|

नवीन दिल्ली – भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने वित्तीय वर्ष २०१०–११ से २०२४–२५ की १५ वर्षों की अवधि में राजधानी दिल्ली की विविध ‘ऐतिहासिक’ इस्लामी वास्तुओं पर, जो हिन्दुओं पर हुए अत्याचारों के प्रतीक हैं, करोड़ों रुपये व्यय किए हैं । यह सूचना हिन्दू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर को सूचना के अधिकार के अंतर्गत प्राप्त हुई है ।
इसमें दिल्ली की शाही अथवा कुदसिया मस्जिद के संरक्षण हेतु ₹१ कोटी २३ लाख, बेगमपुरी मस्जिद हेतु ₹१ कोटी ६ लाख, मोहम्मद तुगलक की कब्र हेतु ₹२२ लाख १३ सहस्र, निज़ामुद्दीन औलिया की कब्र हेतु ₹९ लाख ६७ सहस्र तथा बहलोल लोदी की कब्र हेतु गत १५ वर्षों में ₹१६ लाख ५३ सहस्र रुपये शासकीय निधि से प्रदान किए गए हैं ।
१. अधिवक्ता इचलकरंजीकर को सूचना के अधिकार के अंतर्गत प्राप्त विवरण के अनुसार, भारतीय मुद्रा पर अंकित कोटला स्थित अशोकस्तंभ हेतु वर्ष २०१० से वर्ष २०२२ तक की १३ वर्षों की अवधि में एक भी नया पैसा व्यय नहीं किया गया ।
२. पश्चात के ३ वर्षों में अशोकस्तंभ पर ₹७४ लाख ३ सहस्र रुपये व्यय किए गए, यह विवरण भी सूचना के अधिकार के उत्तर में प्राप्त हुआ।
३. ‘एन.सी.ई.आर्.टी.’ द्वारा इतिहास के नवीन पाठ्यपुस्तकों में मुगल शासक बाबर को अत्यंत क्रूर तथा निर्दयी बताया गया है, अलाउद्दीन खिलजी को ‘मन्दिरों का विध्वंसक’ कहा गया है, तथा औरंगज़ेब सहित सभी मुगल शासकों ने मन्दिरों की लूट एवं ध्वंस किया, यह कहा गया है । ऐसे में इस्लामी आक्रांताओं की वास्तुओं को सरकार द्वारा इतनी सहायता क्यों ? यह वास्तविक प्रश्न है ।
४. इस विषय पर हिन्दू समाज में रोष की लहर है । ‘अशोकस्तंभ हमारी राजमुद्रा का अभिन्न घटक है । उसे गरिमा प्राप्त है, अतः इतना व्यय आवश्यक है । किन्तु जिन आक्रांताओं ने लाखों हिन्दुओं का वध किया, हिन्दू स्त्रियों का शील हरण किया तथा साढ़े तीन लाख से अधिक मन्दिरों को ध्वस्त कर इस्लामी वास्तुएं निर्मित कीं, उन्हें सरकार द्वारा करोड़ों रुपये क्यों दिए जा रहे हैं ? यह हिन्दूद्वेषियों का महिमामंडन क्रोधित करने वाला है । यह केवल धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र का उपहास ही नहीं, अपितु बहुसंख्य हिन्दू समाज की भावनाओं का अपमान है’, इस प्रकार की प्रतिक्रियाएं व्यक्त की जा रही हैं ।
अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर को सूचना के अधिकार के अंतर्गत प्राप्त हुए प्रश्नों के उत्तर; |
पुरातत्व विभाग द्वारा इस्लामी आक्रांताओं की कब्रों का संरक्षण करना, यह ‘वैचारिक जिहाद’ ही है ! – अधिवक्ता इचलकरंजीकर

इस विषय में अधिवक्ता इचलकरंजीकर ने ‘सनातन प्रभात’ को बताया :
१. हमारे यहां मन्दिर संस्थानों का विरोध किया जाता है । उसी समय कब्रों का मन से संरक्षण किया जाता है । एक ओर मन्दिरों को अपने अधीन कर उनके देवकोष को मनमाने ढंग से व्यय किया जाता है । दूसरी ओर वक़्फ़ बोर्ड, जो देश की समस्त इस्लामी संस्थाओं (संपत्तियों) का एक प्रकार से सरकारीकरण है, उसमें हस्तक्षेप करने का साहस सरकार को नहीं होता ? संक्षेप में, मन्दिरों के धन का दोहन करना है, परन्तु वक़्फ़ में मुसलमानों को ही सम्पूर्ण अधिकार देकर वक़्फ़ बोर्डों को धन देना है ? यह जो दोहरे मापदंड की नीति है, वही ‘वैचारिक जिहाद’ का लक्षण है । यह वैचारिक आतंकवाद हमें समझ में नहीं आता । ‘एन.सी.ई.आर्.टी.’ की पुस्तकों द्वारा हो रहा इस्लामी आक्रांताओं का महिमामंडन हो या पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित आक्रांताओं की कब्रों जैसे प्रतीक हों – मूल विषय हमारे (हिन्दुओं के) प्रमाद का है । हम कब जागेंगे, यही वास्तविक प्रश्न है ।
२. इस्लाम में कब्रों का कोई महत्त्व नहीं है । सम्भवतः इसीलिए पैगंबर मोहम्मद की कब्र को ऐसा कोई वैश्विक पूजास्थान का स्थान प्राप्त नहीं हुआ । जो कुछ महत्त्व है, वह केवल मक्का को है ।
३. इस्लाम में वहाबी अथवा सलाफी पंथ हो, वे कब्रों एवं दरगाहों की पूजा का तीव्र विरोध करते हैं । जहां सूफी संतों की कब्रों का विरोध होता हो, वहां इन सुल्तानों की कब्रों के प्रति इतनी सहानुभूति क्यों ?
छत्रपति शिवाजी महाराज के दुर्गों एवं हिन्दू स्थापत्य की ओर सेक्युलरवादियों की जानबूझकर उपेक्षा ! – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति

इस विषय में श्री रमेश शिंदे ने ‘सनातन प्रभात’ को बताया : कांग्रेस सहित अन्य तथाकथित सेक्युलरवादी दलों ने ‘धर्मनिरपेक्षता’ के नाम पर मुसलमानों का अत्यधिक तुष्टीकरण किया है । इसमें मदरसों को अनुदान देना, मौलवियों को वेतन देना, हज यात्रा को अनुदान देना आदि कृत्य सम्मिलित हैं । ‘भारत को इस्लामी विरासत प्राप्त देश’ मानते हुए, मुस्लिम समाज द्वारा दावे किए जा रहे हैं तथा ताजमहल से लेकर विविध इस्लामी स्थापत्य एवं कब्रों को सरकारी धन देकर भव्य बनाने का प्रयत्न चल रहा है ।
मुम्बई में तो आतंकवादी याक़ूब मेनन की दरगाह बनाकर उसका भी सौंदर्यीकरण करने का प्रयास किया गया । यह सब करते समय हिन्दुओं की भव्य वास्तुएं, अद्भुत शिल्पकला वाले मन्दिर, तथा दिव्य देवमूर्तियां इनकी पूर्णतः उपेक्षा की गई । हिन्दू विधिज्ञ परिषद द्वारा सूचना के अधिकार से उजागर की गई यह वास्तविकता सभी के लिए आंख खोलने वाला है । अतः हिन्दू संगठनों को एकत्र आकर छत्रपति शिवाजी महाराज के उपेक्षित दुर्गों, प्राचीन मन्दिरों एवं भग्न अवस्था में स्थित स्थापत्य को पुनः सजीव करने हेतु शासन से निधि की मांग करनी चाहिए ।
शासकीय संस्थाओं की अनुचित प्राथमिकताओं को रोकने हेतु शासन की सक्रियता आवश्यक ! – नीरज अत्री

इस विषय में ‘सनातन प्रभात’ द्वारा विख्यात इतिहासवेत्ता श्री नीरज अत्री से चर्चा की गई । उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व विभाग अभी भी नेहरू युग की उस विकृत धर्मनिरपेक्षता में जी रहा है, जहां अपनी संस्कृति के मूल्यों से संबंधित प्रत्येक विषय की उपेक्षा की जाती है तथा विदेशी आक्रांताओं के महिमामंडन में योगदान करनेवाली वस्तुओं का पालन-पोषण किया जाता है ।
‘आक्रांता परोपकारी थे’, ऐसा दिखाने हेतु करदाताओं के पैसों का कितना व्यय किया जाता है, यह देखकर यह बात सिद्ध होती है । शासन को अपनी संस्थाओं की ऐसी अनुचित प्राथमिकताओं को रोकने हेतु सक्रिय रहना चाहिए । यदि ऐसा हुआ, तभी वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर प्रस्तुत ‘गुलामी की मानसिकता से मुक्त भारत’ की संकल्पना के अनुरूप होगा ।
संपादकीय भूमिकाअयोध्या में श्रीराममन्दिर हेतु निधि एकत्र की जा रही है, तब ‘सेक्युलरवादी’ यह उपदेश दे रहे थे कि यह पैसा चिकित्सालयों को देना चाहिए । अब वही लोग इस्लामी स्थापत्य को करोड़ों की सहायता देने पर मौन क्यों हैं ? क्या यही उनकी धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा है ? यह चित्र परिवर्तित करने हेतु हिन्दुओं को इस्लामी आक्रांताओं के इस शासकीय महिमामंडन का तीव्र विरोध करना चाहिए ! |
Bengaluru SIR : कर्नाटक में विशेष पुनरावलोकन प्रक्रिया में उजागर हुआ कि बेंगलुरु में ९७ लाख मतदाताओं में से ४ लाख अवैध
TMC Cut Money : बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेता उत्कोच (रिश्वत) के रुपये लोगों को कर रहे हैं वापस !
Delhi Hotel Fire : दिल्ली के होटल में लगी भीषण आग में २१ लोगों की मृत्यु
सर्वोच्च न्यायालय में ५ नए न्यायाधीश, अब एक पद रिक्त !
Grooming Gangs : सांसद ने ब्रिटिश संसद में उपस्थित किया ‘ग्रूमिंग टोली’ का सूत्र
Hanif Sheikh Arrested : संदिग्ध निदा खान को आश्रय देनेवाले घर के मालिक हनीफ शेख को बंदी बनाया गया ।