पुणे में तृतीय विश्व मराठी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन !

पुणे, ३१ जनवरी (वार्ता) – स्वातंत्र्यवीर सावरकर के बिना मराठी का विचार हम कर ही नहीं सकते। सावरकर ने मराठी के लिए जो प्रेम, शब्दकोश और समृद्धि दी, वही मराठी की सुंदरता है। इस साहित्य सम्मेलन को लेकर कई विवाद उत्पन्न हुए। विवाद और प्रतिवाद होना आवश्यक है। मराठी व्यक्ति को बहस करना पसंद है, क्योंकि इससे वैचारिक मंथन होता है, ऐसा प्रतिपादन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया। वे फर्ग्युसन महाविद्यालय के मैदान में आयोजित तृतीय विश्व मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। यह सम्मेलन ३१ जनवरी से २ फरवरी तक चलेगा।
उन्होंने कहा:
१. आज हर जगह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की चर्चा है। इसका उपयोग करके मराठी का प्रचार और प्रसार करना चाहिए। एआई के युग में यदि हम ‘स्मॉल लैंग्वेज मॉडल’ में सभी साहित्यकारों की रचनाएं डालें, तो आने वाली पीढ़ी को यह समझ में आएगा कि साहित्यकारों ने क्या योगदान दिया।
२. पुणे विद्या का केंद्र और सांस्कृतिक राजधानी है। पुणे की मराठी भाषा को मानक माना जाता है। मराठी भाषा को ‘अभिजात दर्जा’ मिलने के बाद यह पहला साहित्य सम्मेलन है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा:
“हम मराठी के कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते हैं। हम भाषा के कार्यकर्ता हैं। मराठी व्यक्ति जहां भी होता है, वहां दूध में शक्कर की तरह घुलकर काम करता है।”
उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा:
“मराठी भाषा अब महाराष्ट्र की सीमाओं तक सीमित नहीं है। यह पूरी दुनिया में फैली हुई है। मराठी व्यक्ति कभी भी संकट से डरने वाला नहीं है। सरकार के रूप में हम कर्नाटक और दिल्ली के मराठी स्कूलों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रहे हैं।”
विशेष तथ्य:
१. वरिष्ठ साहित्यकार मधु मंगेश कर्णिक (९३ वर्ष) को पहला ‘साहित्यभूषण पुरस्कार’ प्रदान किया गया।
२. दुनिया के २५ देशों के मराठी प्रेमी इस सम्मेलन में शामिल हुए।
३. दुनिया के २५ देशों में मराठी की २५ ब्रह्ममंडल संस्थाएँ स्थापित हो चुकी हैं।
४. अगले ५ वर्षों में यह मराठी साहित्य सम्मेलन विदेश में आयोजित करने का संकल्प लिया गया। विदेश में भी मराठी का डंका बजाने का निश्चय किया गया।
विशेष आकर्षण:मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सनातन संस्था की ओर से ग्रंथ भेंट !साहित्य सम्मेलन स्थल पर मराठी भाषा से संबंधित विभिन्न विषयों पर आधारित ग्रंथों और पुस्तकों की बिक्री के लिए दुकानें लगाई गई हैं। सनातन संस्था की ओर से धर्म, अध्यात्म, साधना और हिंदू राष्ट्र से संबंधित ग्रंथों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री अजित पवार और उद्योग व मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने इस प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान सनातन संस्था की ओर से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ‘सण साजरे करने की पद्धतियां ’, ‘धर्म शिक्षा फलक’ और ‘हिंदू राष्ट्र क्यों चाहिए?’ ये तीन ग्रंथ भेंट किए गए। |