डॉक्टर, मेरा मासिक धर्म अभी आरंभ नहीं हुआ है !

मासिक धर्म (पीरियड्स) आरंभ हुआ ? मासिक धर्म आरंभ हुआ यानी ‘गर्भधारण नहीं हुआ’ । हम स्त्रीरोग विशेषज्ञों की ‘ओपीडी’ (बाह्य रोगी विभाग) निरंतर इन दो सूत्रों के आस-पास घूमती रहती है । इन दोनों प्रश्नों के उत्तर स्त्रियों के कष्ट का कारण बन सकते हैं । स्त्री का शरीर एवं मन संपूर्णरूप से ‘हॉर्माेन्स’ के (संप्रेरक के) ताल पर नाचता रहता है । इसलिए समय पर मासिक धर्म आने की प्रक्रिया शारीरिक एवं मानसिक संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है ।

१. मासिक धर्म न आने के कारण तथा उसके समाधान

पहले हम मासिक धर्म न आने के विषय में देखेंगे । लडकियों के युवावस्था में आने पर उनके शरीर में विभिन्न परिवर्तन आने लगते हैं तथा इसी में मासिक धर्म आरंभ होता है । किसी लडकी का मासिक धर्म १५ वें वर्ष तक आरंभ नहीं हुआ, तो उसे ‘असाधारण’ माना जाता है । ऐसे समय में संबंधित लडकी के सभी परीक्षण कर उसके मासिक धर्म न आने के कारण खोजना आवश्यक हो जाता है ।

मासिक धर्म आरंभ न होने के पीछे का कारण प्रजनन तंत्र में स्थित कोई जन्मजात दोष हो सकता है । कभी-कभी कोई जनुकीय समस्याएं भी हो सकती हैं । इनमें से कुछ समस्याओं के लिए चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध होते हैं, जबकि कुछ समस्याओं के संदर्भ में कुछ विशेष किया नहीं जा सकता ।

इन समस्याओं में योनिमार्ग का मुख (योनिपटल) संपूर्णरूप से बंद होना एक समस्या हो सकती है । ऐसी लडकियों को मासिक धर्म आया है, यह ध्यान में ही नहीं आता; परंतु महीने में कुछ दिन तक पेट में बहुत पीडा होती है । ‘सोनोग्राफी’ तथा योनिमार्ग की जांच करने पर यह समस्या तुरंत ध्यान में आ सकती है । ऐसा होने पर पीडित लडकी को मूर्छित कर योनिमार्ग के मुख पर छोटा सा छेद किया जाता है । उसके कारण अंदर संग्रहित रक्त बाहर निकलकर ऐसी लडकियों का प्रजनन तंत्र पुनः एक बार यथावत हो सकता है; परंतु समय पर इसका निदान होना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है ।

डॉ. शिल्पा चिटणीस-जोशी

२. मासिक धर्म का आना आरंभ न होने में ‘टर्नर सिंड्रोम’ एवं ‘हॉर्माेन्स’ की महत्त्वपूर्ण भूमिका !

किसी भी जीव का जन्म होते समय यदि प्रकृति के पासे गलत पड जाते हैं, तो उससे विभिन्न जनुकीय दोष उत्पन्न हो सकते हैं । ‘टर्नर सिंड्रोम’ ऐसा ही एक प्रकार है । स्त्रियों की जनुकीय रचना में ‘XX’ ऐसे दो गुणसूत्र (क्रोमोजोम्स) होते हैं; परंतु ‘टर्नर सिंड्रोम’ से पीडित स्त्रियों में एक ही X गुणसूत्र (क्रोमोजोम्स) होता है । उसके कारण उनका शारीरिक विकास उचित ढंग से नहीं होता, साथ ही उनमें ‘हॉर्माेन्स’ का स्तर अल्प होने के कारण मासिक धर्म आने में बहुत विलंब होना अथवा मासिक धर्म आना आरंभ ही नहीं होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं । ऐसी लडकियों का कद बहुत छोटा, संकरी चौडी गर्दन, नीचे की ओर झुके हुए कान, चौडी छाती, कोने से थोडे बाहर मुडे हाथ, तालू का भिन्न आकार, छोटे तथा बाहर मुडे नाखून इत्यादि लक्षण दिखाई देते हैं । समय रहते इसका उपचार होने पर इन लडकियों को ‘हॉर्माेन्स’ का डोज देकर उनमें मासिक धर्म आरंभ किया जा सकता है  । ऐसी लडकियों में संतानहीनता होने की संभावना अधिक होती है; परंतु कभी-कभी आधुनिक चिकित्सा उपचारों से उन्हें मातृत्व भी प्राप्त हो सकता है ।

३. मासिक धर्म अनियमित हो, तो उसके लिए चिकित्सकीय सुझाव लेना आवश्यक !

मासिक धर्म आरंभ होने के उपरांत कुछ वर्षाें तक उसका अनियमित होना स्वाभाविक है; परंतु मासिक धर्म यदि समय पर न आए तथा लडकी का वजन बढता जाए, तो उसके लिए स्त्रीरोग विशेषज्ञ से सुझाव लेना आवश्यक है । यह ‘पीसीओडी’ का (‘पॉलिसिस्टिक ओवरियन डिसीज’ का) आरंभ हो सकता है, साथ ही मासिक धर्म बंद होने का समय आता है, तो वह आगे-आगे जाने लगता है तथा रक्त का बहाव अल्प होने लगता है । ‘मोनोपॉज’ के काल में रक्त का बहाव अधिक दिन तक होना अथवा अधिक मात्रा में होना सामान्य बात नहीं है । इसके लिए स्त्रीरोग विशेषज्ञ से तुरंत सुझाव लेना आवश्यक है ।

स्त्रियों में मासिक धर्म रुकने का पहला कारण गर्भधारण ही होता है; परंतु बदलती हुई जीवनशैली के कारण विभिन्न कारणों से मासिक धर्म से संबंधित समस्याएं बढ रही हैं । कभी किसी महीने में किसी कारणवश मानसिक तनाव अधिक हो, तो मासिक धर्म आगे जा सकता है; परंतु बार-बार ऐसा होना उचित नहीं है । स्त्रीबीज बनने की प्रक्रिया प्रत्येक मासिक धर्म के चक्र में अंतर्भूत होती है । अतः किसी महीने में स्त्रीबीज तैयार नहीं हुआ, तो मासिक धर्म आगे जा सकता है । इसी के परिणामस्वरूप अंडाशय पर (ओवरी पर) पानी के गुब्बारे जैसी गांठें तैयार हो जाती हैं । उससे और ‘हॉर्माेन्स’ उत्पन्न होकर मासिक धर्म और आगे जाने लगता है । ‘सोनोग्राफी’ से तुरंत उसका निदान होता है । मासिक धर्म आने की गोलियां देने पर ‘हॉर्माेन्स’ का स्तर अल्प होकर मासिक धर्म आता है तथा अंडाशय की गांठ छोटी होने लगती है ।

४. मासिक धर्म नियमित आए; इसके लिए स्त्रियों को सभी स्तर पर प्रयास करने आवश्यक !

कोई भी शारीरिक परिश्रम न करना तथा आहार पर नियंत्रण न होने के फलस्वरूप वजन बढकर उससे मासिक धर्म अनियमित आने लगता है । मासिक धर्म अनियमित होने पर वजन अधिक बढता है । इस दुष्चक्र को रोकने हेतु नियमित व्यायाम तथा आहार में अंतर्भूत कार्बोहाइड्रेट (चावल, आलू, चीनी, मैदा एवं तेल) का सेवन अल्प करना आवश्यक है । ‘थाइरॉइड’ एवं ‘प्रोलैक्टिन’, इन दो हॉर्माेन्स के असंतुलन के कारण मासिक धर्म की समस्याएं उत्पन्न होती हैं । ‘हाइपोथाइरॉइडिज्म’ की समस्या हो, तो बिना उचित उपचार लिए चाहे कितने भी प्रयास किए जाएं, किंतु वजन अल्प नहीं होता तथा मासिक धर्म की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता । एक नियमित गोली से स्त्रियों का स्वास्थ्य यथावत हो सकता है । अतः बिना किसी कारण थाइरॉइड का हौवा खडा न करें । मासिक धर्म के अनियमित आने के और भी अनेक कारण हैं । उन सभी कारणों को यहां विस्तार से बताना कठिन है ।

इसका सारांश यह कि अनियमित मासिक धर्म नियमित हो; इसके लिए स्त्रियों को सभी स्तर पर प्रयास करना अत्यंत आवश्यक है । घर की स्त्री पर ही पूरे घर का ‘मूड’ निर्भर होता है; इसलिए उनका ध्यान रखा जाना ही चाहिए ।’

– डॉ. शिल्पा चिटणीस-जोशी, स्त्रीरोग एवं संतानहीनता विशेषज्ञ, कोथरूड, पुणे, महाराष्ट्र.