
कोल्हापुर, २३ दिसंबर (संवाददाता) : ‘क्रिसमस’ के निकट आते ही भारत के अधिकांश शहरों में चौक-चौक पर ‘सांताक्लॉज’की टोपियां बेचनेवाले अनेक बिक्रेता दिखाई देते हैं । हिन्दू होते हुए भी स्वयं को ‘आधुनिकतावादी’ एवं ‘सर्वधर्मसमभावी’ कहलानेवाले लोग अपने बच्चों के लिए ऐसी टोपियां ले आकर ‘बच्चे जब सो जाते हैं, तब ‘सांताक्लॉज’ आता है तथा वह उनके लिए ‘भेंटवस्तुएं’ लेकर आता है’, ऐसी एक भ्रामक कहानी बताकर बच्चों का सांस्कृतिक धर्मांतरण करना आरंभ कर देते हैं; परंतु हिन्दू समाज इस पर बिना कुछ विचार किए ‘क्या सचमुच कोई ‘सांताक्लॉज’ था ?, क्या ‘सांताक्लॉज’ आकर सचमुच बच्चों को भेंटवस्तुएं देता है ? ‘इस ‘सांता’के विषय में ईसाई धर्मियों की क्या धारणा है ?’ इन जुमलों में आकर बच्चों को अंधविश्वास के अधीन कर रहे हैं । अन्य समय पर हिन्दुओं के देवताओं को ‘पाखंड’ कहनेवाले तथा हिन्दू प्रथा-परंपराओं को विरोध करनेवाले इस समय चूप क्यों हैं ? हम समस्त हिन्दू समाज की ओर से यह आवाहन कर रहे हैं, ‘सचमुच ही सांताक्लॉज आता है, यह सिद्ध कीजिए और १ लाख रुपए प्राप्त कीजिए !’ तथा यदि यह झूठ है, तो आप बच्चों को भ्रमित मत कीजिए, ऐसा आवाहन ‘हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति’ के तहसील संयोजक श्री. नितीन काकडे ने किया । इस संदर्भ में कोल्हापुर में की गई पत्रकार वार्ता में वे ऐसा बोल रहे थे ।
इस अवसर पर ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास’के राष्ट्रीय महामंत्री श्री. पराग फडणीस, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के श्री. अशोक गुरव, ‘महाराजा प्रतिष्ठान’के संस्थापक श्री. निरंजन शिंदे, ‘शिवशाही फाऊंडेशन’के संस्थापक श्री. सुनील सामंत, उद्धव बाळासाहेब ठाकरे गुट के उपजिलाप्रमुख श्री. संभाजीराव भोकरे, हिन्दुत्वनिष्ठ श्री. रामभाऊ मेथे एवं हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति के श्री. शिवानंद स्वामी उपस्थित थे । श्री. काकडे ने आगे कहा कि ‘सांताक्लॉज’के विषय में ईसाई धर्मगुरुओं ने ही जो कुछ कहा है, वह बहुत ही चौंकानेवाला है । उनमें से कुछ ही लोगों के वक्तव्य भी हमने समझ लिए, तो इसका झूठ ध्यान में आएगा ।
ईसाईयों द्वारा ‘सांताक्लॉज’ के विषय में व्यक्त किया गया मत
१. इटली के बिशप (वरिष्ठ पादरी) एंटोनियो स्टैग्लियानो सांताक्लॉज के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह उठाकर कहते हैं, ‘सांताक्लॉज एक काल्पनिक व्यक्तिरेखा है, जिसका उपयोग कोका-कोला प्रतिष्ठान ने उसके उत्पादों के विज्ञापन के लिए किया है !’
२. अमेरिका के प्रसिद्ध ईसाई लेखक तथा पादरी मार्क ड्रीस्कॉल ने ‘सांताक्लॉज’ अभिभावकों को उनके बच्चों से झूठ बोलने के लिए बाध्य करनेवाला ‘क्रिसमस’का राक्षस है । ‘सांता का अस्तित्व है’, ऐसा बच्चों से झूठ बोलना उनका विश्वासघात करने जैसा है’, ऐसा कहा है ।
३. ईसाईयों की ४ प्रमुख चर्चसंस्थाओं में से ‘ऑर्थोडॉक्स चर्च’में ‘सांताक्लॉज’ की संकल्पना को लगभग संपूर्णरूप से अस्वीकार किया जाता है । रूस, ग्रीस जैसे देशों के ऑर्थोडॉक्स चर्च सांता के स्थान पर ‘सेंट बेसिल’ अथवा ‘फादर फ्रॉस्ट’ को मानते हैं । उनके अनुसार ‘सांताक्लॉज’ एक व्यापारिक भ्रम है, जिसका ऑर्थोडॉक्स की आध्यात्मिक परंपरा के साथ कोई संबंध नहीं है । ‘एंग्लिकन चर्च’के अनुसार ‘सांता एक मनोरंजक कहानी है, जो क्रिसमस का केंद्रबिंदु नहीं है ।’, जबकि ‘प्रोटेस्टंट’ पंथ सांताक्लॉज को ‘मूर्तिपूजा’ अथवा ‘अंधविश्वास’ मानता है ।

महाराष्ट्र की अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (अंनिस) ईसाई अंधविश्वासों के संदर्भ में चुप क्यों है ?
ईसाई धर्मगुरु एवं संस्थाएं जहां सांताक्लॉज को ‘पाखंड’ कह रही हैं, तो ऐसी स्थिति में हिन्दू उसका महिमामंडन क्यों करें ? आप समय रहते ही सतर्क बनें तथा अपने बच्चों को हिन्दू धर्म के संस्कार दें । उनके बचपन में ही आप अंधविश्वास मत थोपिए । अन्य समय पर अंधविश्वास निर्मूलन के नाम पर हिन्दुओं की धर्मश्रद्धशओं को लक्ष्य बनानेवाली ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ ईसाइॅ अंधविश्वास के विषय में चुप क्यों है ? ‘अंनिस’को ‘सांता’में कौनसी आधुनिकता अथवा विज्ञानवादी दृष्टिकोण दिखाई देता है, यह वे घोषित करें, ऐसी चुनौती भी हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति ने दी है ।
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