रा.स्व.संघ से संलग्न होने से साम्यवादियों ने जिनके पैर काट दिए, उस सांसद सदानंदन् मास्टर ने संसद में दिया वक्तव्य !

नई देहली – राष्ट्रपति द्वारा नामनिर्देशित केरल के सांसद सी. सदानंदन् मास्टर ने राज्यसभा में उन पर किए गए अत्याचारों की कहानी रखी । राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चल रही चर्चा के समय उन्होंने उनके दोनों कृत्रिम पैर पटल पर रखे तथा उसके उपरांत उन्होंने कहा कि आज से ३१ वर्ष पूर्व अर्थात वर्ष १९९४ में केरल के मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल के कार्यकर्ताओं ने मुझ पर अमानवीय अत्याचार किए थे; उसके कारण ऐसे राजनीतिक दलों की निष्ठा लोकतांत्रिक सिद्धांतों के साथ नहीं है, अपितु राजनीतिक हिंसा के साथ है । ऐसा होते हुए भी वे संसद में लोकतांत्रिक मर्यादाओं की भाषा बोलते हैं । राजनीतिक हिंसा किसी भी देश के लिए हितकारी नहीं होती । वह लोकतंत्र को दुर्बल बनाती है ।
RS | C. Sadanandan Master moves The Motion of Thanks on the President’s Address | 02 Feb, 2026(सौजन्य : Sansad TV) |
सांसद सी. सदानंद मास्टर ने आगे कहा कि,
१. वर्ष १९९४ में एक दिन बहन के विवाह के संबंध में बातचीत कर घर लौटते समय माकपा के कार्यकर्ताओं ने मुझे घेरकर मुझे अमानवीय पद्धति से पीटा ।
२. मेरी गलती बस इतनी ही थी कि मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंधित था । आक्रमणकारियों ने मुझे भूमि पर गिराकर मेरे दोनों पैर काटे तथा उसके उपरांत ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगाए ।
३. मैरे पैरों को पुनः जोडना संभव नहीं था; उसके कारण आज मुझे इन कृत्रिम पैरों का आधार लेकर चलना पड रहा है ।
संपादकीय भूमिकावास्तव में देखा जाए, तो इसप्रकार की हिंसा कर लोकतंत्र का गला घोटनेवाले साम्यवादी दलों पर प्रतिबंध ही लगाया जाना चाहिए ! |
मुंबई के जुहू समुद्र तट पर कचरे का साम्राज्य !
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी अवतारी पुरुष हैं ! – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी
Waqf Board Scam : समाजवादी पार्टी के शासनकाल में ‘वक्फ बोर्ड’ की भूमि में अरबों रुपये का घोटाला ! — मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी बरेलवी
वर्ष २०२२-२३ में मुंबई के ४ सहस्र ६३ वृक्ष कंक्रीटीकरण (काँक्रिटीकरण) से मुक्त, परंतु अभी भी वे प्रकार निरंतर जारी
काशी, मथुरा तथा संभल के मंदिर-मस्जिद विवाद में सर्वोच्च न्यायालय के मध्यस्थता प्रस्ताव को दोनों पक्षों ने ठुकराया
Ram Mandir Donation Theft : श्रीराम मंदिर दान चोरी प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय का केंद्र तथा उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस