
पुणे – सेना के रूप में हमें हानि और असफलता से कष्ट नहीं होता । हमें अपनी त्रुटियों को समझना चाहिए और उन्हें सुधारना चाहिए । युद्ध में हानि की तुलना में परिणाम अधिक महत्वपूर्ण होता है, ऐसा वक्तव्य भारत के तीनों सैन्य बलों के प्रमुख (सीडीएस – चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ) जनरल अनिल चौहान ने किया । वे पुणे विश्वविद्यालय में ‘भविष्य का युद्ध और युद्धकला’ विषय पर व्याख्यान देते समय बोल रहे थे । उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान को भारत में आतंककारी गतिविधियाँ नहीं करनी चाहिएं । ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के पीछे का मूल विचार पाकिस्तान से होने वाले शासन प्रायोजित आतंकवाद को समाप्त करना था ।
अनिल चौहान द्वारा प्रस्तुत प्रमुख सूत्र :
१. पहलगाम में जो घटित हुआ, वह अमानवीय था । परिवार के सदस्यों की आंखों के सामने गोली मारकर हत्या की गई । उन्हें धर्म के नाम पर मारा गया । भारत सर्वाधिक आतंककारी घटनाओं का शिकार बना है । अब तक लगभग २० सहस्र लोग आतंकवादी आक्रमणों में मारे गए हैं । (ऐसी स्थिति में भी भारत ने पिछले ३५ वर्षों में इस आतंकवाद को मूलसहित नष्ट करने हेतु कुछ भी नहीं किया, यह अब तक के समस्त शासकों के लिए लज्जास्पद है । – संपादक)
२. दोनों राष्ट्रों (भारत और पाकिस्तान) ने भिन्न-भिन्न प्रकार की क्षमताओं के निर्माण का प्रयास किया था, जिससे संकट की संभावना स्पष्ट थी । संघर्ष के समय सदैव ही जोखिम होती है ; अगर आप जोखिम नहीं उठाते, तो आप सफल नहीं हो सकते, ऐसा कहा जाता है ।
३. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ युद्ध रणनीति का एक उदाहरण था । इसी समय युद्ध और राजनीति समानान्तर रूप से चल रहे थे ।
४. आतंकवादी अड्डों को भारत द्वारा लक्षित करने के पश्चात् ५ मिनटों में पाकिस्तान को इसकी सूचना दे दी गई थी । पाकिस्तान को दूरभाष द्वारा कहा गया – ‘अगर तुम प्रत्युत्तर में आक्रमण करोगे, तो अगली बार इससे कहीं अधिक क्षमता से उत्तर दिया जाएगा । हमारे पास पाकिस्तान की तुलना में कई गुना अधिक घातक शस्त्र हैं ।’ भारत का लक्ष्य केवल आतंकवादियों का समूल नाश करना ही था ।
५. भारत ने पाकिस्तान के ड्रोन और प्रक्षेपास्त्रों के आक्रमणों को विफल किया । हमें ज्ञात था कि हमारे पास उत्तम ड्रोन विरोधी प्रणाली है ; किंतु जितनी हमारी क्षमता थी, उतनी युद्ध के क्षेत्र में प्रयुक्त नहीं की गई ।
६. आज का युद्ध केवल पारम्परिक शक्ति के प्रयोग तक सीमित नहीं है, अपितु वह विविध राजनैतिक, सूचना-प्रधान, सैन्य और आर्थिक साधनों द्वारा राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने की प्रक्रिया है ।
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