
दिनांक : ३१.८.२०२२
तिथि : ‘भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी अर्थात श्री गणेश चतुर्थी के दिन रखे जानेवाले व्रत को ‘सिद्धिविनायक व्रत’ के नाम से जाना जाता है ।
परिवार के किस सदस्य को यह व्रत रखना चाहिए ?
सभी परिवारों में यह व्रत होना आवश्यक है । सभी भाई यदि एक साथ रहते हों, अर्थात सभी का एकत्रित द्रव्यकोष (खजाना) एवं चूल्हा हो, तो मिलकर एक ही मूर्ति का पूजन करना उचित है । यदि सबके द्रव्यकोष और चूल्हे किसी कारणवश भिन्न-भिन्न हों, तो उन्हें अपने-अपने घरों में स्वतंत्र रूप से गणेशव्रत रखना चाहिए ।’ (श्री गणेश चतुर्थी, तथा श्री गणेशोत्सव के विषय में विस्तृत विवेचन सनातन के ‘श्री गणपति’ ग्रंथ में किया है ।)
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सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।