
श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) – कश्मीर में जिहादी आतंकवादियों की सहायता करने वाले सरकारी कर्मचारियों को सेवा से निष्कासित करना एवं घाटी की मस्जिदों की पुलिस द्वारा की जा रही पडताल के कारण विवाद बढ गया है । जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संपूर्ण घाटी में मस्जिदों एवं धार्मिक पदाधिकारियों की विस्तृत जानकारी एकत्रित करने के लिए एक अभियान प्रारंभ किया है । इसमें व्यक्तिगत, आर्थिक एवं वैचारिक स्वरूप की जानकारी मांगी जा रही है । इस आदेश पर मौलवियों, राजनीतिक नेताओं तथा नागरिक समाज संगठनों ने चिंता व्यक्त की है ।
कौन सी जानकारी एकत्रित की जा रही है ?
१. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मस्जिदों की संपूर्ण जानकारी एकत्रित करने के लिए घाटी में एक प्रक्रिया प्रारंभ की है । इसके अंतर्गत अनेक मस्जिदों एवं उनसे संबंधित लोगों को ४ पृष्ठों का आवेदन पत्र (फॉर्म) दिया गया है । कश्मीर के विभिन्न भागों की अनेक मस्जिदों में यह आवेदन भेजा गया है । इसमें से एक पृष्ठ पर मस्जिद की जानकारी मांगी गई है, जबकि शेष ३ पृष्ठों पर प्रबंधन एवं धार्मिक कार्यों से संबंधित व्यक्तियों की जानकारी मांगी गई है ।
२. मस्जिद से संबंधित क्षेत्र में पंथ, बैठने की क्षमता, भौतिक संरचना, निर्माण लागत, मासिक व्यय, निधि के स्रोत, भूमि का स्वामित्व तथा प्रबंधन समितियों की जानकारी मांगी गई है । शेष पृष्ठों में इमाम (मस्जिद में प्रार्थना कराने वाला), मुअज्जिन (दिन में ५ बार अजान देकर मस्जिद में बुलाने वाला), खतीब (शुक्रवार की नमाज के उपरांत मार्गदर्शन करने वाला), मस्जिद प्रबंधन समिति के सदस्य तथा बैत उल माल (इस्लामी राज्य की सार्वजनिक तिजोरी) जैसे पदों पर आसीन व्यक्तियों की व्यक्तिगत जानकारी मांगी गई है । इस प्रक्रिया में आधार, पैन, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट एवं ड्राइविंग लाइसेंस नंबर के साथ बैंक खातों की जानकारी, एटीएम तथा क्रेडिट कार्ड का विवरण भी मांगा गया है ।
३. आवेदन में मस्जिदों से संबंधित व्यक्तियों के मोबाइल फोन का मॉडल, आईएमईआई नंबर, सोशल मीडिया खाते, यात्रा का इतिहास, आय एवं व्यय, संपत्ति का स्वामित्व, साथ ही विदेश में रहने वाले सगे-संबंधियों की जानकारी भी मांगी गई है ।
४. परिवार की जानकारी भी मांगी गई है जिसमें माता, पिता, भाई, बहन एवं बच्चे सम्मिलित हैं । इसके साथ ही क्या पूर्व में आतंकवादी या आपराधिक प्रकरणों में संलिप्तता थी ? इसकी जानकारी देना आवश्यक है । मस्जिदों से संबंधित वैचारिक जुडाव के विषय में भी जानकारी देने को कहा गया है ।
महबूबा मुफ्ती की तीखी आलोचना

पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने सरकार के इस निर्णय की तीखी आलोचना की है । उन्होंने कहा कि मस्जिदों की जानकारी एकत्रित करने का नया आदेश हमारे धर्म में सीधा हस्तक्षेप है । सरकार को मंदिरों में भी ऐसा ही अभियान चलाना चाहिए तथा यह तय करना चाहिए कि कौन सा समूह किस मंदिर में जाएगा; क्योंकि दूसरे समूह के मंदिर में जाने पर दलित बच्चों को पीटा जाता है । उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिदों की जानकारी एकत्रित करना मुसलमानों को मस्जिदों से दूर रखने की खुली धमकी है । इमामों के चित्र, आधार कार्ड एवं व्यक्तिगत जानकारी एकत्रित करना मुसलमानों में भय उत्पन्न करने के लिए जानबूझकर किया जा रहा है ।
धार्मिक संगठनों की चिंता
‘मुताहिदा आइमा फोरम’ के अध्यक्ष मकतूब मीरवाइज हसन फिरदौसी ने कहा कि यह प्रक्रिया मौलिक अधिकार, गोपनीयता एवं व्यक्तिगत जानकारी के अधिकारों का पूर्ण उल्लंघन है । मस्जिदें उपासना, मार्गदर्शन एवं समाज सेवा के पवित्र स्थान हैं । उनके अंतर्गत धार्मिक विषयों में मनमानी दृष्टि एवं हस्तक्षेप करने वाली जांच नहीं होनी चाहिए । मांगी जाने वाली जानकारी का स्वरूप तथा गहराई किसी भी नियमित प्रशासनिक आवश्यकता से बहुत अधिक है । इससे इस प्रक्रिया के उद्देश्यों पर गंभीर प्रश्न खडे होते हैं एवं बलपूर्वक पडताल करके धार्मिक स्थलों पर नियंत्रण एवं नियमन करने का प्रयास दिखाई देता है ।
संपादकीय भूमिकाऐसी जानकारी देश की प्रत्येक मस्जिद एवं मदरसे के साथ-साथ मुसलमानों के प्रत्येक संगठन की भी एकत्रित की जानी चाहिए ! |
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