पानसरे हत्याकांड में फंसाए गए निर्दोष Sameer Gaikwad का निधन !

समीर का निधन व्यवस्था द्वारा ली गई एक बलि है ! – सनातन संस्था

श्री. समीर गायकवाड

मुंबई (महाराष्ट्र) – सनातन संस्था के साधक समीर गायकवाड (आयु ४३ वर्ष) का २० जनवरी को दुर्भाग्यपूर्ण निधन हो गया । “ईश्वर उनकी आत्मा को सद्गति प्रदान करें, ऐसी हम प्रार्थना करते हैं,” ऐसी प्रतिक्रिया संस्था द्वारा दी गई है । समीर को वर्ष २०१५ में कॉ. गोविंद पानसरे हत्याकांड में अकारण बंदी बनाया गया था । जांच एजेंसियों का दावा था कि मोटर साइकिल पर आए दो आक्रमणकारियों में से एक समीर गायकवाड थे । इसके लिए एक स्कूली बच्चे को साक्षी (चश्मदीद गवाह) के रूप में प्रस्तुत किया गया, परंतु एक वर्ष के भीतर ही जांच एजेंसियों ने घोषित किया कि ‘वे दो हत्यारे कोई और ही थे’ । इसका अर्थ यह था कि समीर गायकवाड निर्दोष थे । उन्हें जेल में भारी कष्ट सहने पडे तथा १९ महीनों तक जेल में डाल कर रखा गया । पश्चात वे जमानत पर बाहर थे, परंतु बिना किसी अपराध के फंसाए जाने के कारण उन पर और उनके परिवार पर भारी मानसिक तनाव था । सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री चेतन राजहंस ने कहा कि मीडिया द्वारा की गई अपकीर्ति इतनी बडी थी कि उन्हें नौकरी एवं व्यवसाय में प्रत्येक स्थान पर प्रताडना झेलनी पडी । एक सामान्य किसान परिवार के इस निर्दोष साधक का जीवन जांच एजेंसियों के उत्पीडन एवं प्रगतिशील (पुरोगामी) तत्वों द्वारा की गई अपकीर्ति के कारण नष्ट हो गया ।

लोकतंत्र एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता को ताक पर रखकर समीर गायकवाड को कोल्हापुर में वकील तक नहीं मिलने दिया गया । निधन नहीं, अपितु बलि “यह प्राकृतिक मृत्यु नहीं अपितु व्यवस्था द्वारा ली गई बलि है,” ऐसा श्री राजहंस ने कहा ।

श्री चेतन राजहंस द्वारा उठाए गए प्रमुख बिंदु,…

१. बंदी बनाते समय पुलिस को पता चला था कि हत्या के दिन समीर पालघर में थे, परंतु दबाव के कारण यह तथ्य न्यायालय के सामने नहीं लाया गया ।

२.  इस प्रकरण में समीर आज भी आरोपी नंबर १ हैं, परंतु समीर को जमानत मिलने के पश्चात पुलिस ने नई ‘थियरी’ प्रस्तुत करते हुए सारंग अकोलकर और विनय पवार को हत्यारा घोषित किया ।

३. कुछ महीनों उपरांत फिर से दो नए नाम सामने लाए गए । समीर इस दोषपूर्ण जांच (सदोष अन्वेषण) के अकारण शिकार (बलि) बने । क्या आधुनिकतावादियों (प्रगतिशील गुटों) के दबाव के कारण पुलिस ने सनातन के साधकों को फंसाने का पाप किया है ?

४. गायकवाड परिवार के दुख में सनातन परिवार सहभागी है । गायकवाड परिवार से समय-समय पर जो बातचीत हुई, उससे पता चला कि इस प्रकरण में अकारण फंसाए जाने का तनाव समीर के मन पर सदा बना रहता था । उनका सार्वजनिक जीवन नष्ट हो गया था । हत्या के आरोपी के रूप में उन्हें कहीं नौकरी नहीं मिल रही थी । इन सब बातों की भरपाई कौन करेगा ? अजमल कसाब जैसे नराधम आतंकवादी को सरकारी व्यय पर वकील मिलता है; जिन्हें फांसी का दंड मिला हो, उनके लिए रात १ बजे सर्वोच्च न्यायालय के दरवाजे खोले जाते हैं; परंतु केवल एक हिन्दू, सनातन संस्था का साधक एवं निर्धन किसान का बेटा होने के कारण समीर को वकील तक नहीं मिलने दिया गया । शासन उनकी जमानत निरस्त (रद्द) करवाने के लिए उच्च न्यायालय जाता है । पुलिस किसके दबाव में आकर न्यायालय में विरोधाभासी प्रमाण प्रविष्ट करती है ?

५. आधुनिकतावादियों (प्रगतिशील गुटों) के वैचारिक आतंकवाद के कारण शासन पर दबाव आया और अंततः एक व्यक्ति की बलि चढ गई, इसका हमें दुःख है।

६. कोरेगांव भीमा प्रकरण के आरोपी स्टेन स्वामी की मृत्यु के उपरांत मुंबई उच्च न्यायालय की खंडपीठ के न्यायाधीशों ने शोक व्यक्त किया था । संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) ने भी शोक व्यक्त करते हुए प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी । क्या समीर गायकवाड के लिए कोई खडा होगा ? यह प्रश्न भी यहां उल्लेख करने योग्य है ।

समीर गायकवाड की मृत्यु से उनकी निर्दोषता सिद्ध करने का अवसर हाथ से निकल गया ! – अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, हिन्दू विधिज्ञ परिषद

अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर

मुंबई, २० जनवरी (वार्ता) : ‘भगवा आतंकवाद’ सिद्ध करने के लिए पुरोगामियों (प्रगतिशील गुटों) ने जो ‘फेक नैरेटिव’ (झूठे कथानक) की श्रृंखला रची थी, उसी के अंतर्गत कॉ. गोविंद पानसरे हत्याकांड में समीर गायकवाड को बंदी बनाया गया था । समीर गायकवाड के निधन के कारण, उन्हें इस प्रकरण में किस प्रकार फंसाया गया था, यह सिद्ध करने का अवसर अब हाथ से निकल गया है; ऐसी व्यथा इस प्रकरण में समीर के अधिवक्ता एवं हिन्दू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने व्यक्त की ।

अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने कहा कि “डॉ. नरेंद्र दाभोलकर प्रकरण में जब दो लोगों को उम्रकैद का दंड सुनाया गया तब से समीर गायकवाड बहुत टूट चुके थे । प्रतिभू (जमानत) मिलने में बहुत देरी होना, उसके बाद सरकार का जमानत के विरोध में फिर से उच्च न्यायालय जाना तथा अभियोग का देरी से आरंभ होना, इन कारणों से वे अत्यंत दुखी थे । इस पूरे कालखंड में ‘कॉ. पानसरे हत्याकांड के आरोपी’ के रूप में अपकीर्ति एवं संघर्ष उनके भाग्य में आया । इस अभियोग के कारण उन्हें कोई काम नहीं दे रहा था । आरोपी के रूप में उनका जो तिरस्कार हुआ, वह बहुत ही हृदय विदारक है ।”

व्यवस्था द्वारा किए गए मानसिक उत्पीडन की बलि !

अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने आगे बताया,

“दाभोलकर हत्याकांड में जब शरद कलस्कर तथा सचिन अंदुरे को उम्रकैद हुई, तब समीर ने मुझसे पूछा था, ‘उन्हें दंडित क्यों किया गया ?’ उस समय मैंने उनसे कहा था कि ‘उन्हें वास्तव में बरी किया जाना चाहिए था । उच्च या सर्वोच्च न्यायालय में वे निश्चित रूप से निर्दोष छूटेंगे; परंतु इसमें कितने वर्ष लगेंगे, यह कहा नहीं जा सकता । उस समय चल रहे ‘मीडिया ट्रायल’ (मीडिया द्वारा न्यायाधीश की भूमिका में रहकर की गई रिपोर्टिंग) के कारण उनका उतरा हुआ चेहरा मुझे आज भी याद है । समीर ने मुझसे पूछा था, ‘क्या कॉ. पानसरे हत्याकांड में निर्दोष होने के उपरांत भी मुझे सदंड मिलेगा ?’ इससे मुझे लगा कि यह कहीं न कहीं व्यवस्था द्वारा किए जा रहे मानसिक उत्पीडन की ही एक बलि है ।”


…इस विषय पर कोई संवेदना व्यक्त करेगा या नहीं ?

“वर्ष २००८ के मालेगांव बम विस्फोट प्रकरण में जिस प्रकार साध्वी प्रज्ञा सिंह को न्यायालय में लाया गया, उसे देखकर सुनवाई के लिए उपस्थित साहू नामक उनके एक भक्त की हृदय गति रुकने से न्यायालय में ही मृत्यु हो गई थी; परंतु उसके समाचार कहीं प्रकाशित नहीं हुए । कोरेगांव-भीमा दंगों के प्रकरण के आरोपी स्टेन स्वामी का जब निधन हुआ, तब उच्च न्यायालय सहित संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी शोक व्यक्त किया था । क्या समीर गायकवाड के निधन की संवेदना किसी तक पहुंचेगी ? समीर मराठा थे, तो क्या इस पर जरांगे पाटिल कुछ बोलेंगे ? एक अधिवक्ता एवं एक सामान्य नागरिक के नाते भी यह मेरी व्यथा है,” ऐसा अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने कहा ।

श्री. समीर गायकवाड को दिल का दौरा पडडने के उपरांत सांगली के सरकारी चिकित्सालय में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था; परंतु उपचार के दौरान ही उनका निधन हो गया । उनके परिवार में मां, पत्नी हर्षदा, एक बेटा, एक बेटी, २ भाई और सनातन की साधिका सुश्री संगीता जाधव एवं सुश्री सविता जाधव (दो मौसियां) समाहित हैं । ‘दिवंगत समीर गायकवाड को सद्गति प्राप्त हो’, ऐसी सनातन परिवार की ओर से भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में प्रार्थना !