नवरात्रि के इन नौ दिनों में अखंड दीपप्रज्वलन किया जाता है । हम जानकर लेते हैं कि नौरात्रि में अखंड दीपप्रज्वलन करने का शास्त्रीय आधार क्या है ?

नवरात्रि की कालावधि में वायुमंडल में शक्तितत्त्व की तेज तरंगे कार्यरत रहती हैं । दीपक तेज का प्रतीक होता है । इन तेज तरंगों का वेग एवं कार्य अखंडित होता है । अखंड ज्योत में इन्हें ग्रहण करने की क्षमता होती है । अत: अखंड दीप प्रज्वलन से यह दीप की ओर आकृष्ट होती हैं । यह तरंगें अखंड दीप से वास्तु में फैलती हैं । इससे वास्तु में तेजतत्त्व बढता है । इस तेजतत्त्व का लाभ उस वास्तु में रहनेवालों को वर्ष भर होता है ।
अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास का महत्त्व !
मंदिरों के प्रतिनिधियों एवं हिन्दुओं का संगठन आवश्यक ! – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति
(और इनकी सुनिए …) ‘मार्ग पर नमाज पढना अनुचित है, तो सभी त्योहारों के उत्सवों पर प्रतिबंध लगाइए !’ : AIMIM Asaduddin Owaisi
शून्य से खडे हुए गोवा के वैभवशाली मंदिर !
अधिक मास में सनातन संस्था के ग्रंथ और लघुग्रंथ अन्यों को देकर सर्वश्रेष्ठ ज्ञानदान का फल प्राप्त करें !
दौंड (पुणे) नगर में ३ दशकों के विलंब के पश्चात ८ अनधिकृत पशुवधगृह ध्वस्त !