World Cup Trophy : यदि विश्वकप की ट्रॉफी मंदिर में ले जाई जा रही है, तो उसमें बुराई क्या है ? मस्जिद में इसकी अनुमति नहीं है ।

  • ‘ऑल इंडिया इमाम असोसिएशन ‘ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशिदी का वक्तव्य ।

  • विश्वकप की ट्रॉफी मंदिर में ले जाने पर पूर्व क्रिकेट खिलाडी तथा तृणमूल कांग्रेस के नेता कीर्ति आजाद ने आलोचना की थी ।

मौलाना साजिद रशिदी

नई दिल्ली – यदि कोई कहे कि ट्रॉफी को मस्जिद में भी ले जाना चाहिए, तो आप क्या करेंगे ? क्या ट्रॉफी को मस्जिद में ले जाएंगे ? मस्जिद में इस प्रकार की चीजें ले जाना उचित नहीं माना जाता । मस्जिद में ट्रॉफी ले जाने की अनुमति नहीं है । यदि ट्रॉफी मंदिर में ले जाई जा रही है, तो उसमें बुराई क्या है ? ऐसी प्रतिक्रिया ‘ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन’ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशिदी ने व्यक्त की है ।

भारतीय क्रिकेट टीम ने कर्णावती (अहमदाबाद) के मैदान में आयोजित ‘टी-२० विश्वकप क्रिकेट प्रतियोगिता’ जीतने के बाद प्राप्त ट्रॉफी को शहर के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर अहमदाबाद में ले जाकर भगवान के चरणों में अर्पित किया था । इस घटना पर भारत के पूर्व क्रिकेट खिलाडी तथा तृणमूल कांग्रेस के नेता कीर्ति आजाद ने आलोचना करते हुए कहा था कि ‘ट्रॉफी को चर्च तथा मस्जिद में भी ले जाना चाहिए । भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है ।’ इसी पर रशीदी ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की ।

संपादकीय भूमिका 

हिन्दू होकर भी केवल राजनीतिक लाभ के लिए विरोध करने वालों से हिन्दुओं को वैध मार्ग से उत्तर मांगना चाहिए ।