हिन्दू धर्म को बांटोगे, तो याद रखिए : मैं हिमालय की भांति खडा हूं ! – HH Kadsiddheshwar Swami

कोल्हापुर के सिद्धगिरी मठ के मठाधिपति प.पू. काडसिद्धेश्वर स्वामीजी की चेतावनी

बबलेश्वर के सम्मेलन में उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन करते हुए प.पू. काडसिद्धेश्वर स्वामीजी

विजयपुर (कर्नाटक) – कुछ लोग महात्मा बसवेश्वर के वचनों का अनुचित अर्थ निकाल रहे हैं । बसवेश्वर आदि जैसे तो संत थे, वे सभी हिन्दू ही थी । इस प्रत्येक संत ने अपने वचनों के अंत में अर्थात जिसे ‘अंकितनाम’ कहते हैं, उनमें उनके कुलदेवता एवं ग्रामदेवता का उल्लेख किया है । ये सभी देवताएं हिन्दुओं के इष्टदेवताएं हैं । उससे वे हिन्दू ही हैं, यह समझ में आता है । इस संदर्भ में मैं शास्त्रार्थ करने के लिए तैयार हूं । यदि कोई हिन्दू धर्म को बांटेंगे, तो याद रखिए; मैं धर्म की रक्षा के लिए हिमालय की भांति खडा हूं; ऐसी चेतावनी कोल्हापुर के सिद्धगिरी मठ के मठाधिपति प.पू. काडसिद्धेश्वर स्वामीजी ने दी ।

सम्मेलन में उपस्थित संत एवं मान्यवर

कर्नाटक के विजयपुर में राजनीति से प्रेरित उन पर लगाई गई प्रवेशबंदी हटाने के उपरांत बबलेश्वर, विजयपुर में आयोजित सार्वजनिक विराट ‘बसवादि शरण हिन्दू सम्मेलन’ का आयोजन किया गया था, इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए वे ऐसा बोल रहे थे । इस सम्मेलन में कर्नाटक की बसव परंपरा के अनेक संत, महात्मा एवं मठाधिपति बडी संख्या में उपस्थित थे ।

१. कुछ लोग महात्मा बसवेश्वर के कुछ वचनों का उल्लेख करते हुए ‘बसवेश्वर मंदिर, मूर्तिपूजा, वेदों एवं उपनिषदों के विरोधी थे’, ऐसा दुष्प्रचार कर रहे हैं । महात्मा बसवेश्वर द्वारा रचित अनेक वचनों में उन्होंने हिन्दू धर्म के देवताओं का स्तुतिगान एवं समर्थन किया है । उनके अनेक वचनों में उन्होंने वेदों एवं उपनिषदों के वाक्यों के संदर्भ दिए हैं, यह बात ये हिन्दू धर्मविरोधी लोग नहीं बताते ।

स्वामीजी पर की गई फूलों की वर्षा !

इस अवसर पर सहस्रों महिलाओं-पुरुषों की उपस्थिति में बबलेश्वर के मुख्य चौक से लेकर कार्यक्रमस्थल तक शोभायात्रा निकालकर स्वामीजी का स्वागत किया गया । इसमें सहस्रों कलशधारी महिलाएं सहभागी थीं । अनेक स्थानों पर इस शोभायात्रा पर तथा स्वामीजी पर फूलों की वर्षा की गई ।

२. उनके विषय में यह भी दुष्प्रचार किया जा रहा है कि महात्मा बसवेश्वर पुनर्जन्म एवं कर्मसिद्धांत नहीं मानते; परंतु बसवेश्वर के अनेक वचनों में पुनर्जन्म का उल्लेख है । इसके साथ ही उन्होंने कर्मसिद्धांत एवं मोक्षसिद्धांत का भी उल्लेख किया है । उन्होंने वेदों का स्वीकार किया है । ऐसा होते हुए भी हिन्दू धर्मविरोधी लोग महात्मा बसवेश्वर के वचनों का अनुचित अर्थ लगाकर समाज में दिशाभ्रम फैला रहे हैं ।

३. कुछ लोग वीरशैव एवं लिंगायत, यह भेद उत्पन्न कर लिंगायत समाज को तोडने का प्रयास कर रहे हैं । यह हिन्दू धर्म को तोडने का षड्यंत्र है । हम पहले हिन्दू हैं तथा उसके उपरांत हम वीरशैव एवं लिंगायत हैं, ऐसा स्वामीजी ने स्पष्टता से कहा ।

वीरशैव एवं लिंगायत एक ही हैं तथा वह हिन्दू धर्म का ही एक पंथ है !

प.पू. काडसिद्धेश्वर स्वामीजी ने कहा कि वीरशैव एवं लिंगायत भिन्न न होकर वे एक ही हैं । कुछ लोगों को यदि नए लिंगायत धर्म की स्थापना करनी हो, तो वे हिन्दू लिंगायत विचारधारा पर आधारित पुराने मठों को छोडें तथा नए मठों का निर्माण करें । वे भगवा वस्त्र त्यागकर नया वस्त्र खोजें । सनातन आगम शास्त्र से आए लिंग, भस्म, रुद्राक्ष एवं हिन्दू धर्म के अंश मंत्रजप इन्हें त्यागकर कुछ नया खोजें, अन्यथा धर्मविरोधी अर्थहीन बकबक बंद करें । यदि यह धर्मविरोध नहीं रूकता है, तो हम पूरे देश में ऐसे विराट बसवादि हिन्दू धर्म सम्मेलनों का आयोजन करेंगे ।