नवरात्रि के इन नौ दिनों में अखंड दीपप्रज्वलन किया जाता है । हम जानकर लेते हैं कि नौरात्रि में अखंड दीपप्रज्वलन करने का शास्त्रीय आधार क्या है ?

नवरात्रि की कालावधि में वायुमंडल में शक्तितत्त्व की तेज तरंगे कार्यरत रहती हैं । दीपक तेज का प्रतीक होता है । इन तेज तरंगों का वेग एवं कार्य अखंडित होता है । अखंड ज्योत में इन्हें ग्रहण करने की क्षमता होती है । अत: अखंड दीप प्रज्वलन से यह दीप की ओर आकृष्ट होती हैं । यह तरंगें अखंड दीप से वास्तु में फैलती हैं । इससे वास्तु में तेजतत्त्व बढता है । इस तेजतत्त्व का लाभ उस वास्तु में रहनेवालों को वर्ष भर होता है ।
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