Pakistan Turkey Islamic Agenda : पाकिस्तान एवं तुर्किये संयुक्त रूप से भारत के विरुद्ध अप्रत्यक्ष युद्ध चला रहे हैं !

नई दिल्ली – एक प्रमुख वेबसाइट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विश्व के सामने पाकिस्तान ‘एक असफल राष्ट्र’ तथा तुर्किये ‘इस्लामी कट्टरता के नए केंद्र’ के रूप में उभर रहे हैं । रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दोनों देशों ने मिलकर भारत के विरुद्ध संकटकारी ‘ग्रे जोन वॉर’ छेड रखा है । आरोप है कि पाकिस्तान चीन एवं कुछ खाडी देशों के हाथों की कठपुतली बन गया है तथा भारत को निर्बल (कमजोर) करने के लिए उसे जहरीली नोकवाले खंजर की तरह उपयोग किया जा रहा है ।

१.  रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बांग्लादेश में कुछ दिन पूर्व हुई अस्थिरता में पाकिस्तान की भूमिका उजागर हुई है । वर्ष २०१४ में बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलन को पाकिस्तान ने अप्रत्यक्ष समर्थन दिया था । इस आंदोलन के कारण देश दो वर्षों तक अराजकता एवं हिंसा की स्थिति में फंसा रहा ।

२. रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाने के उपरांत पाकिस्तान ने पूर्वी पाकिस्तान, अर्थात वर्तमान बांग्लादेश, में भारत-विरोधी भावनाएं भडकाकर भारत को दो मोर्चों पर घेरने का प्रयास किया । १२ फरवरी को हुए आम चुनावों के पश्चात बांग्लादेश में लोकतंत्र फिर से स्थिर होता दिखाई दे रहा है, परंतु वहां अराजकता फैलाने की पाकिस्तान का षड्‌यंत्र अब भी जारी होने का दावा किया गया है ।

तुर्किये का ‘स्कॉलरशिप जिहाद’ !

रिपोर्ट में तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगान की नीतियों की आलोचना की गई है । इसमें कहा गया है कि २१ वीं सदी में तुर्किये कट्टरता का इंजन बन गया है । आरोप है कि तुर्किये भारतीय मुस्लिम विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देता है, परंतु उसका उद्देश्य शिक्षा नहीं, अपितु उनमें कट्टरपंथी विचारधारा भरना है । रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के २० करोड मुसलमानों पर प्रभाव डालने का प्रयास किया जा रहा है ।

भारत को ‘कुर्द कार्ड’ खेलना चाहिए

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को तुर्किये के विरुद्ध ‘जैसे को तैसा’ की नीति अपनानी चाहिए । यदि तुर्किये भारतीय विद्यार्थियों को प्रभावित कर रहा है, तो भारत को कुर्द विद्यार्थियों का स्वागत करना चाहिए । उन्हें अपनी पहचान एवं राजनीतिक अधिकारों के लिए कौशल विकसित करने का अवसर देना चाहिए, ताकि तुर्किये की कथित तानाशाही को चुनौती दी जा सके ।

चीन एवं खाडी देशों का प्रभाव

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान अब एक संप्रभु राष्ट्र नहीं रह गया है, अपितु अन्य देशों के हाथों की कठपुतली बन चुका है । चरमराई हुई अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए पाकिस्तान, कतर, तुर्किये एवं सऊदी अरब से सहायता मांगता है । इसके बदले ये देश एवं चीन भारत को निर्बल करने के लिए पाकिस्तान का उपयोग करते हैं । रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मोहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों के लिए अलग राष्ट्र के रूप में पाकिस्तान की स्थापना की थी; किंतु आज वह देश घृणा, आक्रामकता तथा असहिष्णुता का प्रतीक बन गया है ।

संपादकीय भूमिका 

पाकिस्तान एवं तुर्किये द्वारा भारत-विरोधी गतिविधियां विश्व को ज्ञात हैं । ऐसे में भारत इन दोनों के विरुद्ध क्या कार्रवाई करेगा, यह प्रश्न उठता है !