
नई देहली – विदेश मंत्री एस्. जयशंकर ने फिर से एक बार चीन का खरा चेहरा संसार के सामने लाया है । मलेशिया की राजधानी में भारतीय यात्रियों से वार्तालाप करते समय वे बोल रहे थे । भारत-चीन संबंधों की वर्तमान स्थिति के बारे में पूछे प्रश्न का उत्तर देते समय जयशंकर ने कहा, ‘‘भारतीयों के प्रति मेरा प्रथम कर्तव्य है सीमा की सुरक्षा तथा इसके बारे में मैं कोई समझौता नहीं कर सकता । चीन भारत के साथ किया लिखित समझौता बनाए रखने में असफल हुआ है ।’’
जयशंकर पुढे म्हणाले की,
१. चीन के साथ के द्विपक्षीय संबंध दृढ करने के लिए नियंत्रण रेखा के पास सेना की नियुक्ति करना, यह पहली शर्त होगी ।
२. प्रत्येक देश अपने पडोसी देश के साथ अच्छे संबंध चाहता है; परंतु प्रत्येक संबंध किसी न किसी आधार पर प्रस्थापित करना आवश्यक होता है । चीन से हमारी चर्चा अभी भी चल रही है ।
३. भारत तथा चीन की प्रत्यक्ष नियंत्रण रेखा पर सेना न लाने की हमारी परंपरा है । दोनों देशों के सैनिकी अड्डे कुछ दूरी पर हैं, जो सेना नियुक्ति के पारंपरिक स्थान हैं ।
४. जून २०२० में गलवान घाटी में हुए प्राणघातक संघर्ष के उपरांत भारत तथा चीन के बीच के संबंध तनावपूर्ण बन गए हैं ।
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