प.पू .सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत के ‘घर वापसी’ वाले वक्तव्य पर मौलाना अरशद मदनी ने गुस्सा दिखाया है !
(‘घर वापसी’ का अर्थ है हिन्दू धर्म में वापस आना)

नई दिल्ली – ‘जमीयत उलेमा-ए-हिन्द’ के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत के ‘घर वापसी’ वाले वक्तव्य की कठोर आलोचना की है । उन्होंने आरोप लगाया है कि देश में इस समय नफरत का वातावरण बनाया जा रहा है तथा हिंसा को हवा दी जा रही है । ‘भारत में रहने वाले मुसलमान भी हिन्दू हैं । उनकी भी ‘घर वापसी’ होनी चाहिए,’ डॉ. मोहनजी भागवत ने हाल ही में यह वक्तव्य दिया था । (प.पू. सरसंघचालक ने सत्य इतिहास प्रस्तुत किया है ; लेकिन बतगे अधिक कडवे हैं । इसलिए, उन्हें ऐसे विचार पचते नहीं हैं, यह स्पष्ट है ! – संपादक)
१. मौलाना अरशद मदनी ने १८ फरवरी को सामाजिक माध्यम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिछले ७० वर्षों में २० करोड मुसलमानों की ‘घर वापसी’ का विचार प्रस्तुत करने का साहस किसी में नहीं था, वह आज प्रस्तुत किया जा रहा है । देश को विनाश, अस्थिरता एवं आपसी दुश्मनी की ओर ले जाने वाला कोई भी आह्वान देशभक्ति का आह्वान नहीं हो सकता । (देश का इतिहास दोहराना (पुराना गौरव वापस लाना) ही देशभक्ति है ! – संपादक)
२. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में गाय के नाम पर निरपराध लोगों की हत्या हो रही है तथा सरकार चुप है । (इसे कहते हैं – उल्टा चोर कोतवाल को डांटे ! गोहत्या पर रोक का कानून लागू है, लेकिन कट्टर मुसलमान गोहत्या कर रहे हैं । जो इसे रोकने का प्रयास करते हैं, उन पर आक्रमण किया जा रहा है । क्या यह संविधान का उल्लंघन नहीं है ? – संपादक)
३. धर्म के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा मंजूर नहीं है । सभी धर्म इंसानियत, सहनशीलता, प्यार एवं एकता का संदेश देते हैं । (क्या यह मजाकिया नहीं है कि अन्य को इंसानियत, सहनशीलता एवं प्यार सिखाया जाए, जबकि हिन्दुओं को ‘काफिर’ कहकर मारे जाने का इतिहास रहा है ? – संपादक) मदनी ने कहा कि जो लोग धर्म का उपयोग नफरत एवं हिंसा फैलाने के लिए करते हैं, वे अपने धर्म के सच्चे मानने वाले नहीं हो सकते
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