‘कैग’ की परिधि में लाने की भी मांग

मुंबई – ‘भारतीय क्रिकेट नियामक मंडल’ (‘बीसीसीआई’) को भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग), सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) एवं राष्ट्रीय खेल विकास संहिता (एन.एस.डी.सी.आई.) के अंतर्गत लाया जाए, ऐसी मांग हिन्दू जनजागृति समिति के एक उपक्रम ‘सुराज्य अभियान’ ने केंद्र सरकार से की है । ‘सुराज्य अभियान’ के महाराष्ट्र राज्य समन्वयक श्री. अभिषेक मुरकुटे ने केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को इस संबंध में पत्र लिखा है।

१. भारत सरकार द्वारा वर्षाकालीन सत्र में ‘राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक’ प्रस्तुत करने के निर्णय का ‘सुराज्य अभियान’ ने स्वागत किया है । साथ ही, यह आशा व्यक्त की है कि ‘यह विधेयक भारत के खेल महासंघों में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को सुनिश्चित करनेवाला एक कानूनी ढांचा तैयार करेगा ।’

२. ‘सुराज्य अभियान’ ने भारत सरकार के खेल एवं युवा प्रकरणों के मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को लिखे पत्र में कहा है कि ‘बीसीसीआई’ को भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) के लेखापरीक्षा के अंतर्गत लाया जाए । इसके साथ ही, ‘बीसीसीआई’ को ‘आरटीआई’ के अंतर्गत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ घोषित किया जाए, तथा ‘एन.एस.डी.सी.आई.’ के सभी मानक ‘बीसीसीआई’ के लिए भी अनिवार्य किए जाएं ।
Union Minister Dr. Mansukh Mandaviya introduces The National Sports Governance Bill, 2025 in #LokSabha @mansukhmandviya @ombirlakota @LokSabhaSectt @YASMinistry pic.twitter.com/wf46PA8BHd
— SansadTV (@sansad_tv) July 23, 2025
३. ‘बीसीसीआई’ राष्ट्रीय क्रिकेट टीम का चयन करती है । भारत का प्रतिनिधित्व करती है । शासकीय मैदानों का उपयोग करती है, तथा पुलिस एवं नागरिक सुविधाओं का लाभ लेती है । विदेशों में मैच आयोजित करते समय विदेश मंत्रालय तथा अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय भी स्थापित करती है । ये बातें ‘बीसीसीआई’ के सार्वजनिक स्वरूप को स्पष्ट करती हैं, ऐसा सुराज्य अभियान ने कहा है ।
४. राष्ट्रीय खेल विकास संहिता, २०११ में कार्यकाल की सीमा, खिलाडियों का हित, आर्थिक पारदर्शिता तथा संस्थागत लोकतंत्र के मानक हैं । राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में ‘बीसीसीआई’ पर यह संहिता अनिवार्य करना आवश्यक है ।
५. क्रिकेट भारत में राष्ट्रीय स्तर का खेल है । इसलिए उसका प्रशासन संवैधानिक मूल्यों के अनुसार पारदर्शी, नैतिक एवं कानूनी होना चाहिए, ऐसा सुराज्य अभियान ने कहा है ।
६. इस पत्र की प्रति केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री. अश्विनी वैष्णव को भी भेजी गई है ।
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