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नई देहली – लालकिले के समीप चारपहिये वाहन में हुए आत्मघाती बमविस्फोट के अन्वेषण में नये–नये सूत्र प्राप्त हो रहे हैं । आतंकवादियों का जाल पाकिस्तान से आगे बढ़कर मालदीव तक पहुंच गया है, यह प्रत्यक्ष ज्ञात हुआ है । नयी सूचना के अनुसार डॉ॰ अदिल अहमद का भाई मुझफ्फर दुबई से आतंकवादियों को निर्देशन दे रहा था । वह ५ वर्ष से आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय है, यह तपास में स्पष्ट हुआ । उत्तरप्रदेश में कार्यरत कश्मीरि वंश के अनुमानतः २०० चिकित्सक तथा वैद्यकीय विद्यार्थी पुलिस की दृष्टि में हैं । डॉ. शाहीन नियमित रूप से ३० से ४० चिकित्सकों के संपर्क में थी ।
The Delhi Bomb Blast Probe: Over 200 Kashmiri-origin doctors and Medicos in UP are under scrutiny – 15 from Al-Falah University are on the run.
When such a large number of doctors face terror-related suspicion, what message does it send?
Where are the seculars,… https://t.co/y7eExgpQL9 pic.twitter.com/SWVSTEtSJ0
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) November 15, 2025
अल्–फलाह विद्यापीठ के १५ चिकित्सक लापता
हरियाणा के अल्–फलाह विद्यापीठ के १५ चिकित्सक लापता होने का तथ्य सामने आया है । ये चिकित्सक मुख्य आरोपी मुजम्मिल के संपर्क में थे । उसके दूरभाष–विवरणों से अनेक जन निरंतर संपर्क में रहने का विवरण प्राप्त हुआ । पूछताछ हेतु उनसे संपर्क साधने पर उनके दूरभाष–संच (मोबाइल) बंद मिले । जब पुलिस जांच हेतु विद्यापीठ पहुंची तब सभी लोग वहां से पलायित पाए गये ।
शाहीन एवं परवेज के संपर्कों की खोज
डॉ. शाहीन ने पाकिस्तान सहित अनेक देशों में संपर्क–जाल निर्मित किया था । पाकिस्तान सेना के चिकित्सकों सहित अनेक कश्मीरि चिकित्सकों तथा विद्यार्थियों से उसका संबंध था । शाहीन तथा परवेज के निकटवर्ती व्यक्तियों की सूचना एकत्रित की जा रही है । परवेज के लक्ष्मणपुरी में रहनेवाले कश्मीर के लोगों से संबंध होने का तथ्य सामने आया है । इस कारण लक्ष्मणपुरी की विविध शैक्षणिक संस्थाओं में अध्ययनरत जम्मू–कश्मीर के विद्यार्थी, शिक्षक तथा कर्मचारी – इन सभी का विवरण एकत्रित किया जा रहा है ।
देहली विस्फोट में प्रयुक्त गाड़ी २ लाख में खरीदी गयी
लालकिले के समीप हुए विस्फोट हेतु उपयोग में ली गयी ‘आय–२०’ चारपहिया गाड़ी फरीदाबाद के एक वाहन–विक्रेता से २ लाख रुपये नगद देकर खरीदी गयी थी । नूंह से २ तथा बंगाल से १ चिकित्सक को बंदी बनाया गया है ।
आतंकवादी समूह ५ वर्ष से कार्यरत
देहली बमविस्फोट में सम्मिलित आतंकवादी समूह ५ वर्ष पूर्व ही गठित हुआ था । प्रत्येक सदस्य अपने–अपने छोटे समूह का नेता था; परंतु वास्तविक नेता डॉ. मुझफ्फर अली राठेर था, जो डॉ. अदिल का भाई है । इस समूह में सम्मिलित चिकित्सक ३ वर्ष से विस्फोटक सामग्री एकत्र कर रहे थे । उन्होंने प्रत्येक मास एक नया ‘चैट–समूह’ (सामाजिक माध्यम पर संदेश–विनिमय हेतु) निर्मित किया । वे बांग्लादेश, अफगानिस्तान, दुबई तथा सौदी अरब में एक–दूसरे से मिलते थे । वहां पाकिस्तानी ‘हैण्डलर’ भी उनसे संपर्क रखते थे ।
शिक्षण के नाम पर बुद्धि–भ्रंश (ब्रेनवॉश)
जिन चिकित्सकों के नाम इस प्रकरण में सामने आये, उनमें से अनेक चिकित्सक गत २ वर्षों में तुर्कीय, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमिरात, बांग्लादेश तथा मलेशिया गये थे । देहली की निजी संस्थाओं ने शैक्षणिक वीज़ा द्वारा उनके प्रवास की व्यवस्था की । इन संस्थाओं की भी जांच की जा रही है । ‘आतंकवाद का अध्ययन’, ‘सायन्स ऑफ शहादत’, ‘ड्यूटी इन फेथ’ और ‘हीलिंग द बिलीवर्स’ – इन शीर्षकों वाली सुरक्षित धारिकाएं (फाइलें) इरफान तथा डॉ॰ मुजम्मिल गनई के साहित्य में मिलीं । ये धारिकाएँ युवक–चिकित्सकों का बुद्धिभ्रंश करने हेतु प्रयुक्त की गयीं ।
नूंह में २ नेताओं की पूछताछ
हरियाणा के नूंह जिले के २ नेताओं पर संशय किया जा रहा है । फरीदाबाद से बंदी बनाये गये चिकित्सक से इन नेताओं के संबंधों की जांच चल रही है । अल्–फलाह विद्यापीठ से बंदी बनाये गये डॉ. मुजम्मिल के इन नेताओं से सुदृढ़ संबंध हैं । आरोपी मुजम्मिल ने उनके रोगकाल में उपचार किया था । इसी काल में बने संपर्क, पत्र–व्यवहार तथा बैठक–श्रृंखला अभी भी चल रही है । इन्हीं संबंधों की जांच पुलिस कर रही है । अल्–फलाह विद्यापीठ की स्थापना में नूंह के विधायक की भूमिका भी जांच के अंतर्गत है । नूंह के २ चिकित्सकों को पूछताछ हेतु नियंत्रण में लिया गया है । उनमें से एक ने एम्.बी.बी.एस्. के उपरांत अल्–फलाह विद्यापीठ में शिक्षु–प्रशिक्षण (अप्रेंटिसशिप) किया था; दूसरा पूर्व–विद्यार्थी है ।
देश छोड़ने की तैयारी में थी डॉ. शाहीन
बंदीकृत की गयी महिला–चिकित्सक शाहीन बमविस्फोट करवाकर देश छोड़ने की तैयारी में थी । देहली बमविस्फोट के ७ दिन पूर्व उसने अपना पारपत्र (पासपोर्ट) पुनः जांच कराया था । वह दुबई जाने का प्रयास कर रही थी । उसे ‘मैडम सर्जन’ यह सांकेतिक नाम दिया गया था । जैश–ए मोहम्मद से जुड़े सभी लोग उसे इसी नाम से संबोधित करते थे । उसने मुसलमान कन्याओं को ‘जैश’ में भर्ती करके उन्हें आतंकवादी आक्रमणों हेतु सिद्ध करने की योजना बनायी थी । शाहीन की दैनन्दिनी (डायरी) में जैश-ए-माेहम्मद के जाल की विस्तृत जानकारी लिखी हुई थी । २५ से ३० व्यक्तियों का यह जाल जम्मू–कश्मीर तथा फरीदाबाद से जुड़ा हुआ है ।
४ चिकित्सकों की पंजीकरण–निरस्ती
इस प्रकरण में बंदी बनाये गये डॉ. मुझफ्फर अहमद, डॉ. अदिल अहमद राठेर, डॉ. मुजम्मिल शकील तथा डॉ. शाहीन – इन सभी का पंजीकरण ‘राष्ट्रीय वैद्यकीय परिषद’ ने निरस्त कर दिया है ।
संपादकीय भूमिका
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