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हाथरस (उत्तरप्रदेश) – यहां नारायण साकार विश्व हरि उपाख्य भोले बाबा के सत्संग में मची भगदड में १२१ लोगों की मृत्यु हुई । ‘ भोले बाबा द्वारा सत्संगस्थल छोडे जाने के उपरांत उनके द्वारा स्पर्श की गई मिट्टी इकट्ठा करने हेतु भीड इकट्ठा हुई, उस समय यह भगदड मची । इस भगदड में श्रद्धालु निकट के नाले में जाकर गिरे’, ऐसी जानकारी उत्तरप्रदेश के सचिव मनोज कुमार सिंह ने दी ।
इस प्रकरण में पुलिस ने सत्संग के मुख्य स्वयंसेवक देवप्रकाश मधुकर तथा अन्य अज्ञातोंसहित आयोजकों के विरुद्ध अपराध पंजीकृत किया है । इसमें कहा गया है कि आयोजकों ने ८० सहस्र लोगों के सत्संग हेतु अनुमति मांगी थी; परंतु इस सत्संग में ढाए लाख से भी अधिक श्रद्धालु आए थे । मनोज कुमार सिंह ने कहा है कि भोले बाबा के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी; परंतु पंजीकृत अपराध में उनका नाम नहीं है । इसके कारण प्रश्न उठाए जा रहे हैं ।
कौन हैं भोले बाबा ?
भोले बाबा का वास्तविक नाम सूरज पाल सिंह है । लगभग ४० वर्ष पूर्व वे उत्तरप्रदेश पुलिस विभाग में हवलदार के रूप में नियुक्त हुए थे । १० वर्ष तक पुलिस की नौकरी करने के उपरांत उन्होंने नौकरी छोड दी । १९९० के दशक में उन्होंने हाथरस में स्थित उनकी स्वामित्ववाली भूमि पर बडे आश्रम का निर्माण किया तथा वहां सत्संग का आयोजन करना आरंभ किया । आसपास के गांवोसहित अन्य राज्यों से भी उनके आश्रम में बडी संख्या में लोग आने लगे ।
संपादकीय भूमिकाइतनी बडी संख्या में श्रद्धालु इकट्ठा होंगे, इसकी जानकारी पुलिस तथा प्रशासन को कैसे नहीं मिली ? तथा उन्होंने इस संदर्भ में उचित नियोजन क्यों नहीं किया ? इसके उत्तरदायी लोगों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए ! |
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