दावा है कि ये कब्रें राष्ट्रीय स्मारकों के अंतर्गत नहीं आती !
मुंबई – खुलताबाद में औरंगजेब की कब्र राष्ट्रीय स्मारक के अंतर्गत नहीं आती । इसलिए सूचना के अधिकार कार्यकर्ता केतन तिरोडकर द्वारा मुंबई उच्च न्यायालय में एक याचिका प्रविष्ट की गई है, जिसमें मांग की गई है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को इसे हटाने का आदेश दिया जाए । इसके उपरांत याचिकाकर्ता ने मांग की है कि सरकार को भाग्यनगर (हैदराबाद) के निजाम आसफ जाह प्रथम और दरगाह में औरंगजेब के बेटे और बेटी की अन्य कब्रों को भी ध्वस्त करने के लिए आवश्यक प्रयास करने के आदेश दिए जाए ।
याचिका में महत्त्वपूर्ण सूत्र !
१. औरंगजेब का शासनकाल भारतीय इतिहास का एक काला पन्ना है । इस कार्यकाल में हिन्दू महिलाओं पर अत्याचार किए गए और हिन्दू मंदिरों को नष्ट कर दिया गया ।
२. अगली पीढी के लिए इस कब्र से विरासत के रूप में लेने या सीखने के लिए कुछ भी नहीं है। इसलिए इस कब्र को ऐतिहासिक धरोहर भवन अथवा राष्ट्रीय स्मारकों की सूची से हटा दिया जाए ।
३. औरंगजेब सहित इन व्यक्तियों का भारतीय इतिहास में कोई राष्ट्रीय महत्त्व नहीं है और भारतीय समाज पर इनका कोई महत्त्वपूर्ण प्रभाव नहीं है ।
संपादकीय भूमिकामूलतः हिन्दुओं की अपेक्षा है कि ऐसी मांग ही न करनी पडे, सरकार ही कार्यवाही करे ! |

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