महाराष्ट्र नगर परिषद एवं नगर पंचायत चुनाव: महायुति को निर्विवाद सफलता !

  • ​२१४ स्थानों पर महायुति के नगराध्यक्ष निर्वाचित 

  • ​भाजपा १२०, शिवसेना ५४, राष्ट्रवादी कांग्रेस के ४० नगराध्यक्ष 

एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार

मुंबई, २१ दिसंबर (वार्ता.) – राज्य की २४४ नगर परिषदों तथा ४२ नगर पंचायतों के निर्वाचन में भी विधानसभा चुनाव की भांति महायुति ने निर्विवाद सफलता प्राप्त की है । २८८ में से कुल २१४ स्थानों पर महायुति के नगराध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं । इसमें भाजपा के १२०, शिवसेना के ५४, तथा अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के ४० नगराध्यक्ष विजयी हुए ।

​विपक्षी दलों में ठाकरे पक्ष के केवल ८, तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) पक्ष के मात्र ७ नगराध्यक्ष निर्वाचित हुए । विपक्ष में कांग्रेस ३४ स्थानों पर अपने नगराध्यक्ष निर्वाचित करने में सफल रही । २५ स्थानों पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, शेतकरी कामगार पक्ष सहित निर्दलीय एवं अन्य स्थानीय दलों के नगराध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं । भाजपा ने विदर्भ में, तो शिवसेना ने कोंकण में सर्वाधिक स्थान जीते । चंद्रपुर जनपद के ९ में से ८ स्थानों पर कांग्रेस के नगराध्यक्ष विजयी हुए ।

​२ दिसंबर एवं २० दिसंबर को हुए मतदान का एकत्रित परिणाम घोषित हुआ । स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में आरक्षण का सूत्र न्यायाधीन होने के कारण ये निर्वाचन प्रलंबित थे । वर्ष २०१७ में हुए नगर परिषदों तथा नगर पंचायतों के सामान्य निर्वाचन के ८ वर्ष पश्चात महाराष्ट्र में ये चुनाव संपन्न हुए । अतः ये चुनाव अत्यंत ध्यानाकर्षक सिद्ध हुए । विशेष यह है कि महायुति तथा महाविकास आघाड़ी के घटक दलों ने ये चुनाव स्थानीय राजनीतिक स्थिति के अनुसार कहीं एक-दूसरे के विरुद्ध, तो कहीं परस्पर सहयोग से लड़े थे । आगामी महानगरपालिका चुनावों की पृष्ठभूमि में राज्य का यह चुनाव परिणाम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है ।

​नगर पंचायत तथा नगर परिषद में भेद !

नगर पंचायत: यहां की सामान्य जनसंख्या १० से २५ सहस्र तक होती है । यह क्षेत्र अर्ध-शहरी स्वरूप का होता है । यहां विभागों एवं कर्मचारियों की संख्या न्यून होती है । यहां के प्रमुख मुख्याधिकारी होते हैं । कर-संग्रह एवं निधि तुलनात्मक रूप से अल्प होती है ।

​नगर परिषद: यह स्थिर एवं लघु-मध्यम नगरों के लिए होती है । यहां की जनसंख्या २५ सहस्र से ३ लक्ष तक होती है । यहां के प्रमुख मुख्याधिकारी (श्रेणी १) होते हैं । यहां विभाग न्यून एवं कर्मचारियों की संख्या मध्यम होती है तथा कर-संग्रह एवं निधि नगर पंचायत की तुलना में अधिक होती है ।

​भाजपा ने शतक, तो शिवसेना ने अर्धशतक पूर्ण किया ! – एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री

मुंबई – जिस प्रकार लोकसभा एवं विधानसभा में महायुति को प्रचंड विजय प्राप्त हुई, वैसी ही देदीप्यमान सफलता नगर परिषद एवं नगर पंचायत चुनावों में भी मिली है । ‘ऐसी ही सफलता आगामी महानगरपालिका चुनावों में भी मिलेगी’, ऐसा संकेत इस परिणाम से मिला है । इस निर्वाचन में भाजपा ने शतक, तो शिवसेना ने अर्धशतक पूर्ण किया है । शिवसेना का ‘सफलता दर’ (स्ट्राइक रेट) भी अतिशय उत्तम है । हमने न्यून स्थानों पर चुनाव लड़कर अधिक नगराध्यक्ष तथा नगरसेवक के पद जीते हैं, ऐसा मत राज्य के उपमुख्य मंत्री एकनाथ शिंदे ने व्यक्त किया । इस विजय के लिए उन्होंने कार्यकर्ताओं तथा पदाधिकारियों का अभिनंदन किया ।

उन्होंने यह भी कहा, “जो लोग इस चुनाव में घर पर बैठे रहे तथा जिन्होंने कार्यकर्ताओं को असहाय छोड़ दिया, उन लोगों को मतदाताओं ने घर बैठा दिया है ।”

​महाराष्ट्र की जनता ने पुनः विश्वास दर्शाया ! – देवेंद्र फडणवीस, मुख्यमंत्री

राज्य में ७५ प्रतिशत स्थानों पर महायुति के नगराध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं । राज्य में कुल निर्वाचित नगरसेवकों में ४८ प्रतिशत अर्थात ३ सहस्त्र ३०० भाजपा के नगरसेवक निर्वाचित हुए हैं । भाजपा राज्य का सबसे बड़ा दल सिद्ध हुआ है । महाराष्ट्र सरकार के विकास के सूत्र पर जनता ने अपनी सम्मति की मुहर लगा दी है । चंद्रपुर में सुधीर मुनगंटीवार को कहां सहायता न्यून पड़ी, इसका हम अध्ययन करेंगे तथा आगामी महानगरपालिका चुनाव में चंद्रपुर महानगरपालिका पर हम विजय प्राप्त करेंगे ।

​चंद्रपुर की असफलता पर सुधीर मुनगंटीवार ने व्यक्त किया असंतोष !

चंद्रपुर में पक्ष के नेतृत्व ने गुटबाजी के लिए पोषक वातावरण निर्मित किया । मुझसे अथवा जनपद अध्यक्ष से कोई चर्चा किए बिना अन्य लोगों को पक्ष में प्रवेश दिया गया । पक्ष को विचारपूर्वक निर्णय लेना चाहिए । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विरोध करने वालों को पक्ष नेतृत्व समीप ला रहा है । वर्ष २०१७ के चुनाव में चंद्रपुर महानगरपालिका में हमने उत्तम सफलता प्राप्त की थी । इस चुनाव में मुझे कोई विशेष उत्तरदायित्व नहीं दिया गया था, इस प्रकार सुधीर मुनगंटीवार ने पक्ष नेतृत्व के प्रति अपना असंतोष व्यक्त किया ।