‘वर्ष २००२ में घटस्थापना के शुभ मुहूर्त पर हिन्दू जनजागृति समिति की स्थापना हुई । कोरोना महामारी का काल छोडा जाए, तो प्रत्यक्ष स्तर पर कार्य करने में हिन्दू जनजागृति समिति सदैव आगे होती है । कोरोना महामारी की आपदा में भी घर में बैठे प्रत्येक हिन्दू के हृदय में हिन्दू राष्ट्र की ज्योति का एक मशाल में रूपांतरण करने के लिए तथा हिन्दुओं को क्रियाशील बनाए रखने के लिए समिति ने अनुआई की; इसीलिए कोरोना महामारी से पूर्व जो उपक्रम समाज में प्रत्यक्षरूप से चल रहे थे, उन्हीं उपक्रमों को समिति ने ‘ऑनलाइन’ माध्यमों से जारी रखने का प्रयास किया । इसकी दृश्य रूप में फलोत्पत्ति कोरोना की आपदा के उपरांत दिखाई देने लगी है । कोरोना की आपदा के उपरांत हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु हिन्दुओं को क्रियाशील बनानेवाली ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ के वृद्धिंगत दैवी कार्य का आलेख विशद करनेवाला यह लेख ! पिछले लेख में हमने ‘कोरोना महामारी के काल में आरंभ किए अभिनव ‘ऑनलाइन’ उपक्रम तथा हरिद्वार के कुंभ पर्व में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के कार्य’ के विषय में पढा । इस लेख में हम उस लेख की अगली कडी दे रहे हैं । (भाग ३)

८ आ. औरंगाबाद जिले का नामकरण छत्रपति संभाजीनगर करने के समर्थन में आयोजित मोर्चा में ७५ सहस्र हिन्दुओं का उपस्थित रहना : औरंगाबाद जिले का नामकरण ‘छत्रपति संभाजीनगर’ किए जाने के उपरांत कुछ राजनीति दलों तथा धर्मांधों ने इसका विरोध किया । उसके कारण ‘छत्रपति संभाजीनगर’ नामकरण के समर्थन में हिन्दू जनजागृति समिति तथा स्थानीय हिन्दू संगठनों के तत्त्वावधान में मोर्चा निकाला गया, जिसमें ७५ सहस्र हिन्दुओं का उपस्थित रहना एक इतिहास बन गया !
८ इ. महाराष्ट्र गढ-किले रक्षा समिति की स्थापना : मार्च २०२२ में मुंबई में महाराष्ट्र के गढ-किलों की रक्षा हेतु ‘महाराष्ट्र गढ-किले रक्षा समिति’ की स्थापना की गई । गढ-किलों की रक्षा की मांग हेतु निकाले गए राज्यव्यापी मोर्चा में पूरे महाराष्ट्र के ९५ से अधिक गढ-किला प्रेमी तथा हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन सम्मिलित हुए । इस मोर्चे में छत्रपति शिवाजी महाराज के गढ-किलों पर किए अतिक्रमण हटाए जाएं, गढ-किलों को अतिक्रमणमुक्त बनाया जाए तथा विद्यालयीन पाठ्यक्रम में गढ-किलों की जानकारी का समावेश किया जाए’ आदि विभिन्न मांगें की गईं ।
इस आंदोलन के समय कैबिनेट मंत्री श्री. मंगल प्रभात लोढा ने आंदोलन स्थल पर आकर इस संबंध में कृति का आश्वासन दिया । इसमें विभिन्न किला प्रेमी संगठन तथा शिवप्रेमी संगठन हिन्दू जनजागृति समिति के प्रति विश्वास रखकर आंदोलन में सम्मिलित थे । पूरे राज्य में इस मोर्चा को बडी प्रसिद्धि मिली । इस माध्यम से समाज में गढ-किले की रक्षा का संदेश पहुंचा ।
८ ई. ‘सेव कल्चर सेव भारत’ (संस्कृति बचाएं, भारत बचाएं) अभियान में सक्रिय सहभाग ! : पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त श्री. उदय माहुरकर ने ‘फिल्म तथा वेब सीरिज के माध्यम से प्रसारित अनैतिकता तथा अश्लीलता के विरुद्ध राष्ट्रव्यापी ‘सेव कल्चर सेव भारत’ अभियान आरंभ किया है । ‘भावी पीढी को अपनी धर्म-संस्कृति का महत्त्व ध्यान में आए तथा उससे इस पीढी का पतन रुके’, इस उदात्त उद्देश्य से समिति भी इस अभियान में सक्रिय है । महाविद्यालय के युवक-युवतियों तथा शिक्षकों ने इस अभियान का उत्स्फूर्त प्रत्युत्तर दिया ।
८ उ. महत्त्वपूर्ण विषयों पर आधारित ‘ट्विटर ट्रेंड’ (ट्विटर पर कराई जानेवाली चर्चा) आगे : हिन्दू जनजागृति समिति के फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम एवं वॉट्सएप, इन सभी समाजमाध्यमों से बडे स्तर पर जनजागरण तथा धर्मप्रसार किया जाने लगा । वर्तमान में हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से जब भी किसी महत्त्वपूर्ण विषय पर ‘ट्विटर ट्रेंड’ (ट्विटर पर कराई जानेवाली चर्चा) चलाया जाता है, तब सभी के सामूहिक प्रयासों के कारण बडी सहजता से वह पूरे देश में ‘पहले ५’ में आता है तथा लाखों लोगों तक उसकी जानकारी पहुंचती है ।

८ ऊ. तुळजापुर मंदिर घोटाला प्रकरण में समिति की लडाई : महाराष्ट्र की इष्टदेवी श्री तुळजा भवानीमाता मंदिर का सरकारीकरण हुआ है । वर्ष १९९१ से २००९ तक इस मंदिर में सिंहासन दानपेटी की नीलामी में बडा घोटाला हुआ था । श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित १२० किलो सोना, ४८० किलो चांदी, २४० करोड की नकद धनराशि तथा अन्य अर्पण सामग्री आदि का घोटाला प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, न्यासियों तथा नीलामीकर्ताओं की मिलीभगत से किया गया था । विधानसभा में इस भ्रष्टाचार पर चर्चा कर जांच का ब्योरा मांगने का निर्णय हुआ । इस जांच ब्योरे के अनुसार दानपेटी नीलामी में ८ करोड ४५ लाख ९७ सहस्र रुपए का घोटाला हुआ है, तथा उसमें दोषियों के रूप में ९ नीलामीकर्ताओं, ५ तहसीलदारों, १ लेखापरीक्षक तथा १ धार्मिक सहव्यवस्थापक पर आरोप लगाया गया है, साथ ही मुंबई उच्च न्यायालय के संभाजीनगर खंडपीठ ने उनपर अपराध पंजीकृत करने की महत्त्वपूर्ण अनुशंसा की थी ।
ऐसा होते हुए भी महाराष्ट्र सरकार ने इन सभी दोषियों पर एफ.आई.आर. पंजीकृत कर उन्हें बंदी नहीं बनाया था; इसीलिए समिति ने न्यायालय में याचिका प्रविष्ट की । ९ मई २०२४ को मुंबई उच्च न्यायालय ने इस संदर्भ में ‘दोषियों पर तत्काल अपराध पंजीकृत किए जाएं, साथ ही पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों के माध्यम से यह जांच करने’ का आदेश दिया ।
सरकारीकृत शिरडी संस्थान, सिद्धिविनायक मंदिर (मुंबई), पंढरपुर देवस्थान, साथ ही पश्चिम महाराष्ट्र देवस्थान समिति के अंतर्गत आनेवाले श्री महालक्ष्मी देवस्थान (कोल्हापुर) में सरकारीकरण के कारण हो रहे भ्रष्टाचार के विरुद्ध समिति आज भी आंदोलन, पत्रकार वार्ताएं आदि माध्यम से लोकतांत्रिक पद्धति से लडाई लड रही है । इसके कारण मंदिर सरकारीकरण के दुष्परिणामों के प्रति समाज में जागृति आई है ।
८ ए. सनातन धर्मरक्षक अभियान : ‘सनातन धर्मरक्षक अभियान’ के अंतर्गत महाराष्ट्र, गोवा एवं कर्नाटक, इन राज्यों में ‘मैं सनातन धर्मरक्षक’ अभियान चलाया गया । नास्तिकतावादी, आधुनिकतावादी, हिन्दू विरोधी लोग आदि के द्वारा सनातन धर्म पर आघात किए जाते हैं । कुछ माह पूर्व तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टैलिन, राष्ट्रवादी कांग्रेस शरद पवार दल के जितेंद्र आव्हाड, साथ ही पत्रकार निखिल वागळे आदि ने ‘सनातन धर्म बीमारी जैसा है; सनातन धर्म ‘एच.आई.वी.’ (एड्स) से भी भयानक है; सनातन धर्म तो देश को ग्रसित कीडा है’, इस प्रकार के वक्तव्य दिए । इन वक्तव्यों का अपेक्षित विरोध नहीं हुआ । इस पृष्ठभूमि पर हिन्दुओं में ऐसे वक्तव्यों का विरोध करने का आत्मविश्वास उत्पन्न हो, साथ ही सनातन धर्म विरोधी वक्तव्य करनेवालों के विरुद्ध कार्यवाही हो; इसके लिए ‘सनातन धर्मरक्षक अभियान’ चलाया गया । इस अभियान के अंतर्गत लगभग २५० से अधिक व्याख्यान लिए गए । उनमें १० सहस्र से अधिक लोग सहभागी थे । इस अभियान के कारण जो जनजागरण हुआ, उसके कारण धर्म विरोधी वक्तव्य करनेवालों के विरुद्ध १०० से अधिक शिकायतें पंजीकृत की गईं ।
९. समविचारी संगठनों द्वारा हिन्दू जनजागृति समिति की ‘हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभाओं का’ आयोजन करना
वर्ष २००८ से ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभाओं का आयोजन कर रही है । आज तक १३ राज्यों में २२२६ हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभाएं आयोजित की जा चुकी हैं । इस माध्यम से २२ लाख से अधिक हिन्दुओं में जागृति आई है । इन सभाओं में किसी राजनीतिक व्यक्ति अथवा लोकप्रिय कलाकार के न होते हुए भी केवल ५ सहस्र धर्मप्रेमियों की उपस्थिति से लेकर २५ सहस्र धर्मप्रेमियों की उपस्थिति तो केवल ईश्वर की ही कृपा है । वर्ष २०२३ से समविचारी संगठनों ने स्वप्रेरणा से इस प्रकार की सभाओं का आयोजन आरंभ किया है । इस वर्ष हुपरी (जिला कोल्हापुर, महाराष्ट्र) में संपन्न सभा में १४ सहस्र से अधिक धर्मप्रेमी उपस्थित थे । संभाजीनगर जिले के बिडकीन में संपन्न धर्मसभा का स्थानीय धर्मप्रेमियों तथा हिन्दुत्वनिष्ठों ने आयोजन किया था । उस सभा में भी १५ सहस्र ५०० से अधिक धर्मप्रेमी उपस्थित थे । जळगांव जिले के चोपडा में हिन्दुत्वनिष्ठों द्वारा आयोजित धर्मजागृति सभा में १४ सहस्र से अधिक धर्मप्रेमी उपस्थित थे । कुल मिलाकर धर्मसभाओं का यह कार्य उत्तरोत्तर बढ रहा है तथा उससे हिन्दू राष्ट्र के विचार रखनेवाले समर्थक बढते जा रहे हैं । इससे ‘हिन्दू राष्ट्र की स्थापना अब दूर नहीं है’, यह स्पष्ट हो रहा है ।
९ अ. बडी सभाओं की भांति छोटे गांवों में भी अच्छा प्रत्युत्तर प्राप्त होना : जिस प्रकार बडी धर्मसभाओं का प्रत्युत्तर मिलता है, उसी प्रकार से छोटे-छोटे गांवों में आयोजित की जानेवाली ‘हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभाओं’ का भी उत्स्फूर्त प्रत्युत्तर मिलता है । इन सभाओं के आयोजन में पूरा गांव ही सम्मिलित होता है । संबंधित गांव के युवक उनके गांव की धर्मसभा के आयोजन में प्राथमिकता लेते हैं तथा उसके उपरांत उन गांवों में धर्मशिक्षावर्ग, स्वरक्षावर्ग तथा समिति की शाखाएं आरंभ होती हैं । गांव के अनेक युवक राष्ट्र-धर्म के कार्य के लिए सक्रिय हो जाते हैं । उसके कारण पूरा गांव ही हिन्दुत्व के कार्य में जुड जाता है तथा हिन्दुत्व के आंदोलन में उनका सहयोग बढता है । एक सभा से अनेक सभाओं की मांगें आती हैं तथा समिति के संपर्क में आनेवाले समाज के अनेक धर्मप्रेमी इन सभाओं का सफलतापूर्वक आयोजन करते हैं ।
(क्रमशः)
– श्री. सुनील घनवट, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संगठक, हिन्दू जनजागृति समिति


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