साधकों को सूचना और पाठकों को आवाहन

‘वर्तमान में अनेक उत्पादक स्वयं के उत्पादों पर जनता के श्रद्धास्रोत देवताओं के नाम, चित्र अथवा शुभचिन्ह छापते हैं । उत्पादों पर देवताओं का नाम श्रद्धापूर्वक छापा गया हो, तो भी उनका उपयोग होने के उपरांत अनेक बार देवताओं के नाम पैरों के नीचे आने से अथवा कूडेदान में डालने से उन देवताओं का अपमान होता है ।
देवताओं के चित्रों तथा उनके नाम में उनकी शक्ति कार्यरत होती है । हमारे देवताओं तथा श्रद्धास्रोतों का इस प्रकार अपमान न हो, इसलिए सभी का सतर्क रहना आवश्यक है । ऐसी वस्तुओं का उपयोग करने के उपरांत, उस वस्तु पर बने देवताओं के नाम के ‘स्टिकर’ अथवा चित्र को अग्नि में विसर्जित करें । उस समय संबंधित देवता से प्रार्थना करें, ‘मेरे हाथों से आपका अपमान न हो, इस कारण आपका चित्र अग्नि में विसर्जित करते हैें ।’ जब किसी वस्तु का अग्नि विसर्जन करना संभव न हो, तब देवताओं के नाम अथवा चित्रों का अनादर न हो, इसका पूरा ध्यान रखें ।’
– श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (२४.३.२०२३)
(और इनकी सुनिए…) ‘श्रीकृष्ण मुसलमान थे तथा ५ समय की नमाज पढते थे !’ – Maulana Jarjis Ansari
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !