गंगा नदी की वैज्ञानिकता एवं गंगा की रक्षा के लिए किए प्रयास

ऋषि-मुनि एवं वैज्ञानिकों ने गंगानदी का बहुत वर्णन किया है । गंगा नदी में प्राणवायु का स्तर सब से अधिक है । गंगाजल में ‘बैक्टेरिया फॉस’ नामक विषाणु होता है । जिसके कारण गंगाजल खराब नहीं होता । गंगाजल पिने से स्वास्थ्य सदा ही अच्छा रहता है । कोरोना महामारी के समय गंगा नदी के तट पर बसे नगरों में कोरोना के रोगी अन्य नगरों से अल्प दिखाई दिए साथ ही ठीक होनेवाले लोगों की संख्या भी अधिक दिखाई दी । केवल कोरोना ही नहीं, अपितु कर्करोग जैसी अन्य बीमारियां भी गंगाजी के पानी से ठीक हो सकती है । गंगानदी में पूरे भारत को रोगमुक्त करने की क्षमता है । इसलिए ऐसे गंगाजल का अधिक शोधकार्य होना आवश्यक है । इसीके साथ ही गंगा नदी में प्रदूषण न हो, इसलिए प्रयास करना, यह सभी भारतियों का कर्तव्य है ।
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