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( मजार का अर्थ है इस्लामी पीर या फकीर की कब्र )

मुंबई – ‘वक्फ बोर्ड’ संशोधन विधेयक लाने की कोई आवश्यकता नहीं है ; क्योंकि संविधान में ‘ वक्फ ‘ शब्द का उल्लेख नहीं है । इसलिए हिन्दू मंदिरों के लिए लड़ने वाले सर्वोच्च न्यायालय के वकील विष्णु शंकर जैन ने स्पष्ट मत व्यक्त किया कि वक्फ अधिनियम को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाना चाहिए। ९ नवंबर को श्री माटुंगा कच्ची मूर्तिपूजक जैन श्वेतांबर संघ और श्री माटुंगा जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक तपागच्छ संघ की ओर से माटुंगा सेंट्रल में ‘सामाजिक सांस्कृतिक धार्मिक संस्थान: जागरूकता और चुनौतियां ‘ विषय पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन का एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया था। उसमें वह बात कर रहे थे । इस अवसर पर उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए शत-प्रतिशत मतदान का आह्वान किया ।
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने आगे कहा कि,
१. वक्फ बोर्ड एक भयानक मामला है और आज की बड़ी समस्या बन गया है ।
२००८ से २०२४ के समय वक्फ की संपत्ति बढ़कर १२ लाख एकड़ हो गई है । एक तरह से देखा जाए तो इस कानून का दुरुपयोग हो रहा है ।
२. बांग्लादेश में हिन्दुओं को लक्ष्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है! ऐसी स्थिति से भारत को बचाने के लिये हिन्दुओं को स्वयं संगठित होना होगा।
३. जगह-जगह अवैध मजारें ( इस्लामिक पीर या फकीरों की कब्रें ) बनाकर भूमि जिहाद का प्रयास किया जा रहा है ; लेकिन कानूनी रूप से आम नागरिक इसके विरुद्ध अपनी आवाज उठा सकते हैं और संबंधित उच्च न्यायालय में जाकर आपत्ति प्रविष्ट करा सकते हैं ।
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