यदि नाटक की सभी प्रस्तुति पर अविलंब प्रतिबंध नहीं लगाया गया, तो संपूर्ण राज्य में तीव्र आंदोलन किया जाएगा ! – राष्ट्रीय वारकरी परिषद

रत्नागिरी के पालकमंत्री को वारकरी संप्रदाय एवं श्री विठ्ठल के अपमानजनक नाटक ‘ईठ्ठला’ के विरुद्ध ज्ञापन !

मुंबई – यहां उद्योग मंत्री एवं रत्नागिरी के पालकमंत्री उदय सामंत से भेंट कर उन्हें ‘ईठ्ठला’ नाटक के विरोध में राष्ट्रीय वारकरी परिषद के कार्याध्यक्ष ह.भ.प. बापू रावकर ने ज्ञापन सौंपा । “नाटक में वारकरी संप्रदाय, संत परंपरा तथा श्री विठ्ठल का अपमान किया गया है तथा भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं । इस नाटक के कारण संपूर्ण महाराष्ट्र प्रज्वलित हो उठेगा । अतः ‘ईठ्ठला’ नाटक की सभी प्रस्तुति पर अविलंब प्रतिबंध लगाया जाए”, यह मांग इस ज्ञापन द्वारा की गई है । “ज्ञापन का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई न किए जाने पर संपूर्ण राज्य में तीव्र आंदोलन किया जाएगा”, ऐसी चेतावनी भी दी गई है ।

रत्नागिरी में संपन्न ६४वीं ‘महाराष्ट्र राज्य हौशी मराठी नाट्यस्पर्धा’ में प्रदर्शित ‘ईठ्ठला’ नाटक के विरुद्ध वारकरी संप्रदाय तथा हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने तीव्र आपत्ति दर्ज कराई है ।

नाटक में इस प्रकार किया गया है अपमान !

विठ्ठलभक्त पति-पत्नी को (तुका एवं जनाई को) मात्र धन-आभूषणों के लोभ हेतु ९ व्यापारियों के साथ स्वयं के पुत्र की भी हत्या करते हुए दर्शाया गया है । यह वारकरी तत्त्वज्ञान (अहिंसा तथा भक्ति) के सर्वथा विपरीत है । पात्रों को जगद्गुरु तुकाराम महाराज, संत नामदेव एवं संत जनाई के नाम देकर उनकी छवि मलीन करने का प्रयास किया गया है । यद्यपि यह नाटक ४०० वर्ष पूर्व की सत्य घटना पर आधारित होने का दावा करता है, तथापि इसका कोई भी ठोस आधार या संदर्भ उपलब्ध नहीं है ।

ज्ञापन में की गई प्रमुख मांगें :

१. इस नाटक को दिया गया क्रमांक अथवा प्रोत्साहन पुरस्कार निरस्त किया जाए तथा इसे प्रतियोगिता से निष्कासित किया जाए ।

२. ‘भारतीय दंड संहिता’ की धारा २९५-अ एवं १५३-अ के अंतर्गत धार्मिक विद्वेष उत्पन्न करने के कारण संबंधितों पर कार्रवाई की जाए ।

३. हिन्दू धर्म, संत एवं राष्ट्रपुरुषों का अपमान न हो, इसके लिए सरकार द्वारा कठोर नियमावली घोषित की जाए ।

संपादकीय भूमिका 

  • हिन्दू ही हिन्दू धर्म के वास्तविक शत्रु हैं ! अन्य धर्मीय कभी भी अपने श्रद्धा-स्थानों का अपमान नहीं करते, यह स्मरण रखें !
  • अभिव्यक्ति-स्वतंत्रता की आड में हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का प्रयास अत्यंत संतापजनक है !
  • हिन्दू धर्म, देवता, संत एवं राष्ट्रपुरुषों के अपमान को रोकने हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार कठोर कानून कब बनाएगी ?