साधको, जिज्ञासुओं के ‘हमारे’ बन जाने पर नहीं, अपितु वे ‘हमारे’ बनें; इसके लिए तत्परता से उन्हें पाठक बनाएं !

‘जिज्ञासुओं को साधना की ओर मोडने का तथा धर्मप्रेमियों को प्रत्यक्ष कृति के लिए प्रेरित करने का सर्वाेत्तम माध्यम है नियतकालिक सनातन प्रभात ! इस नियतकालिक को नियमितरूप से पढकर पाठकों में साधना के प्रति रुचि जागृत हो रही है, साथ ही उनमें राष्ट्र एवं धर्म के प्रति प्रेम भी बढ रहा है । कुछ पाठक उत्स्फूर्तता से ऐसा बताते हैं, ‘इस अंक को पढने से हमें आगे की दिशा मिलती है तथा मार्गदर्शन मिलता है ।’

ऐसा होते हुए भी अनेक साधकों को लगता है, ‘जिज्ञासुओं से पहली बार मिलने पर ही हम उन्हें पाठक बनने का आग्रह कैसे करें ? कुछ दिन उपरांत उनके साथ निकटता बढाकर उन्हें पाठक बनने के लिए प्रेरित करेंगे ।’ इसके कारण साधक तत्परता से जिज्ञासुओं को पाठक बनाने के लिए प्रेरित नहीं करते ।

हमारी इस अनुचित विचारप्रक्रिया के कारण जिज्ञासु अनमोल सत्संग से वंचित न रह जाएं, इसके लिए सर्वत्र के साधक पहली भेंट में ही जिज्ञासुओं को पाठक बनाने का प्रयास करें ।’
(२३.१.२०२६)