है कि ‘उनकी सूक्ष्म स्तर पर जानने की क्षमता कितनी असाधारण है ।’ – संकलनकर्ता)
– सनातन की एक स्त्री संत (१३.१०.२०२४)
| सूक्ष्म : व्यक्ति के स्थूल अर्थात प्रत्यक्ष दिखनेवाले अवयव नाक, कान, नेत्र, जीभ एवं त्वचा, ये पंचज्ञानेंद्रिय हैैं । जो स्थूल पंचज्ञानेंद्रिय, मन एवं बुद्धि के परे है, वह ‘सूक्ष्म’ है । इसके अस्तित्व का ज्ञान साधना करनेवाले को होता है । इस ‘सूक्ष्म’ ज्ञान के विषय में विविध धर्मग्रंथों में उल्लेख है । |


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