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मुंबई – राज्य के विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२० (‘एन्.ई.पी.’ २०२०) के अंतर्गत त्रिभाषा नीति निश्चित करने के लिए स्थापित समिति को एक मास का समयावधि विस्तार देने का निर्णय राज्यशासन ने लिया है । यह निर्णय विद्यालय की शिक्षा एवं क्रीड़ा विभाग ने १५ दिसम्बर को लागू किया है । ४ दिसम्बर २०२५ से ४ जनवरी २०२६ की समयावधि विस्तार का समय है । इस कालावधि में समिति से पूर्ण प्रतिवेदन शासन को प्रस्तुत करना अपेक्षित है ; किन्तु ‘समिति का प्रतिवेदन कुछ भी हो, कक्षा १ से हिन्दी भाषा लागू नहीं करने देंगे’, ऐसा दृढ पक्ष शिक्षक सेना संगठन के जालिंदर सरोदे ने लिया है , तो ‘समिति के प्रतिवेदन से महाराष्ट्र की जनता कभी भी सहमती प्रकट नहीं करेगी’, ऐसा मनसे नेता संदीप देशपांडे ने कहा ।
१. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार विद्यार्थियों के लिए मातृभाषा, प्रादेशिक भाषा एवं अंग्रेजी भाषा का सन्तुलन साधने वाले ‘त्रिभाषा सूत्र’ को लागू करने का अध्ययन राज्य में चल रहा है । इसके लिए डॉ. नरेन्द्र जाधव की अध्यक्षता में विभागीय नीति समिति स्थापित की गई थी । समिति को ३ मास के कालावधि में शासन को प्रतिवेदन प्रस्तुत करना था ।
२. १७ जुलाई को हुई समिति की प्रथम बैठक में राज्य के विविध क्षेत्रों की भाषिक वास्तविकता, विद्यार्थियों की सामाजिक पृष्ठभूमि, शिक्षकों की उपलब्धता तथा विद्यालयों पर संभावित परिणाम इन पर चर्चा की गई । समिति ने राज्य के विविध स्थानों पर बैठकें करके शिक्षक, शिक्षाविद् (शिक्षणतज्ञ), संस्थाचालक, अभिभावक, भाषा अध्येता (भाषा अभ्यासक) एवं नागरिको के मत जान लिए ।
३. समिति के अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र जाधव का स्वास्थ्य तथा विषय की व्यापकता को ध्यान में लेते हुए निर्धारित समयावधि में कार्य पूर्ण न होने के कारण समयावधि विस्तार मांगा गया ।
४. समिति का प्रतिवेदन प्राप्त होने के उपरांत राज्यशासन ‘त्रिभाषा नीति’ पर अंतिम निर्णय लेगा ।
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