
नई देहली – भारत-म्यांमार सीमा पर विद्रोहियों द्वारा निर्मित अड्डों पर म्यांमार ने हवाई आक्रमण किया । इस आक्रमण के उपरांत मिजोरम में सतर्क रहने के आदेश दिए गए हैं । इस हवाई आक्रमण में कितने विद्रोही मारे गए, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं हुई । वर्तमान में म्यांमार की स्थिति जटिल होती जा रही है ।
विद्रोहियों के गुटों द्वारा सेना को चुनौति !
म्यांमार के सैन्य प्रशासन का विद्रोहियों के गुटों को सामना करना पड रहा है । भारत-म्यांमार सीमा के निकट उत्तर दिशा के शान राज्य में इसके पहले भीषण फाईरिंग हुई थी । वर्ष २०२१ में हुए सत्ता परिवर्तन के उपरांत देश में सैन्य प्रशासन आरंभ हुआ । म्यांमार के लष्कर नियुक्त राष्ट्रपति ने एक निवेदन जारी किया, जिसमें उन्होंने यह स्वीकार किया कि, ‘विद्रोह पर अधिक प्रभावी रूप से नियंत्रण करने में असफल होने के कारण देश का विघटन होने का संकट है ।
सीमा क्षेत्र पर विद्रोहियों का नियंत्रण !
सरकारविरोधी विद्रोही गुटों ने १०० से भी अधिक सैनिकी चौकियों पर नियंत्रण प्राप्त किया है । सीमापार के व्यापार को अनुमति देनेवाले तथा ४० प्रतिशत रेवेन्यू (राजस्व) के स्रोत रहे मुख्य सीमा क्रॉसिंग पर सरकार अपना नियंत्रण खोती जा रही है । चीन ने दोनों पक्षों को युद्ध रोकने का आवाहन किया है । म्यांमार के दुर्गम क्षेत्रों में ऊर्जा हेतु मूलभूत सुविधाओं के लिए चीन ने अरबों डालर्स का निवेश किया है ।
९० सहस्र लोग विस्थापित !
सेना और विद्रोहियों के गुट में बढते संघर्ष के कारण लगभग ९० सहस्र लोग विस्थापित हुए हैं । संयुक्त राष्ट्रों ने जानकारी दी है कि गोलीबारी तथा हवाई आक्रमण हो रहे शान राज्य में लगभग ५० सहस्र लोग विस्थापित हुए हैं । कुछ लोगों ने चीन में आश्रय लिया है । पडोस के सेजिंग और कचिन में ४० सहस्रों से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं ।
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