‘मुझे बंदी बना लो, अथवा १ हजार परिवाद पंजीकृत करो, मुझे मुठभेड में मार डालो, अथवा मुझे फांसी दो; परंतु गोरक्षा एवं मेरे धर्म की सेवा करने के लिए मेरा जीवन है । उसके लिए मृत्यु भी आ जाए, तो मुझे उसकी चिंता नहीं’, ऐसा कहनेवाले भाजपा के भाग्यनगर (हैदराबाद) के प्रखर धर्माभिमानी विधायक श्री. टी. राजा सिंहजी ! श्री. टी. राजा सिंहजी ने प्राणों की चिंता किए बिना लाखों गायों के प्राण बचाए हैं । वे तेलंगाना के लोकप्रिय हिन्दुत्वनिष्ठ नेता हैं एवं केवल हिन्दुत्व के बल पर भाग्यनगर के गोशामहल विधानसभा क्षेत्र से ३ बार विधायक के रूप में निर्वाचित हुए हैं । वे लव जिहाद, गोहत्या, धर्मांतरण, हिन्दू देवताओं की विडंबना जैसे हिन्दुओं पर होनेवाले विविध आघातों के विरुद्ध प्रखरता से लडते हैं, हिन्दुओं को संगठित करते हैं, साथ ही विविध सभाओं के माध्यम से उनका प्रबोधन भी करते हैं ।
मोहम्मद पैगंबर के विषय में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के प्रकरण में उन्हें ७७ दिन कारागृह में रहना पडा । श्री. राजा सिंहजी ने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए कार्य किया; इसलिए पुलिस ने उन पर १७१ से अधिक अपराध पंजीकृत किए हैं । ‘निरंतर हिन्दुहित का विचार करनेवाले श्री. राजा सिंहजी की हिन्दू धर्म पर अपार श्रद्धा एवं विश्वास है । मुस्लिम बहुसंख्यक भाग्यनगर (हैदराबाद)में रहकर प्रखरता से हिन्दुत्व का कार्य करने के कारण वे संपूर्ण देश के हिन्दुत्वनिष्ठों में ‘टायगर राजा सिंह’ नाम से लोकप्रिय हैं । ‘हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हो’, यही उनका स्वप्न है ।

विशेष सदर

छत्रपति शिवाजी महाराज के हिन्दवी मावले और सैनिकाें का त्याग सर्वोच्च है, ठीक वैसे ही आज भी अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ तथा राष्ट्रप्रेमी नागरिक धर्म-राष्ट्र की रक्षा के लिए ‘सैनिक’ के रूप मे कार्य कर रहे हैं । उनकी तथा उनके हिन्दू धर्म-रक्षण के संघर्ष की जानकारी देने वाले ‘हिन्दुत्व के वीर योद्धा’ इस लेखमाला के द्वारा दूसरों को भी प्रेरणा मिलेगी । इन उदाहरणों से अपने मन की चिंता दूर हो कर उत्साह उत्पन्न होगा ! – संपादक
१. ६ लडकियां एवं एक ही लडका होने पर भी धर्मकार्य के लिए श्री. राजा सिंहजी को माता-पिता का समर्थन
श्री. टी. राजासिंह लोध, अर्थात राजपूत समाज से हैं । उनका परिवार कभी शिल्पकार था । श्री. राजा सिंहजी भी आरंभ में यही कार्य करते थे । पश्चात उन्होंने ‘ऑडियो’ एवं ‘वीडियो’ कैसेट बेचना आरंभ किया । अपनी ६ बहनों सहित वे अपने माता-पिता के एकमात्र पुत्र हैं । माता-पिता के निधन के उपरांत उन पर परिवार का पूर्ण दायित्व आ गया । माता-पिता के जीवित रहते हुए ही एक बार उन्होंने पूरे परिवार को एकत्र कर बताया, ‘‘आक्रामक मुसलमान एवं धर्मपरिवर्तन करनेवाले ईसाई प्रचारकों का विरोध करना ही हमारा कर्तव्य है । यह कार्य हिन्दुत्व का विरोध करनेवाले शासनकर्ताओं को नहीं चाहिए । इसलिए यह कार्य रोकने के लिए राजनीतिक दबाव में आकर पुलिस निरंतर प्रयास करती रहती है । इस कार्य के कारण सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न होता है एवं इसलिए वे हमारा उत्पीडन करते हैं । ऐसे समय में उन्हें क्या करना चाहिए ?’’ उसके उपरांत उनके माता-पिता ने कहा, ‘‘तुम अच्छा कार्य कर रहे हो; इसलिए निर्भीक रहो । तुम्हें हमारा पूर्ण समर्थन है । तुम भाग्यवान हो । प्रत्येक के भाग्य में यह कार्य नहीं आता । पिछले जन्म में तुमने कुछ पुण्य किया होगा; इसलिए तुम्हें यह धर्मकार्य करने को मिल रहा है !’’
२. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं टी. राजा सिंहजी का संबंध
वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथजी एवं टी. राजा सिंहजी में तुलना की जाती है । ‘योगी आदित्यनाथजी उत्तर में एवं श्री. टी. राजा सिंहजी दक्षिण में हिन्दुहृदयसम्राट हैं’, ऐसा हिन्दुत्वनिष्ठों को लगता है । जब श्री. राजा सिंहजी तेलंगाना विधानसभा चुनाव में खडे होते हैं उस समय उनके लिए स्वयं योगी आदित्यनाथजी प्रचार सभाएं लेते हैं । श्री. राजा सिंहजी योगीजी को आदर्श मानते हैं । उन्हें हिन्दुहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरेजी भी प्रिय हैं । उन्होंने अपने कार्यालय में बाळासाहेब ठाकरेजी का छायाचित्र लगाया है ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के प्रति राजा सिंहजी का भाव !

१. गोवा में हुए द्वितीय ‘अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन’ के उपरांत जुलाई २०१३ में सनातन के साधक उनसे मिलने गए थे । उस समय सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के विषय में वे बोले, ‘कभी-कभी मैं विचार करता हूं कि परम पूज्य गुरुदेव के उपरांत हिन्दुत्व का कार्य करने के लिए कोई आएगा, ऐसा नहीं लगता । यह कार्य परम पूज्य गुरुदेवजी ही कर सकते हैं ।’
२. एक कार्यक्रम में श्री. टी. राजा सिंहजी बोले, ‘आपको यदि कलियुग में जीवित रूप में ईश्वर के दर्शन लेने हों, तो वर्तमान में भूतकाल पर स्थित व्यक्ति, अर्थात परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी हैं । जिस प्रकार किसी साधु-संत के दर्शन लेने पर हमें शक्ति मिलने का अनुभव होता है, मुझे परम पूज्य गुरुदेवजी का छायाचित्र देखने पर वैसा ही अनुभव होता है ।’
३. एक बार श्री. टी. राजासिंहजी बोले, ‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की कृपा से ही बडा धर्मकार्य हो रहा है । हम भाग्यवान हैं कि हमें यहां धर्मकार्य करने का अवसर मिल रहा है । हमें हिन्दुओं को धर्मकार्य करने के लिए अधिक समय देना चाहिए ।’
३. टी. राजा सिंहजी का राजनीति में प्रवेश
वर्ष १९९२ में बाबरी ढांचा गिराया गया । तब धर्मांधों ने भारत में दंगे किए । भाग्यनगर अधिक संवेदनशील होने के कारण वहां उसका अधिक प्रभाव पडा । उस समय हिन्दुओं को जागृत करने के लिए श्री. टी. राजा सिंहजी ने अपने सहकर्मियों सहित ‘हिन्दू वाहिनी’ नामक संगठन में सम्मिलित होकर हिन्दुत्व का प्रचार किया । वर्ष २००० से उन्होंने आंध् रप्रदेश में ‘हिन्दू वाहिनी’ संगठन के माध्यम से कार्य आरंभ किया । उस समय उनके भाग के हिन्दू बस्तियों पर मुसलमानों द्वारा अनेक आक्रमण होते थे । उन्होंने एक गुट बनाकर इन आक्रमणों को प्रत्युत्तर देना आरंभ किया ।
उन्होंने धर्मांतर का प्रयास करनेवाले ईसाई धर्मप्रचारकों को भी उनके ही व्यासपीठ पर जाकर विरोध करना आरंभ किया । इसलिए संयुक्त आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाय.एस. राजशेखर रेड्डी (कांग्रेस) की सरकार ने श्री. सिंहजी एवं उनके कार्यकर्ताओं को झूठे आरोप में ६ माह कारागृह में रखा । पुलिस द्वारा श्री. सिंहजी को मुठभेड में मार डालने के भी प्रयास किए गए । कारागृह से बाहर निकलने पर सरकार तथा पुलिस द्वारा उन पर अत्याचार किए जा रहे थे, साथ ही झूठे अपराध पंजीकृत किए जा रहे थे ।
कारागृह से बाहर निकलने पर एक अधिकारी ने उन्हें इस परेशानी से मुक्ति के लिए राजनीति में जाने का परामर्श दिया । वर्ष २००९ में महापालिका के स्थानीय चुनाव होनेवाले थे । इस चुनाव में वे ‘तेलुगु देसम’ पक्ष के टिकट पर (उस समय उन्हें कुछ कारणों से भाजपा का टिकट नहीं मिल सका ।) नगरसेवक के रूप में निर्वाचित हुए एवं यहां से उनकी राजनीति का आरंभ हुआ ।
नगरसेवक होने के उपरांत धर्मकार्य में उनका सहभाग बढ गया । उन्होंने संपूर्ण शक्ति से गोरक्षा का आंदोलन आरंभ किया । उनके हिन्दुत्व के कार्य के कारण उनके क्षेत्र में २-३ बार धार्मिक तनाव उत्पन्न हुआ । चंद्राबाबू नायडू ने उन्हें ‘तेलुगु देसम’ पक्ष छोडकर दूसरे पक्ष में जाने को कहा । उसके अनुसार श्री. टी. राजा सिंहजी ने वर्ष २०१४ में भाजपा में प्रवेश किया । तेलंगाना के पहले ही विधानसभा चुनाव में श्री. राजा सिंहजी विधायक के रूप में निर्वाचित हुए । उनके क्षेत्र में हिन्दू-मुसलमान एकत्र रहते हैं । मुसलमानों के त्योहारों में भी वे सहायता करते हैं । श्री. राजा सिंहजी विधायक होने पर भी स्वयं को पहले हिन्दू समझते हैं । ‘जनता जब तक निर्वाचित करेगी, राजनीति तभी तक है । मुझे हिन्दुत्व के लिए जीना है । मैं धर्म के लिए राजनीति कभी भी छोड सकता हूं । देश एवं धर्म के लिए मैं मरने के लिए भी सिद्ध हूं’, ऐसा उनका कहना है ।
४. धर्मरक्षा सहित विधानसभा क्षेत्र का विकास
टी. राजा सिंहजी पूरा वर्ष हिन्दुत्वरक्षा का कार्य करते हुए भी, अपने क्षेत्र की जनता पर उनका ध्यान रहता है । हिन्दुत्व का कार्य करते हुए उन्होंने विकास कार्यों की अनदेखी नहीं की । गोशामहल में सीवर (ड्रेनेज) एवं सडकों की बडी समस्या थी । वह समस्या हल करते हुए उन्होंने वर्ष २०१४ से २०१८ एवं २०१८ से २०२३ इन ९ वर्षों में गोशामहल में ५०२ करोड रुपए के काम किए ।
५. ईसाई धर्मांतरण के विरुद्ध लडाई
वर्ष २००५ में ईसाई प्रचारकों ने श्री. राजा सिंहजी के घर के निकट हिन्दुओं का धर्मांतरण करना आरंभ किया । एक ईसाई युवक ने उनके पडोस में रहनेवाले एक कार्यकर्ता की बहन को भगाकर उससे बलपूर्वक विवाह कर लिया । श्री. सिंहजी एवं उनके सहकर्मियों द्वारा उसका विरोध करते ही पुलिस ने ८ दिनों तक उन्हें बहुत मारा, साथ ही पुलिस के नियंत्रण में रहते हुए २ पादरियों ने भी उन पर अत्याचार किए । इसलिए उन्होंने छूटकर आने पर उत्पीडन करनेवाले उन दो पादरियों को सबक सिखाया । उसके उपरांत पुलिस ने हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के सभी कार्यकर्ताओं को पकडकर उनकी पिटाई की ।
एक माह के उपरांत श्री. सिंहजी एवं उनके सहकर्मी को पुलिस ने बंदी बना लिया । उसके उपरांत उन्होंने ६ मास कारावास भोगा । हिन्दुत्वनिष्ठ यह परिवाद जीत गए । उसके उपरांत अनेक कार्यकर्ताओं ने उनके अपने कार्यक्षेत्र में कोई ईसाई धर्मप्रचार के लिए आया, तो उसे यथोचित सबक सिखाना आरंभ कर दिया । उसके उपरांत उनके भाग में धर्मांतर के प्रयास पूर्णतः रुक गए ।
६. १ सहस्र धर्मांध कसाईयों के आक्रमण से ग्रामवासियों द्वारा श्री. टी. राजा सिंहजी को बचाना

वर्ष २०११ में श्री. राजा सिंहजी एवं उनके २५ कार्यकर्ताओं पर बहुत बडा आक्रमण हुआ । अनुमानतः १ सहस्र धर्मांध कसाईयों ने श्री. राजा सिंहजी को रास्ते में घेर लिया । वे उन्हें मारनेवाले थे, तब कुछ समझ में आने से पूर्व अचानक निकट के गांव से कुछ लोग लाठियां लेकर आए एवं उन्होंने गोरक्षकों को बचाया ।
७. धर्मप्रबोधन के माध्यम से ४ वर्षों में ५०० प्रखर धर्माभिमानी कार्यकर्ताओं का निर्माण
श्री. राजा सिंहजी ने धर्मरक्षा करते हुए प्रत्येक क्षेत्र के युवकों को निकट कर उनके मन में राष्ट्र-धर्म के प्रति जागृति लाना आरंभ किया । युवकों को ‘हिन्दू’ शब्द का अर्थ क्या है ?’, ‘माथे पर तिलक क्यों लगाना ?’, ‘गोमाता की रक्षा एवं सेवा करने से क्या लाभ होता है ?’, यदि हम ‘ईसाई धर्मप्रचारकों को हिन्दुओं की बस्ती में आने देंगे, तो हमारा भविष्य क्या होगा ?’, ऐसे सूत्र बताए । इसलिए वर्ष २००० से २००४ के काल में उनके पास धर्म के लिए लडनेवाले ५०० कार्यकर्ता सिद्ध हो गए ।
८. टी. राजा सिंहजी को जान से मारने के लिए किए गए प्रयास
अ. श्री. राजा सिंहजी को पाकिस्तान, सऊदी अरब, दुबई से जान से मारने की धमकियां आती हैं । भाग्यनगर से बंदी बनाए गए इसिस के ५ आतंकवादी राजा सिंहजी की हत्या करनेवाले थे । उसके लिए मई २०१६ में उनके घर का ३ बार अवलोकन किया गया, पूछताछ से ऐसा समझ में आया ।
आ. आंध्र प्रदेश के नागपल्ली न्यायालय में भाग्यलक्ष्मी मंदिर के संदर्भ के अभियोग के निमित्त २१.३.२०१४ को श्री. राजा सिंहजी गए थे । इस समय न्यायालय के बाहर धर्मांध मुसलमान से भरी एक इनोवा चार पहिया गाडी संदेहास्पद स्थिति में घूम रही थी । श्री. राजा सिंहजी के कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस को बताने पर पुलिस ने इस गाडी को जांचा । तब उसमें बडी संख्या में तलवारें एवं लोहे की सलाखें मिलीं ।
इ. १८.१०.२०१५ की रात्रि ३ बजे नवरात्रि के कार्यक्रम से घर लौटते समय अज्ञात लोगों ने उनके वाहन पर पथराव किया ।
ई. श्री. राजा सिंहजी महाराष्ट्र के बीड में ८.४.२०१८ को हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित हिन्दू धर्मजागृति सभा में मार्गदर्शन के लिए गए थे । सभा के उपरांत वे पुलिस संरक्षण में अपने चार पहिया वाहन से वापस निकल रहे थे, तब बीड-सोलापुर मार्ग पर सामने से आ रहे एक कंटेनर से उनकी गाडी को टक्कर देकर उन्हें मार डालने का प्रयास किया गया । यह कंटेनर तेलंगाना के धर्मांध का था, पूछताछ में यह सामने आया ।
उ. एक रात्रि ३ बजे पुलिसकर्मी उन्हें मुठभेड में मार डालने के लिए ले गए । उन्हें लेने आया पुलिस अधिकारी धार्मिक वृत्ति का था । ‘सरकार ने आपको मुठभेड में मार डालने के आदेश दिए, आपने क्या किया ?’, ऐसा अधिकारी ने पूछा । राजा सिंहजी द्वारा अपना काम समझाकर बताने पर अधिकारी ने वह अपराध नहीं था, ऐसा बताया । प्रसार माध्यमों में मुठभेड के समाचार प्रसारित होने पर मुठभेड का निर्णय रद्द कर दिया ।
९. राजा सिंहजी ने अपनी पत्नी एवं पुत्र को भी देश एवं धर्म के कार्य के लिए सिद्ध किया है
श्री. राजा सिंहजी की पत्नी श्रीमती उषा सिंहजी भी हिन्दुत्वनिष्ठ हैं । राष्ट्र-धर्म के लिए वे स्वयं व्यस्त रहते समय अपनी पत्नी को भी धर्मकार्य के लिए सिद्ध करते हैं । महिलाओं पर अत्याचार रोकने के लिए उन्होंने पत्नी को सक्षम करने की हिन्दू जनजागृति समिति के कार्यकर्ताओं से विनती की । ‘देश में धर्म टिका, तभी अपना घर टिकेगा । धर्म नहीं होगा, तो घर पर बैठकर क्या करेंगे ?’, ऐसा उन्हें लगता है । इसलिए वे भी धर्मकार्य में सम्मिलित रहती हैं । उनके पति कट्टर हिन्दुत्वनिष्ठ हैं, इसका उन्हें अभिमान है । श्री. राजा सिंहजी अपने बेटों पर भी धार्मिक संस्कार हों, इसके लिए प्रयासरत हैं । परिणामतः उनका बेटा कु. चंद्रशेखर सिंह भी भारत में हिन्दू राष्ट्र लाने के लिए योगदान देने को तैयार हो रहा है ।
राजा सिंहजी के फेसबुक एवं इंस्टाग्राम पृष्ठों पर प्रतिबंध !

श्री. राजा सिंहजी के कथित आपत्तिजनक भाषणों के कारण फेसबुक एवं इंस्टाग्राम सामाजिक माध्यमों ने वर्ष २०२० में उनके पृष्ठों एवं खातों पर प्रतिबंध लगा दिया है ।
१०. ‘श्रीराम चैनल’ वाहिनी का आरंभ
वर्ष २०१० की हनुमान जयंती को उन्होंने बडी शोभायात्रा निकालने का निश्चय किया । उसी अवधि में मुसलमानों ने भाग्यनगर के बडे हनुमान मंदिर पर आक्रमण कर पथराव किया । उसका प्रतिकार करने के लिए हिन्दू युवक एकत्र आने पर स्थानीय ‘फोर टीवी’ नामक समाचारवाहिनी ने हिन्दुओं के विरुद्ध दुष्प्रचार कर मुसलमानों को उकसाया । इसलिए बडे स्तर पर मुसलमानों ने एकत्र आकर हिन्दुओं के मंदिरों, दुकानों, गोशालाओं आदि पर आक्रमण किए । इस दंगे का भी ‘फोर टीवी’ सहित अन्य स्थानीय समाचारवाहिनियों ने हिन्दुओं के विरुद्ध झूठा प्रचार किया । उसके उपरांत ‘हिन्दुओं की भी एक वाहिनी होनी चाहिए’, यह ध्यान में लेकर बडे प्रयास से ‘श्रीराम चैनल’ नामक वाहिनी आरंभ की ।
भाग्यनगर में श्रीराम शोभायात्रा का भव्य आयोजन

वर्ष २०१० से मुसलमानों ने अपना त्योहार ‘मिलाद-उन-नबी’ त्योहार अत्यंत बडे स्तर पर मनाना आरंभ किया । प्रत्येक गली, चौक एवं सडकों पर हरे झंडे लगाना, ‘अल्ला हू अकबर’ के जयघोष करते हुए फेरियां निकालना, तिलक लगाकर जानेवाले हिन्दुओं पर आक्रमण करना, मंदिरों की तोडफोड करना, ऐसे प्रकरण आरंभ हो गए । ५ दिन तत्कालीन पुलिस आयुक्तों की मूक सम्मति से यह स्वैराचार जारी था । इसलिए श्री. राजा सिंहजी ने श्रीराम की प्रतिमा बनाकर रामनवमी के दिन फेरी निकाली । इस फेरी में १ लाख से अधिक कार्यकर्ता सम्मिलित हुए । उसके उपरांत पुलिस ने श्री. राजा सिंहजी एवं उनके कार्यकर्ताओं पर अपराध पंजीकृत किया एवं उन्हें ४५ दिनों का कारावास हुआ । वर्ष २०१४ में भी श्री. राजा सिंहजी द्वारा आयोजित शोभायात्रा में ढाई लाख हिन्दुओं ने सहभाग लिया था । प्रशासन द्वारा समाधान के रूप में इस शोभायात्रा के मार्ग पर स्थित मस्जिद को ढंककर रखा जाता है ।
जेजुरी में रसायनयुक्त भंडारे (हल्दी) के विक्रय के विरुद्ध भाजपा विधायक विक्रम पाचपुते आक्रामक !
Wipro Corporate Jihad : आरोपी शाहिना रफीक को जांच के लिए पुणे बुलाया गया ।
TMC Kolkata Mayor : कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के महापौर फिरहाद हकीम का त्यागपत्र (इस्तीफा) ।
Islam Friendly Gym : केरल में ‘इस्लाम-फ्रेंडली’ व्यायामशाला को लेकर विवाद
Pune Corporate Jihad : बीमा प्रतिष्ठान के मुसलमान प्रबंधक द्वारा हिन्दू युवती का उत्पीडन !
Karnataka Muslim : यदि राज्य में मुसलमानों को ५ मंत्री पद नहीं दिए गए, तो हम अपनी ताकत दिखाएंगे ।