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नई दिल्ली – केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में सूचित किया कि विगत १० वर्षों में उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के सेवारत न्यायाधीशों के विरुद्ध ८६३० शिकायतें प्राप्त हुई हैं । ये समस्त शिकायतें भारत के मुख्य न्यायाधीश को प्रेषित कर दी गई हैं । विगत ४ वर्षों में ऐसी शिकायतों में वृद्धि हुई है । कुल शिकायतों में से लगभग ५० प्रतिशत शिकायतें वर्ष २०२२ से २०२५ की कालावधि में प्राप्त हुई हैं ।
शिकायतों की समीक्षा हेतु निश्चित प्रक्रिया
विधि मंत्री मेघवाल ने बताया कि न्यायाधीशों के विरुद्ध प्राप्त होने वाली शिकायतों के अन्वेषण हेतु उच्चतम न्यायालय में एक सुनिश्चित प्रक्रिया विद्यमान है । उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थापित ‘आंतरिक प्रक्रिया’ के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों एवं उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों का संज्ञान लेते हैं । इसी प्रकार, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश अपने न्यायालय के न्यायाधीशों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच करते हैं । सरकार को प्राप्त होने वाली शिकायतें भी अग्रिम कार्यवाही हेतु मुख्य न्यायाधीश अथवा संबंधित मुख्य न्यायाधीश को प्रेषित की जाती हैं ।
न्यायपालिका की स्वायत्तता (Autonomy) एवं आंतरिक व्यवस्था
विधि मंत्री मेघवाल ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की स्वायत्तता संविधान में निहित है । न्यायाधीशों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों का निवारण न्यायपालिका की आंतरिक व्यवस्था द्वारा किया जाता है । लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने यह सूचना प्रदान की । उच्चतम न्यायालय ने वर्ष १९९७ में आंतरिक प्रक्रिया निर्धारित की थी । उसमें न्यायिक जीवन के मूल्यों को पुनः परिभाषित किया गया है तथा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों द्वारा पालन किए जाने वाले कुछ न्यायिक मानदंडों एवं सिद्धांतों को निश्चित किया गया है ।
केेंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली
इसके अतिरिक्त , सरकार अपनी ‘केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली’ के माध्यम से भी शिकायतें स्वीकार करती है । यह एक ऑनलाइन मंच है जहां नागरिक सेवा वितरण से संबंधित किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण के विरुद्ध अपनी शिकायत पंजीकृत कर सकते हैं । यह पोर्टल केंद्र एवं राज्य सरकार के सभी मंत्रालयों तथा विभागों से संबद्ध है ।
संपादकीय भूमिकान्यायाधीशों के विरुद्ध इतनी बडी संख्या में शिकायतें प्राप्त होना, जनमानस के लिए अत्यंत विस्मयकारी है ! |
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