जळगांव (महाराष्ट्र) की हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभा में सहस्रों हिन्दुओ ने किया हिन्दू राष्ट्र-स्थापना का उद्घोष !

(बाएं से) सद्गुरु स्वाती खाडयेजी, सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी, महामंडलेश्वर जनार्दनगिरि महाराजजी, लेफ्टनंट कर्नल मनोज सिंहा (सेवानिवृत्त), अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर एवं श्री. प्रशांत जुवेकर

जळगांव (महाराष्ट्र) – मस्तक पर तिलक लगाकर, हाथ में भगवा लेकर तथा मुख से ‘जय श्रीराम’ का घोष करते हुए यहां संपन्न हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभा में सहस्रों हिन्दुओं ने हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का उद्घोष किया । मान्यवर वक्ताओं ने हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए उपस्थित धर्मप्रेमियों को छत्रपति शिवाजी महाराजजी के मावळे (सैनिक) बनने का आवाहन किया तथा उपस्थित धर्मप्रेमी हिन्दुओं ने इस धर्मकार्य में योगदान देने की प्रतिज्ञा लेते हुए उसका प्रत्युत्तर दिया । संतों की वंदनीय उपस्थिति में तथा विभिन्न संगठनों के धर्मप्रेमी हिन्दुओं, हिन्दुत्वनिष्ठ जनप्रतिनिधियों तथा समस्त हिन्दू धर्मप्रेमियों के सहभाग से यहां के मानराज पार्क स्थित श्रीराम मंदिर संस्थान के प्रांगण पर १ फरवरी को हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभा संपन्न हुई । हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित इस सभा में सहस्रों हिन्दुओं ने पद, राजनीतिक दल, संगठन आदि भेद भूलकर हिन्दुत्व की सिंहगर्जना की ।

व्यासपीठ पर मान्यवर वक्ताओं के रूप में महामंडलेश्वर जनार्दनगिरि महाराजजी, सनातन के धर्मप्रचारक सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी एवं सद्गुरु स्वाती खाडयेजी की वंदनीय उपस्थिति, साथ ही लेफ्टनेंट कर्नल मनोज सिन्हा (सेवानिवृत्त), हिन्दू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर एवं हिन्दू जनजागृति समिति के उत्तर महाराष्ट्र समन्वयक श्री. प्रशांत जुवेकर उपस्थित थे ।

मान्यवरों के करकमलों से दीपप्रज्वलन कर सभा का आरंभ हुआ । एवं मान्यवरों ने छत्रपति शिवाजी महाराज की अर्ध प्रतिमा को पुष्पमाला अर्पित की । वेदमूर्ति सर्वश्री श्रीराम जोशी, महेंद्र जोशी एवं पराग जोशी, इन ब्रह्मवृंदों ने वेदमंत्र का पाठ किया । इसके उपरांत वेदमूर्तियों एवं वक्ताओं को सम्मानित किया गया । इस सभा का सूत्रसंचालन श्री. सतीश कोचरेकर ने किया ।

‘हिन्दू राष्ट्र’ ही भारत का मूल सारगर्भ ! – सद्गुरु स्वाती खाडयेजी, सनातन संस्था

सद्गुरु स्वाती खाडयेजी

हिन्दू राष्ट्र की संकल्पना कोई नई नहीं है, अपितु वह भारत का मूल सारगर्भ है । त्रेतायुग का रामराज्य, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा स्थापित धर्मराज्य, कृष्णदेवराय द्वारा स्थापित विजयनगर का साम्राज्य एवं छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिन्दवी स्वराज्य, ये सभी सनातन राष्ट्र के रूप हैं । उस समय लिखित संविधान नहीं था, अपितु धर्म के नियम ही संविधान था । वर्तमान समय संक्रमण का समय है; उसके कारण रामराज्य का हो रहा प्रातःकाल कोई रोक नहीं सकता । रामराज्य की स्थापना से वानरसेना ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, उसके अनुसार स्वयं के कौशल के साथ हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु तन-मन-धन समर्पित करना काल के अनुसार साधना है ।

हिन्दुओं को दबाव की नीति अपनाना आवश्यक ! – प्रशांत जुवेकर, हिन्दू जनजागृति समिति

हिन्दुओं की श्रद्धाओं को यदि पैरोंतले कुचला जा रहा हो, हिन्दूहित के कानून बनाने के लिए विलंब लग रहा हो तथा हिन्दुओं पर हो रहे आघात रोकने के लिए शासन-प्रशासन विलंब कर रहा हो; तो इसे रोकने हेतु हिन्दुओं को दबाव की नीति अपनाना आवश्यक है । हिन्दू समाज इस भ्रम में न रहे कि ‘अन्य कोई आकर हमारे आंसू पोछेगा’, हीं रहना चाहिए । हिन्दुओं के केवल जागृत एवं संगठित होने से नहीं चलेगा, अपितु सभी प्रकार के जिहादों का निर्मूलन करने हेतु सक्षम एवं क्रियाशील होना आवश्यक है ।

(१ फरवरी, २०२६)