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तिरुवनंतपुरम (केरल) – राज्य में नये स्थापित होने वाले शासकीय विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों को भविष्य में धर्म के आधार पर नाम नहीं दिए जाएंगे, ऐसा निर्णय केरल सरकार ने लिया है । मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में संपन्न हुई मंत्रिमंडल की बैठक के पश्चात प्रसारित किए गए आधिकारिक वक्तव्य में यह सूचना दी गई है ।
शासकीय सूत्रों के अनुसार ‘शासकीय शैक्षणिक संस्थान धर्मनिरपेक्ष रहें’, साथ ही ‘संविधान के समानता एवं सर्वसमावेशकता के मूल्यों का प्रतिबिंब उनमें दृष्टिगोचर हो’, यह इस निर्णय के पीछे का उद्देश्य है । यह निर्णय केवल भविष्य में स्थापित होने वाले संस्थानों पर लागू होगा । पूर्व से विद्यमान शासकीय विद्यालयों, महाविद्यालयों अथवा विश्वविद्यालयों के नामों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पडेगा ।
न्यायमूर्ति जे.बी. कोशी आयोग के प्रतिवेदन को अनुमति !
राज्य मंत्रिमंडल ने न्यायमूर्ति जे.बी. कोशी आयोग के प्रतिवेदन (रिपोर्ट) को अनुमति प्रदान करते हुए उसे आधिकारिक रूप से प्रकाशित करने का निर्णय लिया है । केरल के ईसाई अल्पसंख्यकों की शिक्षा, आर्थिक पिछडापन एवं कल्याण से संबंधित विषयों के अध्ययन हेतु इस आयोग की नियुक्ति की गई थी । (केवल ईसाइयों के कल्याण का विचार करने वाले केरल के कथित साम्यवादी शासकों ने क्या अन्य समाजों के कल्याण का विचार कभी किया है ? – संपादक)
संपादकीय भूमिकाईसाई कॉन्वेंट विद्यालयों के माध्यम से हिन्दू बालकों का प्रत्यक्ष अथवा वैचारिक धर्मांतरण किया जाता है । ऐसी अनेक घटनाऐं सभी के ध्यान में आती रही हैं । अतः यदि धर्मनिरपेक्षता के प्रति वास्तव में लगन है, तो ऐसी कॉन्वेंट शालाओं पर साम्यवादी सरकार कार्रवाई क्यों नहीं करती ? |
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ होगा!
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Ramdas Athawale : (और इनकी सुनिए…) ‘अवैध मद्यभट्टियों को अधिकृत करने पर सरकार को राजस्व प्राप्त होगा !’