‘तिरुमला तिरुपति देवस्थानम्’ द्वारा हिन्दू बच्चों को धर्मशिक्षा दी जाए ! – Global Hindu Heritage Foundation

‘ग्लोबल हिन्दू हेरिटेज फाउंडेशन’ की आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से मांग

‘ग्लोबल हिन्दू हेरिटेज फाउंडेशन’ के अध्यक्ष प्रो. प्रकाशराव वी. वेलगापुडी

तिरुपति (आंध्र प्रदेश) – ‘ग्लोबल हिन्दू हेरिटेज फाउंडेशन’ ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से एक ज्ञापन के द्वारा मांग की है कि भारत में तथा विदेशों में सनातन धर्म के संरक्षण एवं प्रसार के लिए तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् (‘टी.टी.डी.’) द्वारा हिन्दू बच्चों के लिए स्वतंत्र धर्मशिक्षा कक्षाएं आरंभ की जाएं ।

‘ग्लोबल हिन्दू हेरिटेज फाउंडेशन’ के अध्यक्ष प्रो. प्रकाशराव वी. वेलगापुडी द्वारा हस्तांतरित इस ज्ञापन की प्रति उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण तथा ‘टी.टी.डी.’ के कार्यकारी अधिकारी डॉ. अनिल सिंगल को भी भेजी गई है । इस ज्ञापन में एनी बेसेंट के विचारों का उल्लेख किया गया है । उन्होंने कहा था,

विश्व के प्रमुख धर्मों का ४० वर्षों तक अध्ययन करने के उपरांत मुझे हिन्दू धर्म की श्रेष्ठता का बोध हुआ । हिन्दू धर्म के बिना भारत का अस्तित्व एवं भविष्य संभव नहीं है । भारत की जडें सनातन धर्म में गहराई तक जुडी हुई हैं तथा अपने धर्म एवं संस्कृति की रक्षा करने का दायित्व स्वयं हिन्दू समाज पर ही है । यदि हिन्दू स्वयं अपने धर्म की रक्षा नहीं करेंगे, तो उसे संरक्षित करनेवाला कोई शेष नहीं रह जाएगा ।

इस ज्ञापन में आगे कहा गया है कि

१. ‘टी.टी.डी.’ के हिन्दू धर्मप्रचार परिषद के माध्यम से हिन्दू बच्चों को शास्त्र, धर्म, नीति, संस्कृति तथा परंपराओं की शिक्षा देना आवश्यक है । बच्चों को ५ वर्ष की आयु से ही धर्मशिक्षा दी जानी चाहिए । ‘टी.टी.डी.’ के अंतर्गत आनेवाले श्री वेंकटेश्वर के सभी मंदिरों तथा शैक्षिक संस्थानों में हिन्दू धर्म का पाठ्यक्रम आरंभ किया जाए ।

२. इन कक्षाओं में ओंकार जप, गणपति प्रार्थना, गुरुस्तुति, सूर्यनमस्कार, नैतिक कथाएं, राष्ट्रपुरुषों की जानकारी, हिन्दू धर्म की वैज्ञानिकता, मंदिरों एवं परंपराओं का महत्त्व, रामायण, महाभारत एवं पुराण कथाएं, भागवद्गीता के श्लोक, भजन, योग एवं ध्यान, समाजसेवा के मूल्य तथा शांति मंत्र सम्मिलित किए जाएं ।

(३१.१.२०२६)

संपादकीय भूमिका 

  • क्या कभी किसी मुस्लिम संगठन को मस्जिदों या मदरसों से ऐसी मांग करनी पडती है ?
  • वास्तव में बडे मंदिरों से अपेक्षित है कि वे हिन्दुओं को धर्मशिक्षा दें; परंतु आज मंदिर सरकारी नियंत्रण में होने के कारण तथा सरकार के सर्वधर्मसमभाव सिद्धांत के कारण, हिन्दू भक्तों द्वारा अर्पित धन को हिन्दुओं की धर्मशिक्षा के लिए उपयोग करने की अपेक्षा सामाजिक, शैक्षिक आदि गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता है । ईश्वरीय संपत्ति की ऐसी हानि हिन्दू कब रोकेंगे ?